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Balrampur News: एक ब्लॉक में छह अस्पताल, बाकी इलाज को तरसे
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बलरामपुर के तुलसीपुर में स्थित आयुर्वेद चिकित्सालय।-संवाद
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तुलसीपुर। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पतालों की स्थापना में बड़ा खेल हुआ है। नियम और जरूरत के मुताबिक जहां छह अलग-अलग ब्लॉकों में आयुर्वेदिक अस्पताल खोले जाने चाहिए थे, वहीं एक ही ब्लॉक गैसड़ी में छह से अधिक अस्पताल स्थापित कर दिए गए। इसका खामियाजा हजारों मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। तुलसीपुर नगर समेत कई क्षेत्र पूरी तरह आयुर्वेदिक इलाज से वंचित हो गए हैं।
तुलसीपुर तहसील क्षेत्र में ज्यादातर राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल गैसड़ी ब्लॉक तक ही सीमित कर दिए गए। गैसड़ी नगर का अस्पताल ग्राम मचड़ी में शिफ्ट कर दिया गया। वहां से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर नवलगढ़ में दूसरा अस्पताल खोल दिया गया। जबकि नवलगढ़ के टिकुया में पहले से ही आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित है। गैसड़ी ब्लॉक के नचौरा और उससे करीब 7 किलोमीटर दूर डीहरुप सिंह में भी अस्पताल बना दिया गया। एक ही ब्लॉक में अस्पतालों की भरमार कर दी गई, जबकि अन्य ब्लॉकों की जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अस्पतालों का संतुलित और पारदर्शी वितरण किया गया होता, तो पूरे जनपद के मरीजों को इसका लाभ मिल सकता था।
नगर का अस्पताल बघेलखंड स्थानांतरित कर छीनी गई सुविधा
तुलसीपुर नगर में पहले से संचालित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल को लगभग 12 किलोमीटर दूर बघेलखंड स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद पूरे नगर क्षेत्र में एक भी सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल शेष नहीं रहा। इस फैसले के बाद प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के गांवों में भटकना पड़ रहा है। बुजुर्ग, महिलाएं और गरीब मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पचपेड़वा क्षेत्र के रेहरा जंगल, विशुनपुर विश्राम, बरगदवा कलां, गैसड़ी ब्लॉक तथा बसंतपुर का अस्पताल रनियापुर माजगवा बांधा में बनाया गया है। ये सभी इलाके भी गैसड़ी ब्लॉक में ही आते हैं।
नियमों की अनदेखी का आरोप, कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिक उदय अग्रहरि, विजय प्रताप सोनी, अनिल लाठ, विकास सोनी, शिवकुमार वाल्मीकि, रामदयाल सोनी सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि अस्पतालों की स्थापना में नियमों की अनदेखी की गई है। लोगों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित खेल है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। स्थानीय लोगों ने का कहना है कि शासन से बलरामपुर जनपद के लिए 50 बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल की स्वीकृति मिल चुकी है। मांग है कि इसे तुलसीपुर नगर में स्थापित किया जाए। इस संबंध में लोगों ने मुख्यमंत्री को पत्र भी भेजा है। (संवाद)
शिकायतों की होगी जांच
भूमि की उपलब्धता के आधार पर अस्पतालों की स्थापना हुई है। शिकायतों की जांच की जाएगी। 50 बेड का एक जिला स्तरीय आयुर्वेदिक अस्पताल खोला जाना है, जिसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है।
- डॉ. दिग्विजय नाथ, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी
आयुर्वेदिक अस्पताल की स्थिति पर एक नजर
प्रस्तावित क्षेत्र - स्थापित - दूरी
तुलसीपुर - बघेलखंड- 12 किमी.
रतनपुर भगवनापुर - नचौरा - 10 किमी.
जरवा - मचड़ी - 10 किमी.
रेहराजंगल विशुनपुर विश्राम - बरगदवा कला - 11 किमी.
बसंतपुर - रनियापुर - दो किमी.
डीहरूप सिंह - डीहरूप सिंह में ही बना
नेवलगढ़ टिकुआ में पहले से ही संचालित।
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नगर का अस्पताल बघेलखंड स्थानांतरित कर छीनी गई सुविधा
तुलसीपुर नगर में पहले से संचालित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल को लगभग 12 किलोमीटर दूर बघेलखंड स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद पूरे नगर क्षेत्र में एक भी सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल शेष नहीं रहा। इस फैसले के बाद प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के गांवों में भटकना पड़ रहा है। बुजुर्ग, महिलाएं और गरीब मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पचपेड़वा क्षेत्र के रेहरा जंगल, विशुनपुर विश्राम, बरगदवा कलां, गैसड़ी ब्लॉक तथा बसंतपुर का अस्पताल रनियापुर माजगवा बांधा में बनाया गया है। ये सभी इलाके भी गैसड़ी ब्लॉक में ही आते हैं।
नियमों की अनदेखी का आरोप, कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिक उदय अग्रहरि, विजय प्रताप सोनी, अनिल लाठ, विकास सोनी, शिवकुमार वाल्मीकि, रामदयाल सोनी सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि अस्पतालों की स्थापना में नियमों की अनदेखी की गई है। लोगों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित खेल है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। स्थानीय लोगों ने का कहना है कि शासन से बलरामपुर जनपद के लिए 50 बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल की स्वीकृति मिल चुकी है। मांग है कि इसे तुलसीपुर नगर में स्थापित किया जाए। इस संबंध में लोगों ने मुख्यमंत्री को पत्र भी भेजा है। (संवाद)
शिकायतों की होगी जांच
भूमि की उपलब्धता के आधार पर अस्पतालों की स्थापना हुई है। शिकायतों की जांच की जाएगी। 50 बेड का एक जिला स्तरीय आयुर्वेदिक अस्पताल खोला जाना है, जिसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है।
- डॉ. दिग्विजय नाथ, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी
आयुर्वेदिक अस्पताल की स्थिति पर एक नजर
प्रस्तावित क्षेत्र - स्थापित - दूरी
तुलसीपुर - बघेलखंड- 12 किमी.
रतनपुर भगवनापुर - नचौरा - 10 किमी.
जरवा - मचड़ी - 10 किमी.
रेहराजंगल विशुनपुर विश्राम - बरगदवा कला - 11 किमी.
बसंतपुर - रनियापुर - दो किमी.
डीहरूप सिंह - डीहरूप सिंह में ही बना
नेवलगढ़ टिकुआ में पहले से ही संचालित।
