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Balrampur News: किसान को कारोबारी दिखाकर स्वीकृत कराया लोन, जांच में घिरा बैंक
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 31 May 2026 11:06 PM IST
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श्रीदत्तगंज। उतरौला क्षेत्र के नयानगर विशुनपुर गांव निवासी किसान जनार्दन सिंह के नाम पर लिए गए 20 लाख रुपये के संदिग्ध लोन का मामला अब गंभीर बैंकिंग अनियमितताओं की ओर इशारा कर रहा है। जांच के दौरान सामने आ रहे तथ्यों और पीड़ित के आरोपों ने बैंक कर्मचारियों की भूमिका को संदेह के घेरे में ला दिया है। मामले में कई ऐसे पहलू सामने आए हैं, जो सुनियोजित तरीके से वित्तीय गड़बड़ी की आशंका को मजबूत करते हैं।
किसान का आरोप है कि उसकी जानकारी और सहमति के बिना बैंक खाते तथा एफडी का इस्तेमाल कर लोन स्वीकृत कराया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि लोन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसका फर्जी आयकर रिटर्न (आईटीआर) तैयार किया गया। जनार्दन सिंह का कहना है कि वह केवल खेती करते हैं, लेकिन बैंक रिकॉर्ड में उन्हें व्यापारी दिखाया गया।
पीड़ित के अनुसार पहले खाते से जुड़े हर लेन-देन की सूचना मोबाइल पर मिलती थी, लेकिन जिस दौरान कथित रूप से लोन स्वीकृत हुआ, उसी समय खाते से उनका मोबाइल नंबर हटा दिया गया। इसके बाद उन्हें किसी भी बैंकिंग गतिविधि की जानकारी नहीं मिल सकी। मामले में नामजद पूर्व शाखा प्रबंधक दिनेश कुमार पासवान की तलाश तेज कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में उनकी तैनाती गोंडा की गल्ला मंडी स्थित एक बैंक शाखा में है। जांच के दौरान उनका लोकेशन गोरखपुर में मिला है। बताया जा रहा है कि प्रकरण सामने आने और एफआईआर की जानकारी मिलने के बाद से वह जांच एजेंसियों के सामने नहीं आए हैं।
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फर्जी आईटीआर बनाकर किसान को बना दिया व्यापारी
जनार्दन सिंह का आरोप है कि लोन स्वीकृत कराने के लिए उनका फर्जी आयकर रिटर्न तैयार किया गया। बैंक रिकॉर्ड में उन्हें किसान से व्यापारी दर्शाया गया, जबकि उन्होंने कभी कोई व्यापार नहीं किया। उनका कहना है कि उन्होंने व्यवसायिक लोन के लिए कोई आवेदन भी नहीं किया था। जांच एजेंसियां अब आईटीआर और ऋण आवेदन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
खाते में घुमाई गई लोन की रकम
पीड़ित के अनुसार लोन स्वीकृत होने के बाद पूरी राशि पहले बचत खाते में जमा की गई। इसके बाद करीब पांच लाख रुपये किसी दूसरे खाते में स्थानांतरित कर दिए गए। किसान का कहना है कि उसे न तो इस लेन-देन की जानकारी थी और न ही उसने किसी को इसकी अनुमति दी थी। वह नियमित रूप से बैंक जाकर खाते की जानकारी लेते रहे, लेकिन उन्हें वास्तविक स्थिति नहीं बताई गई। इससे उन्हें कभी संदेह नहीं हुआ कि उनके नाम पर कोई बड़ा लोन चल रहा है।
समझौते का बना रहे दबाव
किसान का कहना है कि जिस लोन की जानकारी तक उन्हें नहीं थी, उस पर लगातार ब्याज भी जुड़ता रहा। अभी करीब 84 हजार रुपये से अधिक का ब्याज बकाया दिखाया जा रहा है। यानी न केवल उनकी एफडी दांव पर लगी बल्कि बिना जानकारी के वह बैंक के कर्जदार भी बना दिए गए। उनका आरोप है कि मामला उजागर होने के बाद बैंक के कुछ कर्मचारी फोन कर समझौता करने और शिकायत आगे न बढ़ाने का दबाव भी बना रहे हैं। पुलिस इन आरोपों की भी जांच कर रही है।
आज खुल सकते हैं कई राज
