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Balrampur News: पंचायत चुनाव पर संशय, नेताओं की धड़कन बढ़ी
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गुलजारी लाल शुक्ला, प्रधान संघ अध्यक्ष
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बलरामपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर संशय से पंचायत के नेताओं की धड़कन बढ़ गई है। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी किए जाने के साथ ही लोगों को चुनाव समय पर होने की उम्मीद थी। 793 पंचायतों के सियासी संग्राम में कूदने की तैयारी करने वाले करीब 10 हजार लोगों की चिंता बढ़ गई है। सबसे अधिक चिंता तो सत्तापक्ष से जुड़े पंचायत के नेताओं की है, वह मजबूती से मैदान में डटे हैं। उनमें विधानसभा के बाद चुनाव होने पर परिस्थितियों की चिंता भी दिख रही है।
26 मई को पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, अभी तक की तैयारियों से चुनाव अप्रैल महीने में होने की उम्मीद थी। इसी तैयारी में पंचायतों में खेमेबाजी भी तेज हो गई है। प्रधान के साथ ही जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत सदस्यों का चुनाव एक साथ होता है। इसमें प्रधान और जिला पंचायत सदस्य को लेकर कई क्षेत्रों में जोर अजमाइश भी बढ़ी थी। लेकिन हाईकोर्ट में मामला पहुंचने और शासन से पिछड़ा वर्ग की गणना के लिए समर्पित आयोग का गठन न होने से अब चुनाव टलना तय माना जा रहा है। जिले की 793 पंचायतों में 792 में गांव की सरकार काम कर रही है। एक गांव हरहनवा सुस्सता में प्रधान के पद का चुनाव नहीं हो सका था। जहां पांच वर्ष से प्रशासक ही कामकाज देख रहे हैं। इस बार सभी पंचायतों में करीब 10 हजार लोग विभिन्न पदों के लिए तैयारी कर रहे हैं।
प्रशासक राज में प्रधानों की बढ़ती हैं मुश्किलें
26 मई के बाद प्रधानों का कार्यकाल बढ़ना नहीं है। वर्ष 2020 में भी समय पर चुनाव नहीं हुए थे। सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत जेएल शर्मा ने बताया कि उस समय भी प्रधानों का कार्यकाल नहीं बढ़ा था। छह महीने बाद चुनाव हुए थे, छह महीने तक एडीओ और वरिष्ठ पंचायत अधिकारियों के हाथ में पंचायत की कमान दी गई थी। इस बार भी ऐसा ही होने की उम्मीद है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासक के हाथ में कमान जाने से सीधे उच्चाधिकारियों का दखल रहता है। प्रधान की सुनवाई नहीं होती है। वहीं, एक पूर्व प्रधान राजेंद्र ने बताया कि अप्रैल माह में कराए गए कार्यों का भुगतान प्रशासक से मिलना भी मुश्किल होगा। इससे प्रधानों की मुश्किलें बढ़ी हैं।
200 करोड़ से अधिक का है पंचायतों का बजट
पंचायतों पर शासन की मेहरबानी भी खूब है। अभी हाल ही में 30 करोड़ से अधिक का बजट पंचायतों को जारी हुआ है। वहीं, नए वित्तीय वर्ष में भी 30 से 40 करोड़ का बजट मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा विकसित भारत जीरामजी योजना की शुरुआत हुई है, जिससे भी बजट मिलेगा। माना जा रहा है कि एक वित्तीय वर्ष में विभिन्न मदों में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायतों को 200 करोड़ से अधिक का बजट मिलने की उम्मीद है। छह महीने तक हाथ में कमान रहने पर इस बजट का उपभोग भी प्रशासक ही करेंगे। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी व पूर्व विशेष सचिव पंचायती राज राम बहादुर के अनुसार प्रशासक अधिकारियों के प्रति जवाबदेह होता है, जनता का दबाव नहीं रहता है। प्रधान लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा होने के कारण जनता को साथ लेकर चलने को मजबूर रहते हैं।
