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Ballia News: फिजिशियन डॉक्टर पंकज का इस्तीफा, पांच साल में सात डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी
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ओपीडी संख्या 18 में आर्थो व सर्जन बैठते है, लेकिन एसी नहीं लगी है।संवाद
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बलिया। सरकारी अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर पंकज झा ने भी चार दिन पूर्व इस्तीफा दे दिया। पिछले पांच साल में जिला अस्पताल व महिला अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात सात चिकित्सक इस्तीफा दे चुके हैं। इसमें तीन महिला चिकित्सक भी शामिल हैं। जबकि कोरोना काल के बाद से जिले के 25 डॉक्टर बिना सूचना के अनुपस्थित चल रहे हैं। छह चिकित्सक लगभग नौ महीने पूर्व पीजी करने गए थे जो अभी तक नहीं लौटे हैं।
डॉक्टर सरकारी से प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर रहे है। जिले में पांच साल में जिला अस्पताल के दो फिजिशियन, एक रेडियोलाॅजिस्ट व जिला महिला अस्पताल की दो महिला चिकित्सक व एक बालरोग विशेषज्ञ नौकरी छोड़ चुके हैं। ये निजी नर्सिंग होम चला रहे हैं। रेडियोलॉजिस्ट संजय सिंह और अन्य चिकित्सकों ने नौकरी छोड़ते समय अस्पतालों में संसाधनों की कमी, बेवजह दबाव, वीआईपी ड्यूटी, मेडिको लीगल व डॉक्टरों से दुर्व्यवहार को मुख्य वजह बताया था। हालांकि इस्तीफे में निजी कारण से नौकरी छोड़ने की बात कही थी।
जिले में 221 चिकित्सकों का पद है, उसकी जगह सिर्फ 87 डाॅक्टर तैनात हैं। जिले में सिर्फ सात महिला रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। चिकित्सकाें की कमी के कारण सरकारी अस्पतालों में बेहतर चिकित्सकीय सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि जिला अस्पताल की ओपीडी में लेवल वन के डाॅक्टर व ईएमओ मरीजों का इलाज कर रहे हैं। गंभीर मरीजों को सिर्फ रेफर करते हैं। जिले में 78 नर्सिंग होम और 30 क्लीनिक पंजीकृत है। पांच वर्षो में 11 नए अस्पताल खुले हैं।
ओपीडी में कूलर और एसी तक नहीं
जिला अस्पताल में 24 ओपीडी संचालित होती है। ट्राॅमा सेंटर की छह ओपीडी छोड़ दें तो अन्य 18 ओपीडी में संसाधन व सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। कुछ ओपीडी में कूलर एसी तक नहीं है। डॉ. पंकज झा ने इस्तीफा दिया है, वह चार नंबर की ओपीडी में बाल रोग चिकित्सक डॉ. एके उपाध्याय के साथ बैठते थे। दोनों चिकित्सक रोजाना 250 से अधिक मरीज देखते थे। सुविधा के नाम पर दो पंखे व गर्मी में दो कूलर व दो मेज व कुर्सी है। पिछली गर्मी में डॉक्टर एके उपाध्याय की तबीयत खराब हो गई थी। ओपीडी में एसी लगाने की चिकित्सक ने कई बार मांग की लेकिन अस्पताल प्रशासन अनसुना करता रहा। यही हाल ओपीडी दो, तीन, 18, 19 व 24 की है। सभी ओपीडी में दो चिकित्सक बैठते हैं।
दुर्व्यवस्था से दिया इस्तीफा
महिला अस्पताल में दो वर्ष पूर्व प्रसव कक्ष में एक गर्भवती का ब्लड कम होने पर महिला चिकित्सक ने गर्भपात करने से इन्कार कर दिया था। इस पर परिजनों व नेताओं ने हंगामा कर दिया था। अस्पताल प्रशासन की ओर से चिकित्सक का सहयोग न करने से आहत होकर महिला चिकित्सक ने इस्तीफा दे दिया था।
चिकित्सकों की भारी कमी है। अनुपस्थित चिकित्सकों व पीजी करने गए चिकित्सकों की सूची तैयार करवाकर जल्द लौटने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा।-- - डॉ. आनंद सिंह, प्रभारी सीएमओ बलिया।
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डॉक्टर सरकारी से प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर रहे है। जिले में पांच साल में जिला अस्पताल के दो फिजिशियन, एक रेडियोलाॅजिस्ट व जिला महिला अस्पताल की दो महिला चिकित्सक व एक बालरोग विशेषज्ञ नौकरी छोड़ चुके हैं। ये निजी नर्सिंग होम चला रहे हैं। रेडियोलॉजिस्ट संजय सिंह और अन्य चिकित्सकों ने नौकरी छोड़ते समय अस्पतालों में संसाधनों की कमी, बेवजह दबाव, वीआईपी ड्यूटी, मेडिको लीगल व डॉक्टरों से दुर्व्यवहार को मुख्य वजह बताया था। हालांकि इस्तीफे में निजी कारण से नौकरी छोड़ने की बात कही थी।
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जिले में 221 चिकित्सकों का पद है, उसकी जगह सिर्फ 87 डाॅक्टर तैनात हैं। जिले में सिर्फ सात महिला रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। चिकित्सकाें की कमी के कारण सरकारी अस्पतालों में बेहतर चिकित्सकीय सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि जिला अस्पताल की ओपीडी में लेवल वन के डाॅक्टर व ईएमओ मरीजों का इलाज कर रहे हैं। गंभीर मरीजों को सिर्फ रेफर करते हैं। जिले में 78 नर्सिंग होम और 30 क्लीनिक पंजीकृत है। पांच वर्षो में 11 नए अस्पताल खुले हैं।
ओपीडी में कूलर और एसी तक नहीं
जिला अस्पताल में 24 ओपीडी संचालित होती है। ट्राॅमा सेंटर की छह ओपीडी छोड़ दें तो अन्य 18 ओपीडी में संसाधन व सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। कुछ ओपीडी में कूलर एसी तक नहीं है। डॉ. पंकज झा ने इस्तीफा दिया है, वह चार नंबर की ओपीडी में बाल रोग चिकित्सक डॉ. एके उपाध्याय के साथ बैठते थे। दोनों चिकित्सक रोजाना 250 से अधिक मरीज देखते थे। सुविधा के नाम पर दो पंखे व गर्मी में दो कूलर व दो मेज व कुर्सी है। पिछली गर्मी में डॉक्टर एके उपाध्याय की तबीयत खराब हो गई थी। ओपीडी में एसी लगाने की चिकित्सक ने कई बार मांग की लेकिन अस्पताल प्रशासन अनसुना करता रहा। यही हाल ओपीडी दो, तीन, 18, 19 व 24 की है। सभी ओपीडी में दो चिकित्सक बैठते हैं।
दुर्व्यवस्था से दिया इस्तीफा
महिला अस्पताल में दो वर्ष पूर्व प्रसव कक्ष में एक गर्भवती का ब्लड कम होने पर महिला चिकित्सक ने गर्भपात करने से इन्कार कर दिया था। इस पर परिजनों व नेताओं ने हंगामा कर दिया था। अस्पताल प्रशासन की ओर से चिकित्सक का सहयोग न करने से आहत होकर महिला चिकित्सक ने इस्तीफा दे दिया था।
चिकित्सकों की भारी कमी है। अनुपस्थित चिकित्सकों व पीजी करने गए चिकित्सकों की सूची तैयार करवाकर जल्द लौटने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा।