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Baghpat News: अफसरों ने स्याही से कत्ल कर फाइलों में दफना दिए दिव्यांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। दिव्यांगता का दंश झेल रही गाधी गांव की मुनेश और रठौड़ा गांव के रुकमुद्दीन को अधिकारियों ने कागजों में मार दिया। अब पेंशन बंद होने पर दोनों खुद को जिंदा बताते हुए अफसरों के पास चक्कर लगा रहे हैं, मगर उनको जिंदा नहीं किया गया। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत हुई तो उनको अपने जिंदा होने की उम्मीद जगी।
मुनेश की दिव्यांग होने के कारण छह साल पहले पेंशन शुरू की गई थी। वर्ष 2022 में मुनेश को मरा हुआ बताकर पेंशन बंद कर दी गई। इसके बाद से अभी तक वह विकास भवन में दस बार अधिकारियों के पास जा चुकी और अपने जिंदा होने के सभी कागज भी दिए, मगर अधिकारियों ने कार्रवाई के डर से शिकायत भी फाइलों में दबा दी।
इस तरह से रठौड़ा गांव के पैरों से दिव्यांग रुकमुद्दीन को वर्ष 2023 में कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। पेंशन बंद हुई तो वह अधिकारियों के पास चक्कर काटने लगे। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। अब परेशान होकर दोनों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई।
वहां से जवाब मांगा गया तो अधिकारी उनके जिंदा होने के दस्तावेज जुटाने में लग गए। दोनों ने बताया कि अफसरों की लापरवाही की सजा उनको मिल रही है। जल्द उनको जिंदा किया जाए तो पीड़ा दूर हो।
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बागपत। दिव्यांगता का दंश झेल रही गाधी गांव की मुनेश और रठौड़ा गांव के रुकमुद्दीन को अधिकारियों ने कागजों में मार दिया। अब पेंशन बंद होने पर दोनों खुद को जिंदा बताते हुए अफसरों के पास चक्कर लगा रहे हैं, मगर उनको जिंदा नहीं किया गया। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत हुई तो उनको अपने जिंदा होने की उम्मीद जगी।
मुनेश की दिव्यांग होने के कारण छह साल पहले पेंशन शुरू की गई थी। वर्ष 2022 में मुनेश को मरा हुआ बताकर पेंशन बंद कर दी गई। इसके बाद से अभी तक वह विकास भवन में दस बार अधिकारियों के पास जा चुकी और अपने जिंदा होने के सभी कागज भी दिए, मगर अधिकारियों ने कार्रवाई के डर से शिकायत भी फाइलों में दबा दी।
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इस तरह से रठौड़ा गांव के पैरों से दिव्यांग रुकमुद्दीन को वर्ष 2023 में कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। पेंशन बंद हुई तो वह अधिकारियों के पास चक्कर काटने लगे। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। अब परेशान होकर दोनों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई।
वहां से जवाब मांगा गया तो अधिकारी उनके जिंदा होने के दस्तावेज जुटाने में लग गए। दोनों ने बताया कि अफसरों की लापरवाही की सजा उनको मिल रही है। जल्द उनको जिंदा किया जाए तो पीड़ा दूर हो।

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