चुनाव को तैयार पर जनगणना देश के लिए जरूरी
पंचायत चुनाव के लिए पार्टी पूरी तरह तैयार है। 15 अप्रैल तक पंचायत के मतदाता की सूची प्रकाशित होगी। इसके बाद ही समर्पित आयोग गठित होगा। फिलहाल जनगणना का कार्य शुरू हो गया है। जिसमें कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है। इससे चुनाव में कर्मियों की कमी आ सकती है। देश के लिए जनगणना काफी महत्वपूर्ण है। आम जनता सरकार के फैसले के साथ है, पंचायत चुनाव होने पर सबसे बड़ी जीत पार्टी की होगी। फिलहाल चुनाव से संबंधित प्रकरण हाईकोर्ट में विचाराधीन है, सरकार चरणबद्ध तरीके काम कर रही है।
विपक्षी नेताओं ने सरकार को बताया फेल
सपा जिलाध्यक्ष माणिक लाल कश्यप ने कहा कि पीडीए की बढ़ती लोकप्रियता से सरकार पंचायत चुनाव कराने से पिछड़ रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवलाल ने कहा कि सरकार हर क्षेत्र में फेल है, लोकतंत्र का गला घोंट रही है। चुनाव समय पर हो इसके लिए अभियान चलाएंगे। बसपा जिलाध्यक्ष लालचंद्र ने कहा कि भाजपा सरकार कमियों को छुपाने के लिए चुनाव टाल रही है। सरकार को डर है कि समय पर चुनाव हुए तो विधानसभा चुनाव भी भाजपा हार जाएगी।
प्रशासक नहीं, प्रधानों का बढ़ाएं कार्यकाल
अखिल भारतीय पंचायत परिषद प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष गुलजारी लाल शुक्ल ने कहाकि पंचायत चुनाव या तो समय से हो या फिर प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए। प्रशासक राज लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। प्रशासक नियुक्त होने से गांव का विकास ठप तो होगा ही राजनीतिक प्रतिद्वंदिता बढ़ेगी।
फैक्ट फाइल
कुल ब्लॉक-- 09
ग्राम पंचायत-- 793
ग्राम पंचायत सदस्य-- 9945
क्षेत्र पंचायत सदस्य-- 980
जिला पंचायत सदस्य-- 39
मतदाता- 17 लाख 55 हजार 567
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26 मई को पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, अभी तक की तैयारियों से चुनाव अप्रैल महीने में होने की उम्मीद थी। इसी तैयारी में पंचायतों में खेमेबाजी भी तेज हो गई है। प्रधान के साथ ही जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत सदस्यों का चुनाव एक साथ होता है। इसमें प्रधान और जिला पंचायत सदस्य को लेकर कई क्षेत्रों में जोर अजमाइश भी बढ़ी थी। लेकिन हाईकोर्ट में मामला पहुंचने और शासन से पिछड़ा वर्ग की गणना के लिए समर्पित आयोग का गठन न होने से अब चुनाव टलना तय माना जा रहा है। जिले की 793 पंचायतों में 792 में गांव की सरकार काम कर रही है। एक गांव हरहनवा सुस्सता में प्रधान के पद का चुनाव नहीं हो सका था। जहां पांच वर्ष से प्रशासक ही कामकाज देख रहे हैं। इस बार सभी पंचायतों में करीब 10 हजार लोग विभिन्न पदों के लिए तैयारी कर रहे हैं।
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प्रशासक राज में प्रधानों की बढ़ती हैं मुश्किलें
