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Barabanki News: चार महीने से नहीं मिला मानदेय, अतिरिक्त काम पर भी जेब खाली
Fri, 31 Jul 2026 02:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:12 AM IST
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बाराबंकी। जिले में पंचायती राज और ग्राम्य विकास विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों का अकाल क्या पड़ा, इसका पूरा बोझ स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के संविदा ऑपरेटरों की कमर तोड़ रहा है। चार महीनों अप्रैल, मई, जून और जुलाई का मानदेय न मिलने से इन कर्मियों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
हद तो यह है कि बिना किसी बजट या लिखित आदेश के इनसे दर्जनों अनौपचारिक काम दिन-रात कराये जा रहे हैं। मुख्यालय से लेकर ब्लॉक तक लिपिक न होने के कारण विभागीय पत्रों की ड्राफ्टिंग से लेकर आरजीएसए, फैमिली आईडी, आयुष्मान कार्ड, क्रॉप सर्वे, पंचायत सहायकों की उपस्थिति और एसआईआर, नवंबर 2025 से मार्च 2026 तक डुप्लीकेट मतदाता सत्यापन जैसे भारी-भरकम काम इन्हीं के भरोसे हैं।
विडंबना देखिए, इसी योजना के खंड प्रेरकों, डीसी और एडीओ को हर महीने पांच से 15 हजार रुपए तक का अतिरिक्त भत्ता मिल रहा है और पंचायत सहायकों को कमीशन। मगर सीएम डैशबोर्ड पर हर महीने समीक्षा झेलने वाले इन ऑपरेटरों को मानदेय तक नसीब नहीं। मई में श्रम आयुक्त और डीपीआरओ का दरवाजा खटखटाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी है। यह हाल तब है जब शासन खुद मान चुका है कि पंचायतों में काम का बोझ बढ़ा है।
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समीक्षा सीएम डैशबोर्ड पर, मानदेय शून्य
एस बीएम ऑपरेटरों के काम की महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनके द्वारा फीड किए गए आंकड़ों की हर महीने खुद मुख्यमंत्री सीएम डैशबोर्ड के जरिये समीक्षा करते हैं। इसके बावजूद जिस काम पर शासन की सीधी नजर रहती है, उसे करने वाले कर्मचारियों के पेट पर ही चार महीने से लात पड़ी हुई है।
स्टाफ की कमी के चलते कार्यों का समन्वय बनाना पड़ता है। ऑपरेटरों के बकाया मानदेय का जल्द भुगतान कराया जाएगा। अतिरिक्त कार्यों के पारिश्रमिक को लेकर भी शासन स्तर पर बातचीत कर कोई सकारात्मक रास्ता निकाला जाएगा।
- भूषण कुमार, डीडीओ
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हद तो यह है कि बिना किसी बजट या लिखित आदेश के इनसे दर्जनों अनौपचारिक काम दिन-रात कराये जा रहे हैं। मुख्यालय से लेकर ब्लॉक तक लिपिक न होने के कारण विभागीय पत्रों की ड्राफ्टिंग से लेकर आरजीएसए, फैमिली आईडी, आयुष्मान कार्ड, क्रॉप सर्वे, पंचायत सहायकों की उपस्थिति और एसआईआर, नवंबर 2025 से मार्च 2026 तक डुप्लीकेट मतदाता सत्यापन जैसे भारी-भरकम काम इन्हीं के भरोसे हैं।
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विडंबना देखिए, इसी योजना के खंड प्रेरकों, डीसी और एडीओ को हर महीने पांच से 15 हजार रुपए तक का अतिरिक्त भत्ता मिल रहा है और पंचायत सहायकों को कमीशन। मगर सीएम डैशबोर्ड पर हर महीने समीक्षा झेलने वाले इन ऑपरेटरों को मानदेय तक नसीब नहीं। मई में श्रम आयुक्त और डीपीआरओ का दरवाजा खटखटाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी है। यह हाल तब है जब शासन खुद मान चुका है कि पंचायतों में काम का बोझ बढ़ा है।
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समीक्षा सीएम डैशबोर्ड पर, मानदेय शून्य
एस बीएम ऑपरेटरों के काम की महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनके द्वारा फीड किए गए आंकड़ों की हर महीने खुद मुख्यमंत्री सीएम डैशबोर्ड के जरिये समीक्षा करते हैं। इसके बावजूद जिस काम पर शासन की सीधी नजर रहती है, उसे करने वाले कर्मचारियों के पेट पर ही चार महीने से लात पड़ी हुई है।
स्टाफ की कमी के चलते कार्यों का समन्वय बनाना पड़ता है। ऑपरेटरों के बकाया मानदेय का जल्द भुगतान कराया जाएगा। अतिरिक्त कार्यों के पारिश्रमिक को लेकर भी शासन स्तर पर बातचीत कर कोई सकारात्मक रास्ता निकाला जाएगा।
- भूषण कुमार, डीडीओ