बलरामपुर। गैंजहवा गांव के सिसई स्थित राप्ती नदी पर बने रेलवे पुल के नीचे से गुजरने वाले कच्चे रास्ते को बंद करने की कोशिश हुई तो ग्रामीण भड़क उठे। रेलवे की ओर से भेजी गई जेसीबी जैसे ही खोदाई में जुटी, मौके पर मौजूद लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आक्रोश देखकर कार्यदायी संस्था के लोग जेसीबी लेकर वापस लौट गए। सदर विधायक पल्टूराम ने तहसीलदार को निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है।
यह रास्ता मदारा, सायडीह, पुरवा व गैंजहवा सहित आसपास के गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। इस रास्ते का उपयोग रोजाना 100 गांवों के सैकड़ों लोग करते हैं। रास्ता बंद होने से 25 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे। लोगाें को करीब 15 किमी का चक्कर काटकर कौवापुर रेलवे स्टेशन होते हुए गुजरना पड़ेगा। बुधवार को रास्ता बंद करने के लिए जैसे ही खोदाई शुरू हुई ग्राम मदारा निवासी कप्तान सिंह ने जेसीबी को रोकने का प्रयास किया। इस पर चालक ने रेलवे विभाग के अधिकारी का मोबाइल नंबर देते हुए बताया कि उसे विभागीय निर्देश पर रास्ता बंद करने के लिए भेजा गया है। ग्रामीणों ने अधिकारी से बात करने से मना करते हुए विरोध शुरू कर दिया। मामले की सूचना मिलते ही सदर विधायक ने तहसीलदार बलरामपुर को मौके पर निरीक्षण कर समाधान कराने का निर्देश दिया। ग्रामीणों की भीड़ और बढ़ते विरोध को देखते हुए जेसीबी चालक मशीन लेकर वहां से लौट गया।
ग्रामीण अजय सिंह पिंकू, शिव प्रताप सिंह, चरनजीत तिवारी, विशाल गिरी, कुशाग्र सिंह, ग्राम प्रधान मुख्तार, गैंजहवा प्रधान उग्रसेन सिंह, बलदेव सिंह आदि ने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था किए रास्ता बंद किया जा रहा था, जो पूरी तरह अनुचित है। रास्ता बंद होने से स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वालों को भारी परेशानी होगी।