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Balrampur: फर्जी टैक्स इनवॉइस भेजकर 14.45 लाख की ठगी, साइबर ठगों ने व्यापारी को बनाया शिकार; पुलिस कर रही जांच

Thu, 23 Jul 2026 03:26 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर Published by: Bhupendra Singh Updated Thu, 23 Jul 2026 03:26 PM IST
सार

बलरामपुर में फर्जी टैक्स इनवॉइस भेजकर 14.45 लाख की ठगी की गई। साइबर ठगों ने व्यापारी को अपना शिकार बनाया। पुलिस मामले की जांच कर रही। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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Businessman defrauded of 14.45 lakh via fake tax invoice in Balrampur cyber fraudsters target him
साइबर ठगी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के बलरामपुर में सरिया की सप्लाई के नाम पर फर्जी टैक्स इनवॉइस भेजकर एक कारोबारी से 14 लाख 45 हजार 918 रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। कारोबारी की तहरीर पर कोतवाली नगर पुलिस ने कंपनी और उससे जुड़े नामजद लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

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मामला जिले के व्यापारिक जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। उतरौला रोड स्थित भगवतीगंज निवासी एवं पीकेआरजी इंफ्रा बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रविंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि उनकी फर्म सरिया का थोक कारोबार करती है। उन्होंने सात जुलाई 2026 को कोलकाता स्थित शाकम्भरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड से एलिगेंट टीएमटी बार की खरीद के लिए ऑर्डर दिया था।

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टैक्स इनवॉइस व्हाट्सएप पर भेजा गया

उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से 10 जुलाई को टैक्स इनवॉइस व्हाट्सएप पर भेजा गया। 11 जुलाई को फर्म की ओर से आरटीजीएस, एनईएफटी और आईएमपीएस के माध्यम से कुल 14 लाख 45 हजार 918 रुपये कंपनी के पंजाब नेशनल बैंक के खाते में भेज दिए गए।

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भुगतान के बाद बताया गया कि सरिया ट्रक में लोड कर दिया गया है। बाद में जानकारी मिली कि ट्रक को प्लांट में ही खाली करा लिया गया और अगले दिन खाली ट्रक बाहर भेज दिया गया। इसके साथ ही भेजी गई धनराशि वापस नहीं किया गया। प्रभारी निरीक्षक संतोष मिश्र ने बताया कि मामले की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरु कर दिया गया है।

ई-वे बिल नहीं होने पर खुली ठगी की परत

कारोबारी ने जब भेजे गए टैक्स इनवॉइस की जांच कराई तो पता चला कि वह फर्जी और कूटरचित था। तहरीर में कहा गया है कि 50 हजार रुपये से अधिक के माल की बिक्री पर टैक्स इनवॉइस के साथ ई-वे बिल स्वतः जारी होता है, जबकि संबंधित इनवॉइस के साथ कोई ई-वे बिल जारी नहीं किया गया। 



इससे उन्हें ठगी का संदेह हुआ और बाद में पूरी रकम की साइबर ठगी का खुलासा हुआ। पुलिस का कहना है कि बैंक लेन-देन, मोबाइल नंबर, ई-मेल, दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। साइबर माध्यम से हुई इस बड़ी ठगी में शामिल लोगों की पहचान कर उन पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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