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Bahraich News: इंटर में निजी विद्यालयों का दबदबा
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इंटरमीडिएट में 89.80 प्रतिशत अंक पाकर जिले में पांचवें स्थान पर रहे धनीराम को मिठाई खिलाते प
- फोटो : इंटरमीडिएट में 89.80 प्रतिशत अंक पाकर जिले में पांचवें स्थान पर रहे धनीराम को मिठाई खिलाते प्रबंधक।
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बहराइच। यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में इस बार निजी विद्यालयों का दबदबा साफ तौर पर देखने को मिला। इंटरमीडिएट परीक्षा के घोषित परिणामों के अनुसार जिले की टॉप-10 सूची में एक भी राजकीय या सहायता प्राप्त विद्यालय का छात्र स्थान नहीं बना सका। सभी मेधावी निजी विद्यालयों से ही रहे।
वहीं हाईस्कूल परीक्षा परिणाम में भी निजी विद्यालयों का प्रदर्शन बेहतर रहा। टॉप-10 सूची में शामिल कुल 22 मेधावियों में केवल एक छात्र राजकीय विद्यालय से रहा। राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सेमरौना (विशेश्वरगंज) के अनुराग द्विवेदी ने 93.50 प्रतिशत अंक हासिल कर सूची में जगह बनाई।
इसके अलावा सहायता प्राप्त विद्यालयों से कुछ छात्र टॉप-10 में शामिल रहे, जिनमें आचार्य रमेश चंद्र गर्ल्स इंटर कॉलेज साकेत नगर रुपईडीहा, केवी इंटर कॉलेज पयागपुर और चौधरी सियाराम इंटर कॉलेज फखरपुर के विद्यार्थी प्रमुख रहे। हालांकि संख्या के लिहाज से निजी विद्यालयों का प्रदर्शन अधिक प्रभावी रहा।
शिक्षा विशेषज्ञ पूर्व प्राचार्य मेजर डॉ. एसपी सिंह का मानना है कि निजी विद्यालयों में बेहतर संसाधन, नियमित निगरानी और प्रतियोगी माहौल के कारण छात्रों का प्रदर्शन बेहतर रहता है। वहीं सरकारी विद्यालयों में संसाधनों और प्रतिस्पर्धा की कमी का असर परिणामों में दिखाई देता है।
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वहीं हाईस्कूल परीक्षा परिणाम में भी निजी विद्यालयों का प्रदर्शन बेहतर रहा। टॉप-10 सूची में शामिल कुल 22 मेधावियों में केवल एक छात्र राजकीय विद्यालय से रहा। राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सेमरौना (विशेश्वरगंज) के अनुराग द्विवेदी ने 93.50 प्रतिशत अंक हासिल कर सूची में जगह बनाई।
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इसके अलावा सहायता प्राप्त विद्यालयों से कुछ छात्र टॉप-10 में शामिल रहे, जिनमें आचार्य रमेश चंद्र गर्ल्स इंटर कॉलेज साकेत नगर रुपईडीहा, केवी इंटर कॉलेज पयागपुर और चौधरी सियाराम इंटर कॉलेज फखरपुर के विद्यार्थी प्रमुख रहे। हालांकि संख्या के लिहाज से निजी विद्यालयों का प्रदर्शन अधिक प्रभावी रहा।
शिक्षा विशेषज्ञ पूर्व प्राचार्य मेजर डॉ. एसपी सिंह का मानना है कि निजी विद्यालयों में बेहतर संसाधन, नियमित निगरानी और प्रतियोगी माहौल के कारण छात्रों का प्रदर्शन बेहतर रहता है। वहीं सरकारी विद्यालयों में संसाधनों और प्रतिस्पर्धा की कमी का असर परिणामों में दिखाई देता है।

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