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Ballia News: 35 गांवों के 40 हजार से ज्यादा लोग शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे
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मझौंवा क्षेत्र के गंगापुर ग्रामसभा के बलिहार गांव नल से पानी भरने की लगी भीड़।संवाद
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मझौवां। गंगापुर ग्रामसभा अंतर्गत बलिहार में बनी पानी की टंकी लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है। इस टंकी से जलापूर्ति रामगढ़-बलिहार मार्ग और एनएच-31 तक ही सीमित रह गई है।
मीनापुर, चौबे छपरा, रिकनी छपरा, दुर्जनपुर, हुकुम छपरा, तेलिया टोला, शाहपुर, तिवारी टोला और केहरपुर समेत 35 गांवों के 40 हजार से ज्यादा लोग शुद्ध पेयजल के लिए परेशान होते हैं। तिवारी टोला की हालत तो और भी चिंताजनक है। यहां हर गली-मोहल्ले में पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन घरों में लगे नल सिर्फ दिखावे के बनकर रह गए हैं। सरफेस वाटर योजना भी कागजों से आगे बढ़कर जमीन पर साकार नहीं हो सकी है। स्थानीय निवासी हरिशंकर मिश्र ने कहा कि आर्सेनिक युक्त पानी पीने को लोग मजबूर हैं। जब हर गली में पाइप लाइन बिछ चुकी है तो पानी घरों तक क्यों नहीं पहुंच रहा।
पेयजल किल्लत की सबसे बड़ी मार महिलाओं और बच्चों पर पड़ रही है। पानी की कमी इतनी गंभीर है कि उन्हें रोजाना 2-3 किलोमीटर पैदल चलकर भूतनाथ बाबा रामगढ़ और सब्जी बाजार के पास लगे सार्वजनिक नलों से पानी लाना पड़ता है। महिलाओं का कहना है कि टंकी से नियमित रूप से पानी की सप्लाई नहीं की जाती है। कभी पाइप में रिसाव का बहाना बनाया जाता है तो कभी मरम्मत कार्य चलने का हवाला देकर आपूर्ति बाधित रहती है। उर्मिला देवी का कहना है कि पानी आपूर्ति के दौरान बहाव इतना कम रहता है कि घर तक पानी नहीं पहुंचता।
स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब घरों के नलों से निकलने वाला पानी चंद मिनटों में पीला पड़ जाता है। क्योंकि यह आर्सेनिक युक्त पानी है। ये धीरे-धीरे लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। लोग पहले इस पानी को उबालकर पीते थे, लेकिन अब गैस सिलिंडर की किल्लत बढ़ जाने की वजह से मजबूरन आर्सेनिक युक्त पानी पी रहे हैं। शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने से लोगों के शरीर में खुजली होने लगी है। हर गली और चौराहे पर लगे नल जहर उगलते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन समाधान आज तक नहीं मिला। टंकी पर तैनात ऑपरेटर निजी मोटरों को समस्या का कारण बता रहा है।
एक्सईएन जल जीवन मिशन मुकीम अहमद ने बताया कि मरम्मत का कार्य प्रस्तावित है, जिसके लिए डीपीआर बनकर थी। स्वीकृत भी हो गई है, लेकिन अभी तक धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। विभाग की आर्थिक क्षमता सीमित है, इसलिए फिलहाल व्यवस्था को अस्थायी रूप से संचालित किया जा रहा है। जैसे ही भुगतान प्राप्त होगा, पूरी मरम्मत का कार्य एक साथ और पूर्ण कराया जाएगा।
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मीनापुर, चौबे छपरा, रिकनी छपरा, दुर्जनपुर, हुकुम छपरा, तेलिया टोला, शाहपुर, तिवारी टोला और केहरपुर समेत 35 गांवों के 40 हजार से ज्यादा लोग शुद्ध पेयजल के लिए परेशान होते हैं। तिवारी टोला की हालत तो और भी चिंताजनक है। यहां हर गली-मोहल्ले में पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन घरों में लगे नल सिर्फ दिखावे के बनकर रह गए हैं। सरफेस वाटर योजना भी कागजों से आगे बढ़कर जमीन पर साकार नहीं हो सकी है। स्थानीय निवासी हरिशंकर मिश्र ने कहा कि आर्सेनिक युक्त पानी पीने को लोग मजबूर हैं। जब हर गली में पाइप लाइन बिछ चुकी है तो पानी घरों तक क्यों नहीं पहुंच रहा।
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पेयजल किल्लत की सबसे बड़ी मार महिलाओं और बच्चों पर पड़ रही है। पानी की कमी इतनी गंभीर है कि उन्हें रोजाना 2-3 किलोमीटर पैदल चलकर भूतनाथ बाबा रामगढ़ और सब्जी बाजार के पास लगे सार्वजनिक नलों से पानी लाना पड़ता है। महिलाओं का कहना है कि टंकी से नियमित रूप से पानी की सप्लाई नहीं की जाती है। कभी पाइप में रिसाव का बहाना बनाया जाता है तो कभी मरम्मत कार्य चलने का हवाला देकर आपूर्ति बाधित रहती है। उर्मिला देवी का कहना है कि पानी आपूर्ति के दौरान बहाव इतना कम रहता है कि घर तक पानी नहीं पहुंचता।
स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब घरों के नलों से निकलने वाला पानी चंद मिनटों में पीला पड़ जाता है। क्योंकि यह आर्सेनिक युक्त पानी है। ये धीरे-धीरे लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। लोग पहले इस पानी को उबालकर पीते थे, लेकिन अब गैस सिलिंडर की किल्लत बढ़ जाने की वजह से मजबूरन आर्सेनिक युक्त पानी पी रहे हैं। शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने से लोगों के शरीर में खुजली होने लगी है। हर गली और चौराहे पर लगे नल जहर उगलते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन समाधान आज तक नहीं मिला। टंकी पर तैनात ऑपरेटर निजी मोटरों को समस्या का कारण बता रहा है।
एक्सईएन जल जीवन मिशन मुकीम अहमद ने बताया कि मरम्मत का कार्य प्रस्तावित है, जिसके लिए डीपीआर बनकर थी। स्वीकृत भी हो गई है, लेकिन अभी तक धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। विभाग की आर्थिक क्षमता सीमित है, इसलिए फिलहाल व्यवस्था को अस्थायी रूप से संचालित किया जा रहा है। जैसे ही भुगतान प्राप्त होगा, पूरी मरम्मत का कार्य एक साथ और पूर्ण कराया जाएगा।