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Bahraich News: भरथापुर के विस्थापन को सीएम के दौरे का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Tue, 24 Mar 2026 12:22 AM IST
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सेमरहना गांव में पुर्नवास स्थल का निरीक्षण करते डीएम व एसपी। -संवाद
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मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट के बीच बसे भरथापुर गांव का विस्थापन सरकारी फाइलों में लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी शून्य है। 136 परिवारों के खातों में आवास की पहली किस्त आए चार महीने बीत चुके हैं, बावजूद इसके सेमरहना में अब तक एक भी मकान की नींव नहीं रखी गई। पूरा प्रोजेक्ट एक बार फिर मुख्यमंत्री के संभावित दौरे के भरोसे टिका नजर आ रहा है।
कौड़ियाला नदी में 29 अक्तूबर को हुई नाव दुर्घटना के बाद 2 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोतीपुर पहुंचकर भरथापुर के तत्काल विस्थापन की घोषणा की थी। एक महीने के भीतर सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉलोनी बसाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बाद नानपारा-लखीमपुर हाईवे किनारे सेमरहना गांव के पास की जमीन को पुनर्वास स्थल के रूप में चिह्नित किया गया।
दिसंबर में 136 परिवारों के खातों में आवास की पहली किस्त भेज दी गई, 29 जनवरी को कैबिनेट ने योजना को मंजूरी देते हुए प्रत्येक परिवार को 746 वर्गफीट जमीन, पक्का मकान, सड़क, बिजली, पेयजल, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं देने का निर्णय लिया।
फरवरी में प्रशासनिक हलचल तेज हुई, हेलीपैड निर्माण और साफ-सफाई शुरू हुई, लेकिन अचानक पूरा काम ठप पड़ गया। अब 25 मार्च को मुख्यमंत्री के संभावित दौरे की चर्चा के साथ सेमरहना में फिर हलचल दिखने लगी है। मंच, पंडाल और भूमि को समतल करने का काम तेज हो गया है।
उधर, भरथापुर के ग्रामीण असमंजस में हैं, खाते में रकम है, लेकिन निर्माण शुरू करने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं। वे न पूरी तरह पुराने गांव से निकल पा रहे हैं, न नए ठिकाने पर बस पा रहे हैं।
फिलहाल, भरथापुर का विस्थापन फिर ‘दौरे की तारीख’ पर अटका है। अब सबकी निगाहें 25 मार्च पर टिकी हैं। सभी के जेहन में सिर्फ यही सवाल है कि क्या इस बार वादे हकीकत बनेंगे या इंतजार और लंबा होगा।
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अधिकारियों ने मौके पर डाला डेरा
मुख्यमंत्री के संभावित आगमन की तैयारियों के मद्देनजर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक राम नयन सिंह, मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चंद्र, अपर पुलिस अधीक्षक डीपी तिवारी, एसडीएम राम दयाल और बीडीओ विनोद यादव सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी सेमरहना में चिह्नित स्थल का रविवार से निरीक्षण कर रहे हैं। हेलीपैड भी बनाया जा रहा है।
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जहां बनना था आवास, वहां लग रहा पंडाल
सेमरहना गांव में जो जमीन भरथापुर गांव के लोगों के लिए चिह्नित की गई है, उस जमीन पर अब तक ग्रामीणों के आवास तो नहीं बन सके, लेकिन वहां अब मुख्यमंत्री के संभावित दौरे के मद्देनजर पंडाल तैयार किया जा रहा है।
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कौड़ियाला नदी में 29 अक्तूबर को हुई नाव दुर्घटना के बाद 2 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोतीपुर पहुंचकर भरथापुर के तत्काल विस्थापन की घोषणा की थी। एक महीने के भीतर सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉलोनी बसाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बाद नानपारा-लखीमपुर हाईवे किनारे सेमरहना गांव के पास की जमीन को पुनर्वास स्थल के रूप में चिह्नित किया गया।
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दिसंबर में 136 परिवारों के खातों में आवास की पहली किस्त भेज दी गई, 29 जनवरी को कैबिनेट ने योजना को मंजूरी देते हुए प्रत्येक परिवार को 746 वर्गफीट जमीन, पक्का मकान, सड़क, बिजली, पेयजल, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं देने का निर्णय लिया।
फरवरी में प्रशासनिक हलचल तेज हुई, हेलीपैड निर्माण और साफ-सफाई शुरू हुई, लेकिन अचानक पूरा काम ठप पड़ गया। अब 25 मार्च को मुख्यमंत्री के संभावित दौरे की चर्चा के साथ सेमरहना में फिर हलचल दिखने लगी है। मंच, पंडाल और भूमि को समतल करने का काम तेज हो गया है।
उधर, भरथापुर के ग्रामीण असमंजस में हैं, खाते में रकम है, लेकिन निर्माण शुरू करने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं। वे न पूरी तरह पुराने गांव से निकल पा रहे हैं, न नए ठिकाने पर बस पा रहे हैं।
फिलहाल, भरथापुर का विस्थापन फिर ‘दौरे की तारीख’ पर अटका है। अब सबकी निगाहें 25 मार्च पर टिकी हैं। सभी के जेहन में सिर्फ यही सवाल है कि क्या इस बार वादे हकीकत बनेंगे या इंतजार और लंबा होगा।
अधिकारियों ने मौके पर डाला डेरा
मुख्यमंत्री के संभावित आगमन की तैयारियों के मद्देनजर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक राम नयन सिंह, मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चंद्र, अपर पुलिस अधीक्षक डीपी तिवारी, एसडीएम राम दयाल और बीडीओ विनोद यादव सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी सेमरहना में चिह्नित स्थल का रविवार से निरीक्षण कर रहे हैं। हेलीपैड भी बनाया जा रहा है।
जहां बनना था आवास, वहां लग रहा पंडाल
सेमरहना गांव में जो जमीन भरथापुर गांव के लोगों के लिए चिह्नित की गई है, उस जमीन पर अब तक ग्रामीणों के आवास तो नहीं बन सके, लेकिन वहां अब मुख्यमंत्री के संभावित दौरे के मद्देनजर पंडाल तैयार किया जा रहा है।