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Bahraich News: अमृतपाल की फरारी से बहराइच बॉर्डर तक फैला वारिस पंजाब दे का नेटवर्क
Sun, 26 Jul 2026 01:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sun, 26 Jul 2026 01:31 AM IST
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बहराइच। भारत-नेपाल सीमा पर पकड़े गए अजनाला थाना कांड के वांछित आरोपी विक्रमजीत सिंह और अमेरिकी नागरिक मनवीर सिंह ढिल्लों की जांच में सुरक्षा एजेंसियों के हाथ बड़ा सुराग लगा है। जांच में सामने आया है कि प्रतिबंधित संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ का सक्रिय सदस्य जोगा सिंह केवल सीमा पार कराने वाले नेटवर्क का हिस्सा ही नहीं था, बल्कि वर्ष 2023 में चर्चित अजनाला थाना कांड के बाद संगठन प्रमुख अमृतपाल सिंह को फरारी के दौरान पंजाब से बाहर सुरक्षित शरण देने में भी अहम भूमिका रही थी।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जोगा सिंह के खिलाफ इसी मामले में पंजाब के होशियारपुर जनपद के मेहतियाना थाने में पहले से प्राथमिकी दर्ज है। पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है कि अजनाला कांड के बाद सक्रिय हुआ नेटवर्क किस तरह नेपाल के रास्ते संगठन के सदस्यों की आवाजाही और सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था करता रहा।
जांच में यह भी सामने आया है कि करीब एक वर्ष पहले जोगा सिंह ने विक्रमजीत सिंह को नेपाल पहुंचाने में सहयोग किया था। इसके बाद 23 जुलाई को उसी नेटवर्क के जरिये फर्जी दस्तावेज और स्थानीय मदद से विक्रमजीत सिंह तथा अमेरिकी नागरिक मनवीर सिंह ढिल्लों को भारत में प्रवेश दिलाने की योजना बनाई। सीमा पर एसएसबी और रुपईडीहा पुलिस की सतर्कता के चलते यह प्रयास विफल हो गया और पूरा नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गया।
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एसपी के अनुसार जांच अब केवल अवैध घुसपैठ तक सीमित नहीं है। केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संगठन के सदस्यों को नेपाल में किसने संरक्षण दिया, फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए और स्थानीय स्तर पर किन लोगों ने उनकी मदद की। सीमा पार संपर्कों, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की भी गहन जांच की जा रही है।
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सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जोगा सिंह के खिलाफ इसी मामले में पंजाब के होशियारपुर जनपद के मेहतियाना थाने में पहले से प्राथमिकी दर्ज है। पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है कि अजनाला कांड के बाद सक्रिय हुआ नेटवर्क किस तरह नेपाल के रास्ते संगठन के सदस्यों की आवाजाही और सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था करता रहा।
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जांच में यह भी सामने आया है कि करीब एक वर्ष पहले जोगा सिंह ने विक्रमजीत सिंह को नेपाल पहुंचाने में सहयोग किया था। इसके बाद 23 जुलाई को उसी नेटवर्क के जरिये फर्जी दस्तावेज और स्थानीय मदद से विक्रमजीत सिंह तथा अमेरिकी नागरिक मनवीर सिंह ढिल्लों को भारत में प्रवेश दिलाने की योजना बनाई। सीमा पर एसएसबी और रुपईडीहा पुलिस की सतर्कता के चलते यह प्रयास विफल हो गया और पूरा नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गया।
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एसपी के अनुसार जांच अब केवल अवैध घुसपैठ तक सीमित नहीं है। केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संगठन के सदस्यों को नेपाल में किसने संरक्षण दिया, फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए और स्थानीय स्तर पर किन लोगों ने उनकी मदद की। सीमा पार संपर्कों, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की भी गहन जांच की जा रही है।