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Barabanki News: ऑडिट का पहरा, फिर भी बीईओ दफ्तरों तक सिमटी जांच
Wed, 29 Jul 2026 01:42 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 29 Jul 2026 01:42 AM IST
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बाराबंकी। सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विकास बजट और मिड-डे मील (एमडीएम) के खर्च की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय ऑडिट व्यवस्था लागू है, लेकिन जिले में इसकी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
शिक्षकों का आरोप है कि जिन ऑडिट टीमों को विद्यालयों में जाकर अभिलेखों और व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन करना चाहिए, वे अधिकांश मामलों में बीईओ कार्यालयों में बैठकर ही फाइलों की जांच पूरी कर रही हैं। इससे पारदर्शिता पर सवाल उठने के साथ-साथ शिक्षकों में असंतोष भी बढ़ रहा है।
जिले के करीब 2618 विद्यालयों के शिक्षक बताते हैं कि सबसे अधिक परेशानी एमडीएम के खातों को लेकर होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में दाल, सब्जी और मसालों जैसी दैनिक जरूरत की सामग्री स्थानीय दुकानदारों से खरीदी जाती है, जिनके पक्के बिल-वाउचर उपलब्ध कराना कई बार व्यवहारिक रूप से संभव नहीं होता।
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आरोप है कि इसी स्थिति और कार्रवाई के भय का हवाला देकर कुछ लोग शिक्षकों पर दबाव बनाते हैं। शिक्षकों के बीच चर्चा है कि औसतन 300 रुपये प्रति विद्यालय के हिसाब से कथित चंदा जुटाने की कोशिश की जाती है, ताकि ऑडिट संबंधी परेशानियों से बचा जा सके। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शिक्षकों का यह भी कहना है कि वर्षों से लगातार ऑडिट होने के बावजूद किसी बड़ी वित्तीय अनियमितता का सामने न आना भी पूरी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि यदि जांच वास्तव में विद्यालय स्तर पर हो तो स्थिति अधिक पारदर्शी बन सकती है।
जिले में एजी की टीम वर्ष 2021 से 2026 तक की अवधि का ऑडिट कर रही है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है। यदि ऑडिट के नाम पर किसी शिक्षक के शोषण की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- नवीन कुमार पाठक, बीएसए
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शिक्षकों का आरोप है कि जिन ऑडिट टीमों को विद्यालयों में जाकर अभिलेखों और व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन करना चाहिए, वे अधिकांश मामलों में बीईओ कार्यालयों में बैठकर ही फाइलों की जांच पूरी कर रही हैं। इससे पारदर्शिता पर सवाल उठने के साथ-साथ शिक्षकों में असंतोष भी बढ़ रहा है।
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जिले के करीब 2618 विद्यालयों के शिक्षक बताते हैं कि सबसे अधिक परेशानी एमडीएम के खातों को लेकर होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में दाल, सब्जी और मसालों जैसी दैनिक जरूरत की सामग्री स्थानीय दुकानदारों से खरीदी जाती है, जिनके पक्के बिल-वाउचर उपलब्ध कराना कई बार व्यवहारिक रूप से संभव नहीं होता।
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आरोप है कि इसी स्थिति और कार्रवाई के भय का हवाला देकर कुछ लोग शिक्षकों पर दबाव बनाते हैं। शिक्षकों के बीच चर्चा है कि औसतन 300 रुपये प्रति विद्यालय के हिसाब से कथित चंदा जुटाने की कोशिश की जाती है, ताकि ऑडिट संबंधी परेशानियों से बचा जा सके। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शिक्षकों का यह भी कहना है कि वर्षों से लगातार ऑडिट होने के बावजूद किसी बड़ी वित्तीय अनियमितता का सामने न आना भी पूरी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि यदि जांच वास्तव में विद्यालय स्तर पर हो तो स्थिति अधिक पारदर्शी बन सकती है।
जिले में एजी की टीम वर्ष 2021 से 2026 तक की अवधि का ऑडिट कर रही है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है। यदि ऑडिट के नाम पर किसी शिक्षक के शोषण की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- नवीन कुमार पाठक, बीएसए