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Balrampur News: 14 माह की बच्ची की मौत के मामले में समिति करेगी जांच
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बलरामपुर। जिला मेमोरियल अस्पताल स्थित वार्ड में भर्ती 14 माह की बच्ची की मौत का मामला तूल पकड़ने लगा है। बच्ची की बाबा की शिकायत पर सीएमओ ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय गठित कर दी है। टीम के जांच रिपोर्ट के आधार पर अब आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हरैया सतघरवा क्षेत्र के गुगौली कला निवासी शिवराम शुक्ल ने जिलाधिकारी व सीएमओ को दिए गए प्रार्थना पत्र दिया है। आरोप है कि उसकी 14 माह की पौत्री हेमा शुक्ला उर्फ प्रियांशी शुक्ला की तबीयत खराब होने पर एक अप्रैल को जिला मेमोरियल अस्पताल के कमरा नंबर 21 में बैठे चिकित्सक को दिखाया था। तबीयत ज्यादा खराब होने पर चिकित्सक ने हेमा को वार्ड में भर्ती कर लिया। बताया कि 15 दिनों तक बच्ची को भर्ती करके इलाज करना पड़ेगा। दो अप्रैल को हेमा की तबीयत बिगड़ने पर चिकित्साधिकारी की अनुपस्थिति पर कोई कर्मचारी देखने नहीं आया। ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स ने कहा कि डॉक्टर के आने पर इलाज किया जाएगा। तीन अप्रैल को सुबह 11:30 बजे तक चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण उनके आंखों के सामने ही दुधमुंही बच्ची की मौत हो गई। आरोप लगाया कि उनकी पौत्री की मौत के जिम्मेदार चिकित्सक व स्टाफ कर्मी हैं।
ये करेंगे मामले की जांच
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने बताया कि मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम बनाई गई है। इसमें एसीएमओ डॉ. बीपी सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश वर्मा, डीपीएम शिवेंद्र मणि त्रिपाठी व जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता विनोद त्रिपाठी शामिल हैं। चार सदस्यीय टीम मामले की जांच करके रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर लापरवाही करने वाले चिकित्सक व स्टाफ के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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हरैया सतघरवा क्षेत्र के गुगौली कला निवासी शिवराम शुक्ल ने जिलाधिकारी व सीएमओ को दिए गए प्रार्थना पत्र दिया है। आरोप है कि उसकी 14 माह की पौत्री हेमा शुक्ला उर्फ प्रियांशी शुक्ला की तबीयत खराब होने पर एक अप्रैल को जिला मेमोरियल अस्पताल के कमरा नंबर 21 में बैठे चिकित्सक को दिखाया था। तबीयत ज्यादा खराब होने पर चिकित्सक ने हेमा को वार्ड में भर्ती कर लिया। बताया कि 15 दिनों तक बच्ची को भर्ती करके इलाज करना पड़ेगा। दो अप्रैल को हेमा की तबीयत बिगड़ने पर चिकित्साधिकारी की अनुपस्थिति पर कोई कर्मचारी देखने नहीं आया। ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स ने कहा कि डॉक्टर के आने पर इलाज किया जाएगा। तीन अप्रैल को सुबह 11:30 बजे तक चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण उनके आंखों के सामने ही दुधमुंही बच्ची की मौत हो गई। आरोप लगाया कि उनकी पौत्री की मौत के जिम्मेदार चिकित्सक व स्टाफ कर्मी हैं।
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ये करेंगे मामले की जांच
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने बताया कि मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम बनाई गई है। इसमें एसीएमओ डॉ. बीपी सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश वर्मा, डीपीएम शिवेंद्र मणि त्रिपाठी व जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता विनोद त्रिपाठी शामिल हैं। चार सदस्यीय टीम मामले की जांच करके रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर लापरवाही करने वाले चिकित्सक व स्टाफ के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।