प्रभारी निरीक्षक अविरल शुक्ल ने बताया कि मामले की जांच जारी है। बैंक से संबंधित कई महत्वपूर्ण अभिलेखों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच होगी। रविवार को अवकाश होने के कारण कुछ जानकारियां नहीं मिल सकीं। सोमवार को बैंक दस्तावेजों, ऋण आवेदन, मोबाइल नंबर परिवर्तन, केवाईसी रिकॉर्ड और राशि के ट्रांजैक्शन की पड़ताल की जाएगी। आरोपी की तलाश के लिए टीम गठित की गई है।
किसान का आरोप है कि उसकी जानकारी और सहमति के बिना बैंक खाते तथा एफडी का इस्तेमाल कर लोन स्वीकृत कराया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि लोन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसका फर्जी आयकर रिटर्न (आईटीआर) तैयार किया गया। जनार्दन सिंह का कहना है कि वह केवल खेती करते हैं, लेकिन बैंक रिकॉर्ड में उन्हें व्यापारी दिखाया गया।
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पीड़ित के अनुसार पहले खाते से जुड़े हर लेन-देन की सूचना मोबाइल पर मिलती थी, लेकिन जिस दौरान कथित रूप से लोन स्वीकृत हुआ, उसी समय खाते से उनका मोबाइल नंबर हटा दिया गया। इसके बाद उन्हें किसी भी बैंकिंग गतिविधि की जानकारी नहीं मिल सकी। मामले में नामजद पूर्व शाखा प्रबंधक दिनेश कुमार पासवान की तलाश तेज कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में उनकी तैनाती गोंडा की गल्ला मंडी स्थित एक बैंक शाखा में है। जांच के दौरान उनका लोकेशन गोरखपुर में मिला है। बताया जा रहा है कि प्रकरण सामने आने और एफआईआर की जानकारी मिलने के बाद से वह जांच एजेंसियों के सामने नहीं आए हैं।
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जनार्दन सिंह का आरोप है कि लोन स्वीकृत कराने के लिए उनका फर्जी आयकर रिटर्न तैयार किया गया। बैंक रिकॉर्ड में उन्हें किसान से व्यापारी दर्शाया गया, जबकि उन्होंने कभी कोई व्यापार नहीं किया। उनका कहना है कि उन्होंने व्यवसायिक लोन के लिए कोई आवेदन भी नहीं किया था। जांच एजेंसियां अब आईटीआर और ऋण आवेदन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
खाते में घुमाई गई लोन की रकम
पीड़ित के अनुसार लोन स्वीकृत होने के बाद पूरी राशि पहले बचत खाते में जमा की गई। इसके बाद करीब पांच लाख रुपये किसी दूसरे खाते में स्थानांतरित कर दिए गए। किसान का कहना है कि उसे न तो इस लेन-देन की जानकारी थी और न ही उसने किसी को इसकी अनुमति दी थी। वह नियमित रूप से बैंक जाकर खाते की जानकारी लेते रहे, लेकिन उन्हें वास्तविक स्थिति नहीं बताई गई। इससे उन्हें कभी संदेह नहीं हुआ कि उनके नाम पर कोई बड़ा लोन चल रहा है।
समझौते का बना रहे दबाव
किसान का कहना है कि जिस लोन की जानकारी तक उन्हें नहीं थी, उस पर लगातार ब्याज भी जुड़ता रहा। अभी करीब 84 हजार रुपये से अधिक का ब्याज बकाया दिखाया जा रहा है। यानी न केवल उनकी एफडी दांव पर लगी बल्कि बिना जानकारी के वह बैंक के कर्जदार भी बना दिए गए। उनका आरोप है कि मामला उजागर होने के बाद बैंक के कुछ कर्मचारी फोन कर समझौता करने और शिकायत आगे न बढ़ाने का दबाव भी बना रहे हैं। पुलिस इन आरोपों की भी जांच कर रही है।
आज खुल सकते हैं कई राज
प्रभारी निरीक्षक अविरल शुक्ल ने बताया कि मामले की जांच जारी है। बैंक से संबंधित कई महत्वपूर्ण अभिलेखों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच होगी। रविवार को अवकाश होने के कारण कुछ जानकारियां नहीं मिल सकीं। सोमवार को बैंक दस्तावेजों, ऋण आवेदन, मोबाइल नंबर परिवर्तन, केवाईसी रिकॉर्ड और राशि के ट्रांजैक्शन की पड़ताल की जाएगी। आरोपी की तलाश के लिए टीम गठित की गई है।