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Balrampur News: चंदन तस्करी ने फिर उठाए पुराने सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:40 PM IST
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बलरामपुर। तराई के जंगलों में वन संपदा की तस्करी कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सामने आए मामलों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आखिर तस्कर इतने लंबे समय तक सक्रिय कैसे रहे। कई मामलों में वन विभाग के अधिकारियों पर ही तस्करों को संरक्षण देने, अवैध वसूली करने और कार्रवाई की जानकारी पहले से पहुंचाने जैसे आरोप लगे हैं।
ताजा मामला हरैया सतघरवा क्षेत्र का है। यहां एसएसबी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने करीब 15 लाख रुपये मूल्य की सफेद चंदन की लकड़ी के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। टीम ने आठ बोटा चंदन, एक कार और एक बाइक भी बरामद की है। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार कन्नौज और कानपुर तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
लगातार सामने आ रहे मामलों को देखें तो एक पैटर्न साफ दिखाई देता है। पहले वन विभाग में रिश्वतखोरी के आरोप सामने आए, फिर तस्करों और विभागीय अधिकारियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई हुई और अब बहुमूल्य चंदन की लकड़ी की बरामदगी ने फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
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सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राम बहादुर का कहना है कि वन संपदा की इतनी बड़ी लूट केवल तस्करों के दम पर संभव नहीं लगती। यह भी जांच का विषय है कि क्या उन्हें विभाग के भीतर से किसी तरह का संरक्षण मिल रहा था। तराई के जंगलों में वन संपदा की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, उन्हीं पर समय-समय पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। हरैया सतघरवा के प्रभारी निरीक्षक हरीश सिंह ने बताया कि सफेद चंदन तस्करी मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है।
2023 में सामने आया था रिश्वतखोरी का मामला
2023 में तुलसीपुर रेंज के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंजर डीपी सिंह और वन दरोगा भरत प्रसाद सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप था कि सागौन की कटान और परिवहन परमिट जारी करने के नाम पर लकड़ी कारोबारी से लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई। कुशीनगर के लकड़ी कारोबारी सुनील वर्मा ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने तय दर के अनुसार एक लाख 71 हजार रुपये लिए, लेकिन इसके बाद भी परमिट जारी नहीं किया। मामले की जांच के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन को संपत्तियों की जांच की संस्तुति भी भेजी थी।
2025 में गैंगस्टर की कार्रवाई से मचा था हड़कंप
सितंबर 2025 में पुलिस ने वन तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बरहवा रेंज के तत्कालीन रेंजर राकेश पाठक समेत 19 लोगों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया था। पुलिस जांच में सामने आया था कि गिरोह वर्षों से खैर और अन्य बहुमूल्य लकड़ियों की तस्करी कर रहा था। आरोप था कि कुछ विभागीय लोगों की मदद से अवैध लकड़ी को वैध दिखाया जाता था और कार्रवाई की सूचना पहले ही तस्करों तक पहुंच जाती थी। जांच में गिरोह के संबंध लखनऊ, महाराजगंज, कुशीनगर, हरियाणा और नेपाल तक पाए गए थे।
अब जांच के दायरे में पूरा नेटवर्क
ताजा चंदन तस्करी मामले के बाद फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल तस्करों की गिरफ्तारी काफी है या फिर उन लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए जिन्होंने वर्षों तक इस अवैध कारोबार को बढ़ने का मौका दिया। जानकारों का मानना है कि वन संपदा की सुरक्षा के लिए तस्करों के साथ-साथ पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी है।
ताजा मामला हरैया सतघरवा क्षेत्र का है। यहां एसएसबी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने करीब 15 लाख रुपये मूल्य की सफेद चंदन की लकड़ी के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। टीम ने आठ बोटा चंदन, एक कार और एक बाइक भी बरामद की है। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार कन्नौज और कानपुर तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
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लगातार सामने आ रहे मामलों को देखें तो एक पैटर्न साफ दिखाई देता है। पहले वन विभाग में रिश्वतखोरी के आरोप सामने आए, फिर तस्करों और विभागीय अधिकारियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई हुई और अब बहुमूल्य चंदन की लकड़ी की बरामदगी ने फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राम बहादुर का कहना है कि वन संपदा की इतनी बड़ी लूट केवल तस्करों के दम पर संभव नहीं लगती। यह भी जांच का विषय है कि क्या उन्हें विभाग के भीतर से किसी तरह का संरक्षण मिल रहा था। तराई के जंगलों में वन संपदा की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, उन्हीं पर समय-समय पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। हरैया सतघरवा के प्रभारी निरीक्षक हरीश सिंह ने बताया कि सफेद चंदन तस्करी मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है।
2023 में सामने आया था रिश्वतखोरी का मामला
2023 में तुलसीपुर रेंज के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंजर डीपी सिंह और वन दरोगा भरत प्रसाद सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप था कि सागौन की कटान और परिवहन परमिट जारी करने के नाम पर लकड़ी कारोबारी से लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई। कुशीनगर के लकड़ी कारोबारी सुनील वर्मा ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने तय दर के अनुसार एक लाख 71 हजार रुपये लिए, लेकिन इसके बाद भी परमिट जारी नहीं किया। मामले की जांच के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन को संपत्तियों की जांच की संस्तुति भी भेजी थी।
2025 में गैंगस्टर की कार्रवाई से मचा था हड़कंप
सितंबर 2025 में पुलिस ने वन तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बरहवा रेंज के तत्कालीन रेंजर राकेश पाठक समेत 19 लोगों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया था। पुलिस जांच में सामने आया था कि गिरोह वर्षों से खैर और अन्य बहुमूल्य लकड़ियों की तस्करी कर रहा था। आरोप था कि कुछ विभागीय लोगों की मदद से अवैध लकड़ी को वैध दिखाया जाता था और कार्रवाई की सूचना पहले ही तस्करों तक पहुंच जाती थी। जांच में गिरोह के संबंध लखनऊ, महाराजगंज, कुशीनगर, हरियाणा और नेपाल तक पाए गए थे।
अब जांच के दायरे में पूरा नेटवर्क
ताजा चंदन तस्करी मामले के बाद फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल तस्करों की गिरफ्तारी काफी है या फिर उन लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए जिन्होंने वर्षों तक इस अवैध कारोबार को बढ़ने का मौका दिया। जानकारों का मानना है कि वन संपदा की सुरक्षा के लिए तस्करों के साथ-साथ पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी है।