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Baghpat News: कार्यवाहक प्राचार्य के हस्ताक्षर से निकाले जा रहे रुपये
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-प्रबंध समिति के कोषाध्यक्ष ने शाखा प्रबंधक को पत्र सौंपकर भुगतान नहीं करने के लिए कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के दिगंबर जैन कॉलेज की कार्यवाहक प्राचार्य डॉ़ ममता जैसियान के हस्ताक्षर से बैंक शाखा से विभिन्न मदों में रुपये निकालने का प्रबंध समिति के कोषाध्यक्ष सुनील जैन ने विरोध जताया है। पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक को पत्र भेजकर रुपये नहीं निकालने के लिए कहा है।
शाखा प्रबंधक को दिए पत्र में बताया कि विश्वविद्यालय से अनुमोदित प्राचार्य व सचिव के संयुक्त हस्ताक्षरों से कॉलेज के खातों का संचालन किया जाता है। पिछले सात माह से कार्यवाहक प्राचार्य डॉ़ ममता जैसियान के हस्ताक्षरों से कॉलेज के खातों से चेकों के सहारे भुगतान किया जा रहा है। कार्यवाहक प्राचार्य का अभी तक विश्वविद्यालय से अनुमोदन नहीं किया गया है। आरोप है कि सात माह से बैंक से जो रुपये दिए गए हैं, वह अवैधानिक हैं। यह गबन की श्रेणी में आता है। वहीं शाखा प्रबंधक आशीष जैन का कहना है कि इस मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जब तक अधिकारियों का कोई जवाब नहीं आता, तब तक भुगतान नहीं किया जाएगा।
वर्जन-- -
कार्यवाहक प्राचार्य का विश्वविद्यालय की तरफ से अनुमोदन करने का कोई नियम नहीं है। इनका अनुमोदन प्रबंध समिति करती है। विश्वविद्यालय से केवल स्थाई प्राचार्य का अनुमोदन किया जाता है। इसलिए कार्यवाहक प्राचार्य के हस्ताक्षर से रुपये निकाले जा सकते हैं। -डॉ़ धनेंद्र कुमार जैन, सचिव प्रबंध समिति
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के दिगंबर जैन कॉलेज की कार्यवाहक प्राचार्य डॉ़ ममता जैसियान के हस्ताक्षर से बैंक शाखा से विभिन्न मदों में रुपये निकालने का प्रबंध समिति के कोषाध्यक्ष सुनील जैन ने विरोध जताया है। पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक को पत्र भेजकर रुपये नहीं निकालने के लिए कहा है।
शाखा प्रबंधक को दिए पत्र में बताया कि विश्वविद्यालय से अनुमोदित प्राचार्य व सचिव के संयुक्त हस्ताक्षरों से कॉलेज के खातों का संचालन किया जाता है। पिछले सात माह से कार्यवाहक प्राचार्य डॉ़ ममता जैसियान के हस्ताक्षरों से कॉलेज के खातों से चेकों के सहारे भुगतान किया जा रहा है। कार्यवाहक प्राचार्य का अभी तक विश्वविद्यालय से अनुमोदन नहीं किया गया है। आरोप है कि सात माह से बैंक से जो रुपये दिए गए हैं, वह अवैधानिक हैं। यह गबन की श्रेणी में आता है। वहीं शाखा प्रबंधक आशीष जैन का कहना है कि इस मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जब तक अधिकारियों का कोई जवाब नहीं आता, तब तक भुगतान नहीं किया जाएगा।
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कार्यवाहक प्राचार्य का विश्वविद्यालय की तरफ से अनुमोदन करने का कोई नियम नहीं है। इनका अनुमोदन प्रबंध समिति करती है। विश्वविद्यालय से केवल स्थाई प्राचार्य का अनुमोदन किया जाता है। इसलिए कार्यवाहक प्राचार्य के हस्ताक्षर से रुपये निकाले जा सकते हैं। -डॉ़ धनेंद्र कुमार जैन, सचिव प्रबंध समिति
