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Balrampur News: गांवों में भी बनेगा फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, तीन जगह जमीन चिह्नित
Sat, 01 Aug 2026 11:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 01 Aug 2026 11:57 PM IST
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बलरामपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) स्थापित किए जाएंगे। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिले में दो प्लांट लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए विकासखंड गैंसड़ी के भदुवा शंकरनगर और लैबुड़वा के साथ रेहरा बाजार क्षेत्र के अहिरौली बुजुर्ग गांव में जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। निदेशालय की टीम के स्थलीय सत्यापन के बाद इनमें से दो स्थानों का अंतिम चयन किया जाएगा।
प्रत्येक प्लांट के निर्माण पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च होंगे। दोनों परियोजनाओं पर लगभग चार करोड़ रुपये की लागत आएगी। पंचायत राज विभाग ने राजस्व विभाग के सहयोग से एक-एक एकड़ भूमि का चयन किया है। यह जमीन आबादी से 250 से 500 मीटर दूर है, ताकि प्लांट संचालन के दौरान ग्रामीणों को दुर्गंध या अन्य असुविधा का सामना न करना पड़े।
एफएसटीपी में शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकाले जाने वाले मलीय कीचड़ का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाएगा। उपचारित अवशेष को जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि शोधित पानी फसलों की सिंचाई के लिए उपयोगी होगा। जिला पंचायत राज अधिकारी अशोक सचान ने बताया कि तीन गांवों में भूमि चिह्नित कर प्रस्ताव निदेशालय को भेज दिया गया है। निदेशालय की टीम के निरीक्षण और अंतिम स्वीकृति के बाद दो स्थानों का चयन कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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प्रत्येक प्लांट के निर्माण पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च होंगे। दोनों परियोजनाओं पर लगभग चार करोड़ रुपये की लागत आएगी। पंचायत राज विभाग ने राजस्व विभाग के सहयोग से एक-एक एकड़ भूमि का चयन किया है। यह जमीन आबादी से 250 से 500 मीटर दूर है, ताकि प्लांट संचालन के दौरान ग्रामीणों को दुर्गंध या अन्य असुविधा का सामना न करना पड़े।
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एफएसटीपी में शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकाले जाने वाले मलीय कीचड़ का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाएगा। उपचारित अवशेष को जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि शोधित पानी फसलों की सिंचाई के लिए उपयोगी होगा। जिला पंचायत राज अधिकारी अशोक सचान ने बताया कि तीन गांवों में भूमि चिह्नित कर प्रस्ताव निदेशालय को भेज दिया गया है। निदेशालय की टीम के निरीक्षण और अंतिम स्वीकृति के बाद दो स्थानों का चयन कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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