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Banda News: मंडल के 35 हजार उपभोक्ताओं के बिजली बिल दूसरे जिलों में हुए ट्रांसफर

संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Fri, 03 Apr 2026 12:41 AM IST
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Electricity bills of 35,000 consumers of the division were transferred to other districts.
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बांदा। बिजली विभाग की बड़ी चूक से मंडल के 35,412 से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को दो वर्षों से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग द्वारा कनेक्शन के लेजराइजेशन के दौरान हुई गलत डेटा फीडिंग के चलते इन उपभोक्ताओं के बिजली बिल अन्य जिलों में ट्रांसफर हो गए हैं। इस समस्या के कारण न तो उनके बिल जमा हो पा रहे हैं और न ही उनमें कोई संशोधन संभव हो पा रहा है।
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मंडल के चारों जिलों में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) के कुल 8.39 लाख उपभोक्ता हैं। इनमें बांदा में 3.06 लाख, चित्रकूट में 1.76 लाख, हमीरपुर में 2.10 लाख उपभोक्ता शामिल है। इन उपभोक्ताओं में से एक बड़ी संख्या के बिल हर माह गड़बड़ा रहे हैं। समस्या की जड़ यह है कि ये बिल विभाग के कंप्यूटर सिस्टम में दिखाई ही नहीं दे रहे हैं, क्योंकि वे गलती से किसी अन्य जिले के बिजली डिवीजन को ट्रांसफर हो गए हैं।
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इस गड़बड़ी के कारण बहुत से उपभोक्ता अपना बिजली बिल जमा करने या उसमें किसी भी प्रकार का संशोधन कराने में असमर्थ हैं। मंडल के चारों जिलों में ऐसे उपभोक्ताओं की कुल संख्या 35,412 है। इसमें बांदा में 11,720, चित्रकूट में 7,756, हमीरपुर में 8,572 और महोबा में 7,362 उपभोक्ता शामिल हैं। ये सभी वे उपभोक्ता हैं जिनके बिल गलत जिले में खुल रहे हैं।
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संशोधन की जटिल और उपेक्षित प्रक्रिया

जिन जिलों के डिवीजन में ये खाते गलती से ट्रांसफर हो जाते हैं, वहां प्रक्रिया काफी जटिल है। उपभोक्ता की शिकायत पर संबंधित डिवीजन के अधिशासी अभियंता को दूसरे डिवीजन के अधिशासी अभियंता से पत्राचार या शिकायत के माध्यम से यह अनुरोध करना पड़ता है कि यह खाता गलती से उनके डिवीजन में चला गया है और इसे वापस ट्रांसफर किया जाए। हालांकि, यह देखा जा रहा है कि इस तरह के अनुरोधों पर संबंधित अधिकारी विशेष ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस वजह से, ऐसे बिलों को लेकर उपभोक्ता 30 से 40 किमी की दूरी तय करके जिला मुख्यालय के कार्यालयों में अधिकारियों और लिपिकों के चक्कर लगा रहे हैं।
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गलत बिलिंग और बढ़ी हुई समस्या

यह अत्यंत चिंताजनक है कि यदि किसी उपभोक्ता के बिल दूसरे जिलों को ट्रांसफर हो गए हैं, तो वहां से उन्हें वापस स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो रहा है, तो कम से कम उस उपभोक्ता की बिलिंग को रोका जाना चाहिए। परंतु, जिस जिले को ये खाते ट्रांसफर हुए हैं, वहां से हर माह उल्टे-सीधे बिल जनरेट किए जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं को हर माह बढ़े हुए बिल भेजे जा रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ रही है।


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बिलों का संशोधन किया जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार नेटवर्किंग की समस्या के कारण बिल नहीं खुलते हैं, जो अगले माह खुलने लगते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि ऐसे उपभोक्ता हैं जिनके बिल नहीं खुल रहे हैं या फिर दूसरे जिले ट्रांसफर हो गए हैं तो उनकी समस्या को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित कराई जाएगी।


- अरविंद नायक, मुख्य अभियंता
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