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Bahraich News: ई-पंजीकरण मॉड्यूल का विरोध, हड़ताल पर अधिवक्ता
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कैसरगंज में एसडीएम को ज्ञापन सौंपते अधिवक्ता।
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कैसरगंज। प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-पंजीकरण मॉड्यूल फ्रंट ऑफिस व्यवस्था के विरोध में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य ठप कर विरोध प्रदर्शन किया। उनके साथ दस्तावेज लेखको, स्टांप विक्रेताओं, मुंशी, फोटोग्राफर एवं कंप्यूटर ऑपरेटरों के संगठनों ने भी दो दिवसीय हड़ताल शुरू की। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर नई व्यवस्था तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह विसेन एवं महामंत्री वीरेंद्र कुमार पांडेय के नेतृत्व में सभी संगठनों ने मंगलवार से दो दिवसीय कार्य बहिष्कार की घोषणा की। इसके बाद अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को सात सूत्री ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में कहा गया कि महानिरीक्षक निबंधन के चार जून के पत्र संख्या 2523 के तहत प्रस्तावित ई-पंजीकरण मॉड्यूल का सभी संगठन विरोध करते हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से प्रदेश के लाखों अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं, फोटोग्राफरों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की आजीविका प्रभावित होगी। पंजीकरण कार्य निजी संस्थाओं को सौंपे जाने से आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा भी मिलेगा।
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एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से ई-पंजीकरण मॉड्यूल व्यवस्था को तत्काल वापस लेने, पंजीकरण व्यवस्था पूर्ववत संचालित करने, विभाग में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने, निजी केंद्रों के माध्यम से पंजीकरण पर रोक लगाने तथा कुछ मामलों में पैन कार्ड की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की। इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष गंगाधर मिश्र, ज्ञानबाबू वर्मा, विजय प्रताप सिंह, केदारनाथ गुप्ता, सूर्यभान सिंह, बालकराम सरोज, पंकज श्रीवास्तव, त्रिवेणी प्रसाद, अनूप कुमार मौर्य आदि मौजूद रहे।
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह विसेन एवं महामंत्री वीरेंद्र कुमार पांडेय के नेतृत्व में सभी संगठनों ने मंगलवार से दो दिवसीय कार्य बहिष्कार की घोषणा की। इसके बाद अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को सात सूत्री ज्ञापन भेजा।
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ज्ञापन में कहा गया कि महानिरीक्षक निबंधन के चार जून के पत्र संख्या 2523 के तहत प्रस्तावित ई-पंजीकरण मॉड्यूल का सभी संगठन विरोध करते हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से प्रदेश के लाखों अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं, फोटोग्राफरों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की आजीविका प्रभावित होगी। पंजीकरण कार्य निजी संस्थाओं को सौंपे जाने से आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा भी मिलेगा।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से ई-पंजीकरण मॉड्यूल व्यवस्था को तत्काल वापस लेने, पंजीकरण व्यवस्था पूर्ववत संचालित करने, विभाग में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने, निजी केंद्रों के माध्यम से पंजीकरण पर रोक लगाने तथा कुछ मामलों में पैन कार्ड की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की। इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष गंगाधर मिश्र, ज्ञानबाबू वर्मा, विजय प्रताप सिंह, केदारनाथ गुप्ता, सूर्यभान सिंह, बालकराम सरोज, पंकज श्रीवास्तव, त्रिवेणी प्रसाद, अनूप कुमार मौर्य आदि मौजूद रहे।