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Bahraich News: कतर्नियाघाट में दो वर्ष में ही ढह गई 24 करोड़ की सुरक्षा दीवार

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Mar 2026 11:52 PM IST
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24 crore security wall collapses in Katarniaghat within two years
कतर्नियाघाट में टूटी तार फेंसिंग। - फोटो : कतर्नियाघाट में टूटी तार फेंसिंग।
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मिहींपुरवा। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के बड़े दावों के साथ कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य में 24 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई 75 किलोमीटर लंबी चेनलिंक फेंसिंग जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके चलते बाघ, तेंदुए और हाथी आसानी से आबादी में पहुंच रहे हैं। इससे न सिर्फ मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है, बल्कि लोगों की सुरक्षा पर भी संकट है।
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वर्ष 2023-24 में राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि से तैयार की गई यह सुरक्षा दीवार हाथियों के प्रहार के सामने दो वर्ष भी टिक नहीं सकी। जंगल और आबादी के बीच सुरक्षा कवच के रूप में खड़ी की गई यह फेंसिंग कई स्थानों पर टूटी और झुकी पड़ी है। लोहे के एंगल मुड़ गए हैं, चेनलिंक तार उखड़ चुके हैं और जालियां सड़क किनारे बिखरी नजर आ रही हैं। फेंसिंग के टूटे हिस्सों से बाघ, तेंदुआ और हाथी जैसे खतरनाक वन्यजीव अब आसानी से आबादी में पहुंच रहे हैं। इससे जंगल के सीमावर्ती गांवों में एक बार फिर तेंदुए की गुर्राहट, बाघ की दहाड़ और हाथी की चिंघाड़ सुनाई पड़ रही है। गांवों में लगातार हमलों से दहशत का माहौल बन गया है। सबसे अधिक नुकसान कतर्नियाघाट-निशानगाड़ा जैसे अति संवेदनशील वन रेंज में हुआ है, जबकि यह जंगल का कोर जोन है।
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शुरुआती दौर में ही गुणवत्ता पर उठे थे सवाल
कतर्नियाघाट निवासी संजय कुमार और संतोष ने बताया कि फेंसिंग निर्माण के समय ही इसकी मजबूती पर सवाल उठने लगे थे। उनका कहना है कि हाथियों के एक ही प्रहार से कई स्थानों पर फेंसिंग गिर गई थी और तब से आज तक उसकी मरम्मत तक नहीं कराई गई। आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई।

क्षतिग्रस्त फेंसिंग से हादसों का खतरा
स्थिति का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि बिछिया–लखीमपुर मार्ग पर गिरजापुरी से कैलाशपुरी के बीच कई स्थानों पर फेंसिंग सड़क पर गिरी पड़ी है। यह वाहन चालकों और बाइक सवारों के लिए भी बड़ा खतरा बन गई है। खासकर रात के समय कम दृश्यता के कारण दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
पांच अहम सवाल, कौन देगा जवाब...
- आखिर 24 करोड़ की लागत से बनी 75 किलोमीटर लंबी चेनलिंक फेंसिंग दो वर्ष भी क्यों नहीं टिक सकी।
- क्या फेंसिंग के निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
- निर्माण कार्य की तकनीकी जांच और निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी या एजेंसी की थी।
- हाथियों के प्रहार से फेंसिंग टूटने के बाद समय रहते मरम्मत और रखरखाव क्यों नहीं कराया गया।
- ग्रामीणों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।

कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजा पत्र
प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने स्वीकार किया कि हाथियों ने चेनलिंक फेंसिंग को कई स्थानों पर नुकसान पहुंचाया है। इसकी मरम्मत के लिए कार्ययोजना तैयार कर शासन को पत्र भेजकर धन आवंटन का अनुरोध किया गया है। बजट मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा।
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