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Balrampur News: छांगुर की डिस्चार्ज अर्जी खारिज होने के बाद अब सुनवाई पर टिकी नजर

संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Sun, 26 Apr 2026 12:26 AM IST
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After Chhangur's discharge petition was rejected, all eyes are on the hearing.
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बलरामपुर । बहुचर्चित छांगुर बाबा प्रकरण में अहम मोड़ आ गया है। स्पेशल एटीएस कोर्ट लखनऊ के मुख्य आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर सुनवाई शुरू करने के फैसले से प्रकरण फिर सुर्खियों में है। इस फैसले के बाद अब आरोपी और उसके सहयोगियों के खिलाफ नियमित ट्रायल का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सभी निगाहें अब कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है।
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यह मामला अवैध धर्मांतरण, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, विदेशी फंडिंग, संगठित नेटवर्क और आपराधिक साजिश से जुड़ा है। अब मामले की सुनवाई साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी। गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और जिरह की प्रक्रिया शुरू होगी। कानूनी विशेषज्ञ महेंद्र तिवारी के अनुसार, यह चरण बेहद अहम होता है, जहां अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान सामने आए तथ्यों पर निर्भर करेगा। एटीएस सूत्रों की मानें तो विशेष अदालत में करीब छह घंटे तक गहन बहस के बाद कोर्ट ने फैसला दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और उपलब्ध साक्ष्य प्राथमिकी दर्ज की सुनवाई के लिए पर्याप्त हैं। यूपी एटीएस ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद लगातार छापेमारी, पूछताछ और डिजिटल विश्लेषण के जरिए पूरे नेटवर्क की परतें उजागर कीं। जांच में बैंक खातों, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल, विदेश यात्राओं और दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई। कुछ संदिग्धों के विदेशी कनेक्शन भी जांच के दायरे में हैं। स्थानीय स्तर पर छांगुर लंबे समय से प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। शुरुआत में सामान्य जीवन जीने वाला यह व्यक्ति धीरे-धीरे धार्मिक प्रभाव और संपर्कों के जरिए चर्चित हुआ। लोगों की समस्याएं हल करने, ताबीज देने और चमत्कार के दावों के जरिए उसने अपना प्रभाव बढ़ाया, जिसके बाद उस पर गंभीर आरोप सामने आए।
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1400 पन्नों की चार्जशीट में नेटवर्क का खुलासा
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और यूपी एटीएस की ओर से दाखिल लगभग 1400 पन्नों की चार्जशीट में कई अहम खुलासे किए गए हैं। इसमें बैंक खातों के विवरण, विदेशी फंडिंग के स्रोत, संपत्तियों की खरीद-फरोख्त, आरोपियों के आपसी संबंध और कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली का विस्तृत ब्योरा शामिल है। एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2015 से 2024 के बीच 100 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ। यह धनराशि सऊदी अरब, दुबई समेत खाड़ी देशों से अलग-अलग माध्यमों और खातों के जरिए भारत भेजी गई। मनी ट्रेल की जांच में कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आए हैं। एजेंसियों का कहना है कि इस फंड का उपयोग नेटवर्क को मजबूत करने, प्रचार-प्रसार, लोगों को प्रलोभन देने और संपत्तियां खरीदने में किया गया।
बलरामपुर समेत कई जिलों में संपत्ति निवेश
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों ने बलरामपुर सहित कई जिलों में जमीनें खरीदीं। कुछ संपत्तियां परिजनों और सहयोगियों के नाम पर ली गईं। पुणे में भी 16 करोड़ की जमीन का सौदा किया गया। जिनका उपयोग गतिविधियों के संचालन केंद्र के रूप में किए जाने की आशंका जताई गई है। प्रशासन पहले ही कुछ अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिससे मामला और चर्चाओं में रहा। एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क के जरिए फर्जी पहचान और नाम बदलकर लोगों से संपर्क किया जाता था। इसके बाद उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित कर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि अलग-अलग लोगों की अलग भूमिकाएं तय थीं, जिससे यह गतिविधि संगठित तरीके से संचालित हो रही थी। कुछ मामलों में महिलाओं से जुड़े गंभीर आरोप भी जांच के दायरे में बताए गए हैं, जिससे केस की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
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