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Balrampur News: अनुरक्षण कार्यों की फाइलों में छिपे राज खंगालेगा विजिलेंस
Sat, 11 Jul 2026 10:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 11 Jul 2026 10:42 PM IST
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बलरामपुर। बहुचर्चित स्वास्थ्य घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच अनुरक्षण मद में कराए गए कार्यों से संबंधित अभिलेखों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है। जांच एजेंसी ने जिले के तीनों सरकारी अस्पतालों से निविदा प्रक्रिया, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, भुगतान और अनुरक्षण कार्यों से जुड़े सभी मूल अभिलेख तलब किए हैं। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका की जांच और तेज होगी।
सूत्रों के अनुसार विजिलेंस की नजर तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. घनश्याम सिंह समेत उन अधिकारियों पर है, जिनके कार्यकाल में अनुरक्षण मद से बड़े पैमाने पर खर्च हुआ था। जांच एजेंसी प्रशासनिक स्वीकृतियों, कार्यों के अनुमोदन और भुगतान प्रक्रिया की अलग-अलग बिंदुओं पर जांच कर रही है। दस्तावेजों की पड़ताल पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारियों से पूछताछ का दायरा भी बढ़ सकता है।
विजिलेंस ने वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 तक अनुरक्षण मद में हुए कार्यों के टेंडर अभिलेख, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान संबंधी रिकॉर्ड तथा अन्य संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। एजेंसी यह भी जांच रही है कि कार्यों के निष्पादन में सरकारी वित्तीय नियमों और खरीद प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के साक्ष्य मिलते हैं तो जांच का दायरा और विस्तृत किया जा सकता है।
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सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी ने तत्कालीन सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह के कार्यकाल से जुड़े उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण भी शुरू कर दिया है। उनके कार्यकाल में लिए गए प्रशासनिक निर्णयों और उपलब्ध सूचनाओं का सत्यापन कराया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में विजिलेंस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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एफआईआर की जांच में अहम साबित होंगे पुराने रिकॉर्ड
विजिलेंस इससे पहले पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर चुका है। हाल ही में अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद जांच एजेंसी ने दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अस्पतालों से मांगे गए अभिलेखों को इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार पुराने रिकॉर्ड संकलित किए जा रहे हैं और निर्धारित समय सीमा के भीतर विजिलेंस को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जा सकता है। यदि अभिलेखों में वित्तीय अनियमितताओं के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो जांच एजेंसी आगे वैधानिक कार्रवाई करेगी।
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सूत्रों के अनुसार विजिलेंस की नजर तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. घनश्याम सिंह समेत उन अधिकारियों पर है, जिनके कार्यकाल में अनुरक्षण मद से बड़े पैमाने पर खर्च हुआ था। जांच एजेंसी प्रशासनिक स्वीकृतियों, कार्यों के अनुमोदन और भुगतान प्रक्रिया की अलग-अलग बिंदुओं पर जांच कर रही है। दस्तावेजों की पड़ताल पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारियों से पूछताछ का दायरा भी बढ़ सकता है।
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विजिलेंस ने वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 तक अनुरक्षण मद में हुए कार्यों के टेंडर अभिलेख, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान संबंधी रिकॉर्ड तथा अन्य संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। एजेंसी यह भी जांच रही है कि कार्यों के निष्पादन में सरकारी वित्तीय नियमों और खरीद प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के साक्ष्य मिलते हैं तो जांच का दायरा और विस्तृत किया जा सकता है।
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सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी ने तत्कालीन सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह के कार्यकाल से जुड़े उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण भी शुरू कर दिया है। उनके कार्यकाल में लिए गए प्रशासनिक निर्णयों और उपलब्ध सूचनाओं का सत्यापन कराया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में विजिलेंस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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एफआईआर की जांच में अहम साबित होंगे पुराने रिकॉर्ड
विजिलेंस इससे पहले पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर चुका है। हाल ही में अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद जांच एजेंसी ने दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अस्पतालों से मांगे गए अभिलेखों को इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार पुराने रिकॉर्ड संकलित किए जा रहे हैं और निर्धारित समय सीमा के भीतर विजिलेंस को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जा सकता है। यदि अभिलेखों में वित्तीय अनियमितताओं के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो जांच एजेंसी आगे वैधानिक कार्रवाई करेगी।