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Barabanki News: क्लीनिक की आड़ में चल रहे अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 26 Mar 2026 01:54 AM IST
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बाराबंकी। जनपद में स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण अवैध अस्पतालों का एक ऐसा मकड़जाल फैल चुका है, जो अब मासूम जिंदगियों के लिए काल साबित हो रहा है। दर्जनों ऐसे क्लीनिक संचालित हैं, जिनके पास केवल ओपीडी का पंजीकरण है, लेकिन अंदर गुपचुप तरीके से बड़े अस्पताल और ऑपरेशन थिएटर चलाए जा रहे हैं।
इन तथाकथित अस्पतालों की कमान ऐसे लोगों के हाथों में है जिनके पास चिकित्सा की कोई वैध डिग्री या डिप्लोमा तक नहीं है। रामसनेहीघाट स्थित शिवाय हॉस्पिटल और मुरारपुर मोड़ पर संचालित मन्नत हॉस्पिटल जैसे संस्थान इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जहां अप्रशिक्षित स्टाफ मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहा है। बिना विशेषज्ञता के किए जा रहे इलाज और सर्जरी के कारण हाल ही में रजनापुर की लक्ष्मी और टीकापुर की गीता जैसी महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जिले में पंजीकृत क्लीनिकों की संख्या मात्र 46 है, जबकि धरातल पर इनकी संख्या सैकड़ों में है। सादुल्लापुर, बिशुनपुर, मसौली, रानीबाजार, सुढि़यामऊ, मोहम्मदपुर खाला, बेलहरा, भानमऊ चौराहा, कोठी, टिकैतनगर, बारिनबाग, अलियाबाद, कोटवासड़क, कोटवाधाम, खजुरी, जैदपुर, उधौली, हरख, शरीफाबाद आदि स्थानों पर क्लीनिक की आड़ में खुलेआम अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस काले धंधे की पूरी जानकारी है, लेकिन सांठ-गांठ के चलते इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। कई बार पुलिस केस दर्ज होने के बाद भी मामले रफा-दफा कर दिए जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ती फीस के चक्कर में लोग इन अवैध अस्पतालों के जाल में फंस जाते हैं।
संस्थानों को चिह्नित कर होगी कार्रवाई
नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ. एलबी गुप्ता का कहना है कि क्लीनिक और अस्पताल के पंजीकरण की शर्तें पूरी तरह अलग हैं। किसी भी स्थिति में क्लीनिक के पंजीकरण पर भर्ती या सर्जरी की अनुमति नहीं दी जा सकती। अवैध रूप से चल रहे ऐसे संस्थानों को चिह्नित कर जल्द ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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इन तथाकथित अस्पतालों की कमान ऐसे लोगों के हाथों में है जिनके पास चिकित्सा की कोई वैध डिग्री या डिप्लोमा तक नहीं है। रामसनेहीघाट स्थित शिवाय हॉस्पिटल और मुरारपुर मोड़ पर संचालित मन्नत हॉस्पिटल जैसे संस्थान इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जहां अप्रशिक्षित स्टाफ मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहा है। बिना विशेषज्ञता के किए जा रहे इलाज और सर्जरी के कारण हाल ही में रजनापुर की लक्ष्मी और टीकापुर की गीता जैसी महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी।
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सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जिले में पंजीकृत क्लीनिकों की संख्या मात्र 46 है, जबकि धरातल पर इनकी संख्या सैकड़ों में है। सादुल्लापुर, बिशुनपुर, मसौली, रानीबाजार, सुढि़यामऊ, मोहम्मदपुर खाला, बेलहरा, भानमऊ चौराहा, कोठी, टिकैतनगर, बारिनबाग, अलियाबाद, कोटवासड़क, कोटवाधाम, खजुरी, जैदपुर, उधौली, हरख, शरीफाबाद आदि स्थानों पर क्लीनिक की आड़ में खुलेआम अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस काले धंधे की पूरी जानकारी है, लेकिन सांठ-गांठ के चलते इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। कई बार पुलिस केस दर्ज होने के बाद भी मामले रफा-दफा कर दिए जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ती फीस के चक्कर में लोग इन अवैध अस्पतालों के जाल में फंस जाते हैं।
संस्थानों को चिह्नित कर होगी कार्रवाई
नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ. एलबी गुप्ता का कहना है कि क्लीनिक और अस्पताल के पंजीकरण की शर्तें पूरी तरह अलग हैं। किसी भी स्थिति में क्लीनिक के पंजीकरण पर भर्ती या सर्जरी की अनुमति नहीं दी जा सकती। अवैध रूप से चल रहे ऐसे संस्थानों को चिह्नित कर जल्द ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।