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समस्त प्राणियों में परमात्मा बनने की शक्ति : विमर्श
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फोटो संख्या 1
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के अजितनाथ सभागार में मंगलवार को धर्म सभा जैन संत विमर्श सागर महाराज ने कहा कि संसार के समस्त प्राणियों के भीतर परमात्मा बनने की शक्ति विद्यमान है।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म मानव को साक्षात हिंसा से बचाता है। साथ ही चार गति, चार कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) से बचने के लिए मन को निर्मल कर आगे चलने की प्रेरणा देता है। मनुष्य स्वयं की सोचता है, अन्य किसी से कोई आकांक्षा नहीं करता। संत बिना प्रयोजन कहीं भी नहीं चलते हैं। साधु छोटे गांव में सात दिन, बड़े गांव में एक से दो माह तक या चातुर्मास तक रुक सकते हैं। इससे अधिक नहीं रुक सकते, क्योंकि एक गांव में ज्यादा रुकने से मोह परिणाम जाग्रत होते हैं और इस कारण धार्मिक क्रिया में कमी आती है। इस मौके पर मुकेश जैन, प्रदीप जैन, जितेंद्र जैन, विनोद जैन, वरदान जैन, मदन लाल जैन आदि उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के अजितनाथ सभागार में मंगलवार को धर्म सभा जैन संत विमर्श सागर महाराज ने कहा कि संसार के समस्त प्राणियों के भीतर परमात्मा बनने की शक्ति विद्यमान है।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म मानव को साक्षात हिंसा से बचाता है। साथ ही चार गति, चार कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) से बचने के लिए मन को निर्मल कर आगे चलने की प्रेरणा देता है। मनुष्य स्वयं की सोचता है, अन्य किसी से कोई आकांक्षा नहीं करता। संत बिना प्रयोजन कहीं भी नहीं चलते हैं। साधु छोटे गांव में सात दिन, बड़े गांव में एक से दो माह तक या चातुर्मास तक रुक सकते हैं। इससे अधिक नहीं रुक सकते, क्योंकि एक गांव में ज्यादा रुकने से मोह परिणाम जाग्रत होते हैं और इस कारण धार्मिक क्रिया में कमी आती है। इस मौके पर मुकेश जैन, प्रदीप जैन, जितेंद्र जैन, विनोद जैन, वरदान जैन, मदन लाल जैन आदि उपस्थित रहे।
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