26 मई के बाद प्रधानों का कार्यकाल बढ़ना नहीं है। वर्ष 2020 में भी समय पर चुनाव नहीं हुए थे। सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत जेएल शर्मा ने बताया कि उस समय भी प्रधानों का कार्यकाल नहीं बढ़ा था। छह महीने बाद चुनाव हुए थे, छह महीने तक एडीओ और वरिष्ठ पंचायत अधिकारियों के हाथ में पंचायत की कमान दी गई थी। इस बार भी ऐसा ही होने की उम्मीद है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासक के हाथ में कमान जाने से सीधे उच्चाधिकारियों का दखल रहता है। प्रधान की सुनवाई नहीं होती है। वहीं, एक पूर्व प्रधान राजेंद्र ने बताया कि अप्रैल माह में कराए गए कार्यों का भुगतान प्रशासक से मिलना भी मुश्किल होगा। इससे प्रधानों की मुश्किलें बढ़ी हैं।
200 करोड़ से अधिक का है पंचायतों का बजट
पंचायतों पर शासन की मेहरबानी भी खूब है। अभी हाल ही में 30 करोड़ से अधिक का बजट पंचायतों को जारी हुआ है। वहीं, नए वित्तीय वर्ष में भी 30 से 40 करोड़ का बजट मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा विकसित भारत जीरामजी योजना की शुरुआत हुई है, जिससे भी बजट मिलेगा। माना जा रहा है कि एक वित्तीय वर्ष में विभिन्न मदों में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायतों को 200 करोड़ से अधिक का बजट मिलने की उम्मीद है। छह महीने तक हाथ में कमान रहने पर इस बजट का उपभोग भी प्रशासक ही करेंगे। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी व पूर्व विशेष सचिव पंचायती राज राम बहादुर के अनुसार प्रशासक अधिकारियों के प्रति जवाबदेह होता है, जनता का दबाव नहीं रहता है। प्रधान लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा होने के कारण जनता को साथ लेकर चलने को मजबूर रहते हैं।
चुनाव को तैयार पर जनगणना देश के लिए जरूरी
पंचायत चुनाव के लिए पार्टी पूरी तरह तैयार है। 15 अप्रैल तक पंचायत के मतदाता की सूची प्रकाशित होगी। इसके बाद ही समर्पित आयोग गठित होगा। फिलहाल जनगणना का कार्य शुरू हो गया है। जिसमें कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है। इससे चुनाव में कर्मियों की कमी आ सकती है। देश के लिए जनगणना काफी महत्वपूर्ण है। आम जनता सरकार के फैसले के साथ है, पंचायत चुनाव होने पर सबसे बड़ी जीत पार्टी की होगी। फिलहाल चुनाव से संबंधित प्रकरण हाईकोर्ट में विचाराधीन है, सरकार चरणबद्ध तरीके काम कर रही है।
विपक्षी नेताओं ने सरकार को बताया फेल
सपा जिलाध्यक्ष माणिक लाल कश्यप ने कहा कि पीडीए की बढ़ती लोकप्रियता से सरकार पंचायत चुनाव कराने से पिछड़ रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवलाल ने कहा कि सरकार हर क्षेत्र में फेल है, लोकतंत्र का गला घोंट रही है। चुनाव समय पर हो इसके लिए अभियान चलाएंगे। बसपा जिलाध्यक्ष लालचंद्र ने कहा कि भाजपा सरकार कमियों को छुपाने के लिए चुनाव टाल रही है। सरकार को डर है कि समय पर चुनाव हुए तो विधानसभा चुनाव भी भाजपा हार जाएगी।
प्रशासक नहीं, प्रधानों का बढ़ाएं कार्यकाल
अखिल भारतीय पंचायत परिषद प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष गुलजारी लाल शुक्ल ने कहाकि पंचायत चुनाव या तो समय से हो या फिर प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए। प्रशासक राज लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। प्रशासक नियुक्त होने से गांव का विकास ठप तो होगा ही राजनीतिक प्रतिद्वंदिता बढ़ेगी।
फैक्ट फाइल
कुल ब्लॉक
ग्राम पंचायत
ग्राम पंचायत सदस्य
क्षेत्र पंचायत सदस्य
जिला पंचायत सदस्य
मतदाता- 17 लाख 55 हजार 567