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Barabanki News: बच्चों की सुरक्षा पर लापरवाही का ओवरलोड
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 11 Apr 2026 12:48 AM IST
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बाराबंकी। परिवहन विभाग के दावे कागजों पर गुलाबी हैं, लेकिन सड़कों पर हकीकत का रंग खूनी नजर आ रहा है। स्कूलों की लग्जरी बिल्डिंगों के पीछे छिपा यह काला सच शुक्रवार दोपहर उस वक्त बेनकाब हो गया, जब मासूमों को स्कूल वैन और बसों में भेड़-बकरियों की तरह ठूंसकर ले जाते देखा गया। नियम-कायदे ट्रैफिक के शोर में कहीं दब गए हैं और बच्चों की सुरक्षा महज एक कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि कैसे चंद रुपयों के लालच में मासूम जिंदगियों को ओवरलोडिंग कर बिठाया जा रहा है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। शासन-प्रशासन की लापरवाही से मासूम जिंदगियों से किया जा रहा यह खिलवाड़ सिस्टम की संवेदनहीनता की गवाही दे रहा है।
दोपहर करीब एक बजे बजे एक वैन जिसकी क्षमता महज आठ बच्चों की थी, उसमें 14 बच्चों को किसी तरह बैठाया गया था। बच्चे एक-दूसरे से चिपके, सांस लेने तक की जगह नहीं। इन सबसे ड्राइवर बेफिक्र दिखाई दिया। यह सिर्फ एक इलाके की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।
सीट बेल्ट, न सुरक्षा का कोई इंतजाम
ड्राइवर की बगल वाली सीट पर तीन-तीन बच्चे बैठे हुए थे। न कोई सीट बेल्ट, न सुरक्षा का कोई इंतजाम। ई रिक्शा के ऊपर बच्चों के बैग रखे थे और ई रिक्शा में बच्चे ठूंस कर भर गए थे। यह ई रिक्शा पटेल तिराहा, नाका चौराहा होते निकल गया। न किसी ने रोका, न किसी ने टोका।
ग्रिल गायब, बच्चों की जान से खिलवाड़
कई वैनों में खिड़कियों पर लगी सुरक्षा ग्रिल गायब मिली। मुंशी गंज में शुकवार दोपहर एक स्कूली वैन जिसमें ग्रिल नहीं थी, बच्चों को उतार कर जा रही थी। ग्रिल न होने से बच्चे खिड़की से झांकते हैं। यह स्थिति बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है।
कमाई की अंधी दौड़, बच्चों की सुरक्षा बेपटरी
ड्राइवर ज्यादा कमाई के लालच में नियमों को कुचल रहे हैं। एक फेरे में ज्यादा बच्चे भरकर मुनाफा बढ़ाने का खेल खुलेआम जारी है। लेकिन हैरानी की बात न ट्रैफिक पुलिस की नजर, न स्कूल प्रशासन की चिंता। प्रमुख चौराहाें से ऐसे स्कूली वाहन धड़ल्ले से निकल रहे हैं।
एआरटीओ प्रशासन अंकिता शुक्ला ने बताया कि स्कूली वाहनों के रख रखाव के साथ नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है। सभी विद्यालयों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों को स्कूली वैन व बसों को दुरुस्त और फिट रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी विद्यालयों में कितने वाहन है और किस स्थिति में इसका डाटा जांच कर फीड किया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि कैसे चंद रुपयों के लालच में मासूम जिंदगियों को ओवरलोडिंग कर बिठाया जा रहा है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। शासन-प्रशासन की लापरवाही से मासूम जिंदगियों से किया जा रहा यह खिलवाड़ सिस्टम की संवेदनहीनता की गवाही दे रहा है।
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दोपहर करीब एक बजे बजे एक वैन जिसकी क्षमता महज आठ बच्चों की थी, उसमें 14 बच्चों को किसी तरह बैठाया गया था। बच्चे एक-दूसरे से चिपके, सांस लेने तक की जगह नहीं। इन सबसे ड्राइवर बेफिक्र दिखाई दिया। यह सिर्फ एक इलाके की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।
सीट बेल्ट, न सुरक्षा का कोई इंतजाम
ड्राइवर की बगल वाली सीट पर तीन-तीन बच्चे बैठे हुए थे। न कोई सीट बेल्ट, न सुरक्षा का कोई इंतजाम। ई रिक्शा के ऊपर बच्चों के बैग रखे थे और ई रिक्शा में बच्चे ठूंस कर भर गए थे। यह ई रिक्शा पटेल तिराहा, नाका चौराहा होते निकल गया। न किसी ने रोका, न किसी ने टोका।
ग्रिल गायब, बच्चों की जान से खिलवाड़
कई वैनों में खिड़कियों पर लगी सुरक्षा ग्रिल गायब मिली। मुंशी गंज में शुकवार दोपहर एक स्कूली वैन जिसमें ग्रिल नहीं थी, बच्चों को उतार कर जा रही थी। ग्रिल न होने से बच्चे खिड़की से झांकते हैं। यह स्थिति बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है।
कमाई की अंधी दौड़, बच्चों की सुरक्षा बेपटरी
ड्राइवर ज्यादा कमाई के लालच में नियमों को कुचल रहे हैं। एक फेरे में ज्यादा बच्चे भरकर मुनाफा बढ़ाने का खेल खुलेआम जारी है। लेकिन हैरानी की बात न ट्रैफिक पुलिस की नजर, न स्कूल प्रशासन की चिंता। प्रमुख चौराहाें से ऐसे स्कूली वाहन धड़ल्ले से निकल रहे हैं।
एआरटीओ प्रशासन अंकिता शुक्ला ने बताया कि स्कूली वाहनों के रख रखाव के साथ नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है। सभी विद्यालयों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों को स्कूली वैन व बसों को दुरुस्त और फिट रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी विद्यालयों में कितने वाहन है और किस स्थिति में इसका डाटा जांच कर फीड किया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।