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Balrampur News: पंचायत चुनाव पर संशय, दावेदारों ने खींचे कदम

संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Fri, 10 Apr 2026 01:04 AM IST
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Panchayat elections remain uncertain, as candidates withdraw their support
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बलरामपुर। जिले में प्रस्तावित पंचायत चुनाव को लेकर अनिश्चितता का माहौल बनने लगा है। चुनाव टलने की आशंका के बीच संभावित दावेदारों की सक्रियता अचानक धीमी पड़ गई है। कुछ दिन पहले तक गांव-गांव जनसंपर्क और बैठकों का दौर चल रहा था, लेकिन अब कई दावेदार इंतजार की रणनीति अपनाते दिख रहे हैं।
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जिले में पंचायत चुनाव का दायरा काफी बड़ा है। यहां कुल नौ ब्लॉक, 793 ग्राम पंचायतें, 9,945 ग्राम पंचायत सदस्य पद, 980 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 39 जिला पंचायत सदस्य के पदों पर चुनाव होना है। इन सभी पदों के लिए करीब 17 लाख 55 हजार 567 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इतने बड़े चुनावी दायरे में तैयारी और जनसंपर्क पर होने वाला खर्च भी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है, जिससे संभावित दावेदारों की चिंता बढ़ गई है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में पहले जहां चौपालों और बाजारों में चुनावी चर्चाएं तेज थीं, वहीं अब दावेदारों की चुप्पी चर्चा का विषय बन गई है। पोस्टर-बैनर, जनसंपर्क, बैठक, आवागमन और समर्थकों की व्यवस्था पर लगातार खर्च बढ़ने से कई संभावित उम्मीदवार पीछे हटने लगे हैं। चुनाव की तिथि स्पष्ट न होने के कारण दावेदारों को आशंका है कि यदि चुनाव आगे बढ़ा तो उन्हें दोबारा खर्च करना पड़ेगा।


चल रहे थे कार्यक्रम और कट रहे थे केक, अब पड़े ढ़ीले
कई संभावित उम्मीदवारों ने बड़े कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। उतरौला के राम शंकर पांडेय ने बताया कि पहले जहां रोजाना गांवों का दौरा किया जा रहा था, अब उसे सीमित कर दिया गया है। समर्थकों को भी फिलहाल शांत रहने की सलाह दी जा रही है। दावेदारों का मानना है कि आधिकारिक कार्यक्रम घोषित होने के बाद ही पूरी ताकत से मैदान में उतरना उचित रहेगा। रेहरा बाजार के सलीम ने बताया कि बीते दिनों गांवों में लोगों के यहां बच्चों के जन्मदिन पर केक काटने का अभियान चल रहा था। दावेदार बढ़चढ़ कर शामिल हो रहे थे, अब वह भी थम गया है।गांवों में चर्चा है कि चुनाव की तैयारी के दौरान सामाजिक दबाव भी बढ़ जाता है।

गांवों में बस एक ही चर्चा कब होंगे चुनाव
संभावित उम्मीदवारों से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ने लगती हैं और सहयोग की मांग भी बढ़ जाती है। चुनाव टलने की स्थिति में यह सिलसिला लंबा खिंचता है, जिससे दावेदार आर्थिक रूप से असहज महसूस करने लगते हैं। राजनीतिक विश्लेषक श्रीनारायण ने कहाकि यदि अनिश्चितता बनी रही तो नए चेहरे मैदान में उतरने से बचेंगे और पुराने दावेदार भी सीमित दायरे में सक्रिय रहेंगे। फिलहाल गांवों में एक ही सवाल गूंज रहा है कि चुनाव कब होंगे। तारीख तय होने के बाद ही दावेदारों की सक्रियता फिर तेज होने की उम्मीद है।
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