{"_id":"6a6a5a6dbe44d2681c0dd437","slug":"illegal-plotting-leads-to-unplanned-development-and-a-revenue-loss-of-crores-barabanki-news-c-315-lu11010-175576-2026-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: अवैध प्लॉटिंग से अनियोजित विकास संग करोड़ों का राजस्व नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: अवैध प्लॉटिंग से अनियोजित विकास संग करोड़ों का राजस्व नुकसान
Thu, 30 Jul 2026 01:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 30 Jul 2026 01:24 AM IST
विज्ञापन
अवैध प्लॉटिंग से अनियोजित विकास संग करोड़ों का राजस्व नुकसान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाराबंकी। अवैध प्लॉटिंग करने वाले शहर का नक्शा बिगाड़ने के साथ करोड़ों रुपये राजस्व का भी नुकसान कर रहे हैं। प्लॉट खरीदने वाले लोगों को जमीन की हकीकत नहीं बताई जाती है। प्रॉपर्टी डीलर स्टांप और विकास शुल्क बचाने के लिए नियमों का उल्लंघन करते हैं।
प्रशासन अवैध प्लाटिंग के रूप में भूखंड को चिह्नित कर कार्रवाई करता है तो नोटिस सीधे किसान के पास जाता है। कार्रवाई से प्रापर्टी डीलर बच जाते हैं। वहीं अनियोजित कॉलोनियां बनीं तो आने वाले समय में बिजली, पानी और सड़क की समस्या खड़ी हो जाएगी।
उप निबंधक कार्यालय नवाबगंज में प्रतिदिन औसतन 110 दस्तावेज पंजीकृत होते हैं। इनसे 80 लाख से एक करोड़ रुपये तक का राजस्व स्टांप शुल्क के रूप में मिलता है। इनमें से 75 फीसदी दस्तावेज आवास बनाने के लिए प्लॉट की खरीद-फरोख्त के होते हैं। इन प्लॉटों में से 50 फीसदी अवैध प्लॉटिंग स्थलों के होते हैं।
विज्ञापन
प्रॉपर्टी डीलर पहले फर्म की ओर से बैनामा करने की बात कहते हैं। बाद में वे बैनामा सीधे किसान से कराते हैं, जिससे स्टांप शुल्क खरीदार को चुकाना पड़ता। प्लॉट पहले फर्म के नाम खरीदा जाए तो स्टांप शुल्क का राजस्व दो गुना प्राप्त हो सकता है।
फर्म को वैध मानचित्र स्वीकृत कराने पर चार फीसदी विकास शुल्क भी देना होगा। यह पैसा प्रॉपर्टी डीलर डकार रहे हैं, जिससे सरकार की आमदनी कम होती है।
अवैध प्लॉटिंग के क्षेत्र--
लखनऊ-अयोध्या मार्ग के अलावा जिला मुख्यालय से देवा रोड, ग्वारी रोड और चिनहट-देवा रोड अवैध प्लॉटिंग की गिरफ्त में हैं। देवा-चिनहट मार्ग पर माती में एक विश्वविद्यालय के आसपास जमीनों की कीमत काफी बढ़ी है। इस मार्ग पर कुछ नामचीन कंपनियों की वैध प्लॉटिंग भी है। राजस्व विभाग के अनुसार, उनमें भी कुछ ने नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया है।
दो साल में तीन गुना बढ़े जमीनों के दाम
कुर्सी-लखनऊ मार्ग के चौड़ीकरण से कुर्सी के अमरसंडा में औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहा है। लखनऊ की सीमा बेहटा से महमूदाबाद तक जमीनों पर प्रॉपर्टी डीलरों की नजर है। पिछले दो साल में इन जमीनों की कीमत तीन गुना तक बढ़ गई है। लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के मध्य की जमीन भी काफी उपयोगी हो गई है।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व निरंकार सिंह ने कहा कि फर्म के नाम रजिस्ट्री न कराकर सीधे किसान से प्लॉट बिकवाने वाले बिचौलियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
प्रशासन अवैध प्लाटिंग के रूप में भूखंड को चिह्नित कर कार्रवाई करता है तो नोटिस सीधे किसान के पास जाता है। कार्रवाई से प्रापर्टी डीलर बच जाते हैं। वहीं अनियोजित कॉलोनियां बनीं तो आने वाले समय में बिजली, पानी और सड़क की समस्या खड़ी हो जाएगी।
विज्ञापन
उप निबंधक कार्यालय नवाबगंज में प्रतिदिन औसतन 110 दस्तावेज पंजीकृत होते हैं। इनसे 80 लाख से एक करोड़ रुपये तक का राजस्व स्टांप शुल्क के रूप में मिलता है। इनमें से 75 फीसदी दस्तावेज आवास बनाने के लिए प्लॉट की खरीद-फरोख्त के होते हैं। इन प्लॉटों में से 50 फीसदी अवैध प्लॉटिंग स्थलों के होते हैं।
विज्ञापन
प्रॉपर्टी डीलर पहले फर्म की ओर से बैनामा करने की बात कहते हैं। बाद में वे बैनामा सीधे किसान से कराते हैं, जिससे स्टांप शुल्क खरीदार को चुकाना पड़ता। प्लॉट पहले फर्म के नाम खरीदा जाए तो स्टांप शुल्क का राजस्व दो गुना प्राप्त हो सकता है।
फर्म को वैध मानचित्र स्वीकृत कराने पर चार फीसदी विकास शुल्क भी देना होगा। यह पैसा प्रॉपर्टी डीलर डकार रहे हैं, जिससे सरकार की आमदनी कम होती है।
अवैध प्लॉटिंग के क्षेत्र
लखनऊ-अयोध्या मार्ग के अलावा जिला मुख्यालय से देवा रोड, ग्वारी रोड और चिनहट-देवा रोड अवैध प्लॉटिंग की गिरफ्त में हैं। देवा-चिनहट मार्ग पर माती में एक विश्वविद्यालय के आसपास जमीनों की कीमत काफी बढ़ी है। इस मार्ग पर कुछ नामचीन कंपनियों की वैध प्लॉटिंग भी है। राजस्व विभाग के अनुसार, उनमें भी कुछ ने नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया है।
दो साल में तीन गुना बढ़े जमीनों के दाम
कुर्सी-लखनऊ मार्ग के चौड़ीकरण से कुर्सी के अमरसंडा में औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहा है। लखनऊ की सीमा बेहटा से महमूदाबाद तक जमीनों पर प्रॉपर्टी डीलरों की नजर है। पिछले दो साल में इन जमीनों की कीमत तीन गुना तक बढ़ गई है। लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के मध्य की जमीन भी काफी उपयोगी हो गई है।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व निरंकार सिंह ने कहा कि फर्म के नाम रजिस्ट्री न कराकर सीधे किसान से प्लॉट बिकवाने वाले बिचौलियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।