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Balrampur News: बलरामपुर की बेटियों ने फतह की 18 हजार फीट ऊंची काला पत्थर चोटी
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 18 May 2026 11:10 PM IST
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फोटो-21-नेपाल में एवरेस्ट की पहाड़ियों पर मौजूद बेटियां ।-स्रोत : विभाग
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बलरामपुर। हिमालय की दुर्गम वादियों में साहस, धैर्य और मजबूत इच्छाशक्ति की नई मिसाल कायम करने वाली बेटियां 18,192 फीट ऊंची काला पत्थर चोटी फतह करने के बाद अब वापसी यात्रा पर निकल पड़ी हैं। ‘सशक्त बेटियां, सशक्त बलरामपुर’ अभियान के तहत सात मई को जिले से रवाना हुआ छात्राओं का दल 12 दिन तक कठिन हिमालयी ट्रैक पार कर अब नामचे बाजार की ओर लौट रहा है। बेटियों की इस उपलब्धि से जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।
हैंडबॉल प्रशिक्षक हिना खातून के नेतृत्व में नीलांशु, प्रियंका उपाध्याय और प्रियंका प्रजापति ने सात मई को बलरामपुर से नेपाल के लिए यात्रा शुरू की थी। सड़क मार्ग से काठमांडू पहुंचने के बाद दल ने लुकला से ट्रैकिंग शुरू की। इसके बाद फाकडिंग, नामचे बाजार, तेंगबोचे, डिंगबोचे और फेरिचे जैसे दुर्गम पड़ावों को पार करते हुए छात्राएं लगातार ऊंचाई की ओर बढ़ती रहीं। अभियान के दौरान उन्हें तेज ठंड, बर्फीली हवाओं, पथरीले रास्तों और कम ऑक्सीजन जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
लगातार कई दिनों तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्रैकिंग करने के बाद छात्राओं ने लगभग 5,364 मीटर यानी 17,598 फीट ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचकर बड़ी सफलता हासिल की। इसके बाद दल ने करीब 5,545 मीटर यानी 18,192 फीट ऊंचे काला पत्थर तक भी चढ़ाई पूरी की। काला पत्थर एवरेस्ट क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध व्यू प्वाइंट माना जाता है, जहां से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का बेहद साफ और भव्य दृश्य दिखाई देता है। अधिकतर ट्रेकर्स एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने के बाद ही काला पत्थर की चढ़ाई पूरी करते हैं, जिसे अभियान का सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
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अभियान के दौरान छात्राओं ने प्रतिदिन कई किलोमीटर पैदल यात्रा की। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी और मौसम में अचानक बदलाव उनके लिए बड़ी चुनौती रहे, लेकिन बेटियों ने हिम्मत नहीं हारी। टीम लीडर हिना खातून लगातार उनका उत्साह बढ़ाती रहीं और सुरक्षा संबंधी सावधानियों के साथ पूरा अभियान संचालित किया गया।
रविवार को अभियान के 12वें दिन छात्राओं का दल फेरिचे से आगे बढ़ते हुए नामचे बाजार की ओर रवाना हुआ। नीलांशु कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्रा हैं, जबकि प्रियंका उपाध्याय डीएवी इंटर कॉलेज और प्रियंका प्रजापति कंपोजिट विद्यालय रमनगरा से जुड़ी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद छात्राओं ने जिस साहस और आत्मविश्वास के साथ यह अभियान पूरा किया, उसकी जिले भर में सराहना हो रही है।
जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन और सीडीओ हिमांशु गुप्ता ने छात्राओं की उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट बेस कैंप और कालापत्थर जैसी कठिन ऊंचाइयों तक पहुंचना आसान नहीं होता। बेटियों ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि छात्राओं की यह सफलता जिले की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
हैंडबॉल प्रशिक्षक हिना खातून के नेतृत्व में नीलांशु, प्रियंका उपाध्याय और प्रियंका प्रजापति ने सात मई को बलरामपुर से नेपाल के लिए यात्रा शुरू की थी। सड़क मार्ग से काठमांडू पहुंचने के बाद दल ने लुकला से ट्रैकिंग शुरू की। इसके बाद फाकडिंग, नामचे बाजार, तेंगबोचे, डिंगबोचे और फेरिचे जैसे दुर्गम पड़ावों को पार करते हुए छात्राएं लगातार ऊंचाई की ओर बढ़ती रहीं। अभियान के दौरान उन्हें तेज ठंड, बर्फीली हवाओं, पथरीले रास्तों और कम ऑक्सीजन जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
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लगातार कई दिनों तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्रैकिंग करने के बाद छात्राओं ने लगभग 5,364 मीटर यानी 17,598 फीट ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचकर बड़ी सफलता हासिल की। इसके बाद दल ने करीब 5,545 मीटर यानी 18,192 फीट ऊंचे काला पत्थर तक भी चढ़ाई पूरी की। काला पत्थर एवरेस्ट क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध व्यू प्वाइंट माना जाता है, जहां से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का बेहद साफ और भव्य दृश्य दिखाई देता है। अधिकतर ट्रेकर्स एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने के बाद ही काला पत्थर की चढ़ाई पूरी करते हैं, जिसे अभियान का सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
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रविवार को अभियान के 12वें दिन छात्राओं का दल फेरिचे से आगे बढ़ते हुए नामचे बाजार की ओर रवाना हुआ। नीलांशु कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्रा हैं, जबकि प्रियंका उपाध्याय डीएवी इंटर कॉलेज और प्रियंका प्रजापति कंपोजिट विद्यालय रमनगरा से जुड़ी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद छात्राओं ने जिस साहस और आत्मविश्वास के साथ यह अभियान पूरा किया, उसकी जिले भर में सराहना हो रही है।
जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन और सीडीओ हिमांशु गुप्ता ने छात्राओं की उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट बेस कैंप और कालापत्थर जैसी कठिन ऊंचाइयों तक पहुंचना आसान नहीं होता। बेटियों ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि छात्राओं की यह सफलता जिले की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।