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Banda News: जन्मतिथि भिन्नता के मामले में आरोपी को मिली अग्रिम जमानत
Thu, 23 Jul 2026 11:22 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Thu, 23 Jul 2026 11:22 PM IST
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बांदा। पुलिस भर्ती परीक्षा में जन्मतिथि में भिन्नता के आरोप में फंसे भानुप्रताप को सत्र न्यायाधीश अल्पना ने अग्रिम जमानत दी है। न्यायालय ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और एक प्रतिभू पर जमानत स्वीकार की। यह आदेश न्यायालय ने मंगलवार को जारी किया है।
भानुप्रताप पर आरोप था कि 30 अगस्त 2024 को रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज बांदा में पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान उसकी बायोमीट्रिक जांच में जन्मतिथि अलग पाई गई। ई-केवाईसी पोर्टल पर उसकी जन्मतिथि 31 अगस्त 1989 थी, जबकि प्रवेश पत्र और आधार कार्ड में एक जुलाई 1999 अंकित थी। पूछताछ में उसने बताया था कि उसने अलग-अलग जन्मतिथि पर दो बार हाईस्कूल परीक्षा दी है। इस पर केंद्र प्रभारी रामदिनेश तिवारी ने थाना कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
भानुप्रताप ने अग्रिम जमानत याचिका में खुद को निर्दोष बताया। उसने कहा कि उसे झूठे साजिश में फंसाया गया है। उसके अनुसार, उसकी वास्तविक जन्मतिथि 1 जुलाई 1999 है और 2004 में हाईस्कूल परीक्षा देना असंभव था क्योंकि तब उसकी आयु मात्र पांच वर्ष थी। उसने यह भी बताया कि आधार कार्ड में टंकण त्रुटि के कारण गलत जन्मतिथि अंकित हुई थी।
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न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन किया और पाया कि विवेचना के दौरान भानुप्रताप को गिरफ्तार नहीं किया गया था। थाने से प्राप्त रिपोर्ट में उसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास भी नहीं पाया गया।
न्यायालय ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इसे प्रथम दृष्टया जमानत योग्य माना। अग्रिम जमानत स्वीकार करते हुए कुछ शर्तें लगाई गईं। भानुप्रताप को साक्षियों को प्रताड़ित या उन पर दबाव डालने से रोका गया है। उसे अभियोजन साक्ष्यों को नष्ट न करने और विचारण के दौरान नियत तिथि पर व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। उसे किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल न होने की शर्त भी माननी होगी।
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भानुप्रताप पर आरोप था कि 30 अगस्त 2024 को रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज बांदा में पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान उसकी बायोमीट्रिक जांच में जन्मतिथि अलग पाई गई। ई-केवाईसी पोर्टल पर उसकी जन्मतिथि 31 अगस्त 1989 थी, जबकि प्रवेश पत्र और आधार कार्ड में एक जुलाई 1999 अंकित थी। पूछताछ में उसने बताया था कि उसने अलग-अलग जन्मतिथि पर दो बार हाईस्कूल परीक्षा दी है। इस पर केंद्र प्रभारी रामदिनेश तिवारी ने थाना कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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भानुप्रताप ने अग्रिम जमानत याचिका में खुद को निर्दोष बताया। उसने कहा कि उसे झूठे साजिश में फंसाया गया है। उसके अनुसार, उसकी वास्तविक जन्मतिथि 1 जुलाई 1999 है और 2004 में हाईस्कूल परीक्षा देना असंभव था क्योंकि तब उसकी आयु मात्र पांच वर्ष थी। उसने यह भी बताया कि आधार कार्ड में टंकण त्रुटि के कारण गलत जन्मतिथि अंकित हुई थी।
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न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन किया और पाया कि विवेचना के दौरान भानुप्रताप को गिरफ्तार नहीं किया गया था। थाने से प्राप्त रिपोर्ट में उसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास भी नहीं पाया गया।
न्यायालय ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इसे प्रथम दृष्टया जमानत योग्य माना। अग्रिम जमानत स्वीकार करते हुए कुछ शर्तें लगाई गईं। भानुप्रताप को साक्षियों को प्रताड़ित या उन पर दबाव डालने से रोका गया है। उसे अभियोजन साक्ष्यों को नष्ट न करने और विचारण के दौरान नियत तिथि पर व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। उसे किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल न होने की शर्त भी माननी होगी।