{"_id":"69bc46a53c6cf71dad00944a","slug":"two-convicts-sentenced-to-10-years-rigorous-imprisonment-each-bahraich-news-c-98-1-bhr1024-146110-2026-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: दो दोषियों को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: दो दोषियों को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Fri, 20 Mar 2026 12:25 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच। हत्या के प्रयास के मामले में बृहस्पतिवार को एडीजे चतुर्थ की अदालत ने सुनवाई करते हुए दो आरोपियों को दोषी करार देकर 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
कैसरगंज निवासी वादी उमाशंकर ने 17 सितंबर 1999 को थाने में तहरीर देकर बताया था कि वह गांव के पास केपी सिंह के खेत में पशु चरा रहे थे। उसी दौरान गोंडा जिले के कर्नलगंज के हीरापुर कमियर गांव निवासी आनंद और आदित्य मौके पर पहुंचे और विवाद करने लगे। बात बढ़ने पर आनंद ने तमंचे से फायर कर दिया, जिससे उमाशंकर गंभीर रूप से घायल हो गए। लोग दौड़े, तब जान बच सकी।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर 14 सितंबर 1999 को न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। इसी मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील प्रसाद की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने घटना को गंभीर बताते हुए कड़ी सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने नरमी बरतने की दलील दी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आनंद और आदित्य को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
Trending Videos
कैसरगंज निवासी वादी उमाशंकर ने 17 सितंबर 1999 को थाने में तहरीर देकर बताया था कि वह गांव के पास केपी सिंह के खेत में पशु चरा रहे थे। उसी दौरान गोंडा जिले के कर्नलगंज के हीरापुर कमियर गांव निवासी आनंद और आदित्य मौके पर पहुंचे और विवाद करने लगे। बात बढ़ने पर आनंद ने तमंचे से फायर कर दिया, जिससे उमाशंकर गंभीर रूप से घायल हो गए। लोग दौड़े, तब जान बच सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन
तहरीर के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर 14 सितंबर 1999 को न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। इसी मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील प्रसाद की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने घटना को गंभीर बताते हुए कड़ी सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने नरमी बरतने की दलील दी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आनंद और आदित्य को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।