UP: नहर में नहाते समय डूबने से दो सगी बहनों की मौत, पैर फिसलने से गहरे पानी में चली गईं; गांव में छाया मातम
बलरामपुर जिले के इटईरामपुर गांव में नहर में नहाने गई दो सगी बहनें नसरीन (10) और महजवीन (7) पैर फिसलने से गहरे पानी में डूब गईं। ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना से गांव में शोक फैल गया।
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बलरामपुर में उतरौला तहसील के ग्राम इटईरामपुर में शुक्रवार की शाम उस समय मातम छा गया जब नहर में नहाने गई दो सगी बहनों की डूबने से मौत हो गई। मासूम बच्चियों की असमय मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद गांव में देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही।
ग्राम इटईरामपुर के ग्राम प्रधान रमेश ने बताया कि गांव निवासी अकबर अली की पुत्री नसरीन (10) और महजवीन (7) शुक्रवार की शाम करीब पांच बजे गांव के पास से गुजर रही सुबनजोत नहर में नहाने के लिए चली गई थीं।
दोनों बच्चियां अक्सर गांव के अन्य बच्चों के साथ नहर किनारे खेलने जाया करती थीं। शुक्रवार को भी वे घर से निकलकर नहर पर पहुंच गईं और नहाने लगीं। बताया जाता है कि नहाते समय अचानक दोनों का पैर फिसल गया और वे नहर के गहरे हिस्से में चली गईं।
पानी का बहाव तेज होने और गहराई अधिक होने के कारण दोनों संभल नहीं सकीं और देखते ही देखते पानी में डूब गईं।कुछ ही देर बाद वहां से गुजर रहे ग्रामीणों की नजर नहर में डूबती बच्चियों पर पड़ी तो उन्होंने शोर मचाया। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर दौड़ पड़े।
ग्रामीणों ने तत्काल नहर में उतरकर दोनों बच्चियों की तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद दोनों को नहर से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। घटना की सूचना मिलते ही परिजन और गांव के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। दोनों बच्चियों के शव देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव में हर तरफ मातम का माहौल बन गया और देर शाम तक लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते रहे।
पांच बहनों और एक भाई में सबसे छोटी थीं दोनों, मुंबई में हैं पिता
मृतक बच्चियों के पिता अकबर अली मुंबई में एक टेंट की दुकान पर मजदूरी करते हैं। घटना की सूचना मिलते ही परिवार के लोगों ने उन्हें फोन पर जानकारी दी, जिसके बाद वह मुंबई से अपने गांव के लिए रवाना हो गए हैं। पिता के आने का इंतजार पूरे परिवार को है।
परिजनों के अनुसार परिवार में पांच बहनें और एक भाई हैं। इनमें नसरीन और महजवीन सबसे छोटी थीं। भाई तौफीक अली ने बताया कि उनके साथ ही नाजरीन, साबरीन, इशरत बहने हैं। दोनों बच्चियों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में मातम पसरा हुआ है और मां का रो-रोकर बुरा हाल बताया जा रहा है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे, सुरक्षा बढ़ाने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पास से गुजर रही नहर में अक्सर बच्चे नहाने के लिए चले जाते हैं। नहर की गहराई अधिक होने और किनारों पर सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण यहां हादसे का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी नहर में डूबने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। इस दर्दनाक घटना के बाद ग्रामीणों निसार, अकरम आदि ने प्रशासन से नहर किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने, खतरनाक स्थानों पर बैरिकेडिंग कराने और बच्चों को नहर में जाने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं हुआ परिवार
नहर में डूबने से हुई मौत में बालिकाओं का पोस्टमार्टम कराने के लिए परिवार तैयार नही हुआ। तहसीलदार वीरेंद्र प्रताप भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को समझाया, मुंबई में रह रहे पिता से भी बात की। गांव के लोगों ने भी समझाया कि विधिक प्रक्रिया जरूरी है, इससे आपदा राहत से सहायता मिलेगी। लेकिन परिवार नहीं माना। जिला आपदा विशेषज्ञ अरूण सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम न होने से आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी। परिवार को चार-चार लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है।
