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Balrampur News: गोदाम में गेहूं भिगोकर आपूर्ति, वीडियो वायरल
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-बलरामपुर के खुटेहना स्थित गोदाम पर टुल्लू पंप लगाकर पाइप से भिगोया जा रहा गेहूं।
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बलरामपुर। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हर माह लाखों लाभार्थियों को गेहूं उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन अब इस व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि सदर विकास खंड के खुटेहना में उत्तर प्रदेश राज्य भंडार गृह (गोदाम) में गेहूं के बोरे को टुल्लू पंप लगाकर पानी से भिगोया जा रहा है, ताकि वजन बढ़ाकर आपूर्ति की जा सके। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि अमर उजाला वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 15 लाख 96 हजार 130 लाभार्थियों को प्रतिमाह दो किलो गेहूं का वितरण होता है। इस तरह हर महीने करीब 31 हजार क्विंटल गेहूं सरकारी राशन की दुकानों तक पहुंचाया जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में होने वाले वितरण में अगर थोड़ी सी भी गड़बड़ी होती है तो उसका असर सीधे लाभार्थियों और कोटेदारों पर पड़ता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य तौर पर गोदाम में रखे गेहूं में नमी आठ से 12 प्रतिशत तक रहती है। लेकिन जब बोरे में पानी डाला जाता है तो नमी बढ़कर करीब 20 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। इससे एक बोरे का वजन औसतन तीन से चार किलो तक बढ़ जाता है। आरोप है कि नमी बढ़े हुए बोरे को उसी हालत में ट्रकों में लादकर कोटे की दुकानों तक भेज दिया जाता है।
कोटेदारों का कहना है कि जब यह गेहूं दुकानों पर पहुंचकर सूखता है तो उसका वजन फिर से घटकर मूल स्थिति में आ जाता है। नतीजतन प्रति बोरा तीन से चार किलो तक का अंतर निकल आता है। इस कमी की जिम्मेदारी कोटेदारों पर डाल दी जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और विभागीय कार्रवाई का भी डर बना रहता है।
कराई जा रही जांच
वायरल वीडियो की जांच कराई जा रही है। यदि कहीं भी अनियमितता पाई गई तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - विपिन कुमार जैन, डीएम
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आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 15 लाख 96 हजार 130 लाभार्थियों को प्रतिमाह दो किलो गेहूं का वितरण होता है। इस तरह हर महीने करीब 31 हजार क्विंटल गेहूं सरकारी राशन की दुकानों तक पहुंचाया जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में होने वाले वितरण में अगर थोड़ी सी भी गड़बड़ी होती है तो उसका असर सीधे लाभार्थियों और कोटेदारों पर पड़ता है।
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कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य तौर पर गोदाम में रखे गेहूं में नमी आठ से 12 प्रतिशत तक रहती है। लेकिन जब बोरे में पानी डाला जाता है तो नमी बढ़कर करीब 20 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। इससे एक बोरे का वजन औसतन तीन से चार किलो तक बढ़ जाता है। आरोप है कि नमी बढ़े हुए बोरे को उसी हालत में ट्रकों में लादकर कोटे की दुकानों तक भेज दिया जाता है।
कोटेदारों का कहना है कि जब यह गेहूं दुकानों पर पहुंचकर सूखता है तो उसका वजन फिर से घटकर मूल स्थिति में आ जाता है। नतीजतन प्रति बोरा तीन से चार किलो तक का अंतर निकल आता है। इस कमी की जिम्मेदारी कोटेदारों पर डाल दी जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और विभागीय कार्रवाई का भी डर बना रहता है।
कराई जा रही जांच
वायरल वीडियो की जांच कराई जा रही है। यदि कहीं भी अनियमितता पाई गई तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - विपिन कुमार जैन, डीएम