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Balrampur News: मनरेगा के 90 हजार श्रमिकों के रोजगार पर संकट
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बलरामपुर के कैली गांव में मनरेगा के तहत काम करते श्रमिक ।-संवाद
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बलरामपुर। जिले में मनरेगा के तहत पंजीकृत श्रमिकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जिले में 1,85,750 पंजीकृत श्रमिक परिवार और 2,58,439 श्रमिक सदस्य होने के बावजूद ई केवाईसी और फेस ऑथेंटिकेशन की धीमी प्रगति के कारण हजारों श्रमिकों की मजदूरी अटक गई है। 31 दिसंबर तक इन लोगों की ई केवाईसी की जानी थी। अब शासन ने 15 दिन का और समय दिया है।
आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 1,50,000 सक्रिय जॉब कार्ड धारक श्रमिक हैं, लेकिन अब तक केवल 60,000 जॉब कार्डों की ही ई केवाईसी पूरी हो सकी है। यानी करीब 90 हजार जॉब कार्ड धारक श्रमिक अभी सत्यापन से वंचित हैं। नियमों के तहत बिना ई केवाईसी और एनएमएमएस एप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन के न तो श्रमिकों की उपस्थिति मान्य मानी जा रही है और न ही मजदूरी भुगतान संभव है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही ई केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो इसका असर हजारों परिवारों की रोजी-रोटी के साथ-साथ जिले के समग्र ग्रामीण विकास पर पड़ेगा। (संवाद)
793 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित
जनपद की 793 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत कुल 967 विकास कार्य स्वीकृत हैं, लेकिन तकनीकी अड़चनों और श्रमिकों की अनुपलब्धता के कारण वर्तमान में केवल 127 कार्य ही संचालित हो पा रहे हैं। शेष कार्य या तो शुरू नहीं हो सके हैं या फिर बीच में ही धीमी गति से चल रहे हैं। तालाब खोदाई, इंटरलॉकिंग सड़क, नाली निर्माण, पौधरोपण, भूमि सुधार जैसे कार्यों में मजदूरों की संख्या कम होने से कार्यों की रफ्तार थम गई है। कई स्थानों पर अधूरे कार्यों के कारण ग्रामीणों को आवागमन और जलनिकासी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।
अभियान चलाकर कार्य पूरा कराने के निर्देश
सभी खंड विकास अधिकारियों और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों को शत-प्रतिशत ई केवाईसी कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक विकासखंड में विशेष शिविर लगाकर शेष जॉब कार्ड धारकों का सत्यापन कराया जाएगा। एक सप्ताह में सभी लोगों का शत प्रतिशत ई केवाईसी करा ली जाएगी।
- सुशील अग्रहरि, डीसी मनरेगा
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आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 1,50,000 सक्रिय जॉब कार्ड धारक श्रमिक हैं, लेकिन अब तक केवल 60,000 जॉब कार्डों की ही ई केवाईसी पूरी हो सकी है। यानी करीब 90 हजार जॉब कार्ड धारक श्रमिक अभी सत्यापन से वंचित हैं। नियमों के तहत बिना ई केवाईसी और एनएमएमएस एप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन के न तो श्रमिकों की उपस्थिति मान्य मानी जा रही है और न ही मजदूरी भुगतान संभव है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही ई केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो इसका असर हजारों परिवारों की रोजी-रोटी के साथ-साथ जिले के समग्र ग्रामीण विकास पर पड़ेगा। (संवाद)
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793 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित
जनपद की 793 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत कुल 967 विकास कार्य स्वीकृत हैं, लेकिन तकनीकी अड़चनों और श्रमिकों की अनुपलब्धता के कारण वर्तमान में केवल 127 कार्य ही संचालित हो पा रहे हैं। शेष कार्य या तो शुरू नहीं हो सके हैं या फिर बीच में ही धीमी गति से चल रहे हैं। तालाब खोदाई, इंटरलॉकिंग सड़क, नाली निर्माण, पौधरोपण, भूमि सुधार जैसे कार्यों में मजदूरों की संख्या कम होने से कार्यों की रफ्तार थम गई है। कई स्थानों पर अधूरे कार्यों के कारण ग्रामीणों को आवागमन और जलनिकासी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।
अभियान चलाकर कार्य पूरा कराने के निर्देश
सभी खंड विकास अधिकारियों और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों को शत-प्रतिशत ई केवाईसी कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक विकासखंड में विशेष शिविर लगाकर शेष जॉब कार्ड धारकों का सत्यापन कराया जाएगा। एक सप्ताह में सभी लोगों का शत प्रतिशत ई केवाईसी करा ली जाएगी।
- सुशील अग्रहरि, डीसी मनरेगा
