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Barabanki News: दस गुना बढ़ गए मरीज, नहीं बढ़ा मैनपॉवर
Fri, 31 Jul 2026 02:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:11 AM IST
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बाराबंकी जिला अस्पताल
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बाराबंकी। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन डॉक्टरों की संख्या 50 साल पहले जितनी थी आज भी उतनी है। ये अलग बात हैं कि संसाधन और सुविधाएं बढ़ी हैं पर चिकित्सकों और पैरामेडिकल की संख्या न बढ़ाए जाने से मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती है और प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर परचा थमा दिया जाता है।
जिला अस्पताल की शुरूआत 1852 में हुई थी तब चिकित्सकों के पदों की संख्या 18 बताई जा रही है। इसके बाद पदों की संख्या बढ़ाकर 29 कर दी गई। पिछले 50 साल से एक भी पद नहीं बढ़ा बल्कि स्वीकृत पदों में से 8 पद अभी भी खाली पड़े हैं। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टॉफ भी आवश्यकता के अनुरूप नहीं है।
यहां पर संविदा व प्रशिक्षुओं के सहारे काम चलाया जा रहा है। यहां की ओपीडी 1400 से 1600 की पहुंच गई है। जनवरी से अब तक यहां पर करीब 2,50,875 मरीज देखे जा चुके हैं। वहीं इमरजेंसी में 49017 मरीज देखे गए और 20783 मरीजों को भर्ती किया गया। 40665 मरीजों के एक्सरे किए गए और 6866 की अल्ट्रासाउंड की जांच की गई। वहीं 1045137 की ब्लड जांच की गई और 2613 यूनिट ब्लड की आपूर्ति की गई। वहीं प्रतिदिन 10 से 15 मरीजों को रेफर किया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज की दरकार
मरीजों की बढ़ती संख्या और सुविधाओं की कमी को देखते हुए जिले में एक मेडिकल कॉलेज की आवश्यकता महसूस की जा रही है। एक मेडिकल कॉलेज से न केवल चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि बेहतर चिकित्सा सुविधाएं भी मिलेंगी। यह जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा। इससे स्थानीय मरीजों को रेफर होने की समस्या से राहत मिलेगी।
जिला अस्पताल में मौजूदा स्टॉफ, उपलब्ध संसाधनों से मरीजों को बेहतर उपचार देने का प्रयास किया जाता है। अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मियों के पद बढ़ाने तथा अस्पताल को 500 बेड का करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
डॉ. जेपी मौर्य, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल की शुरूआत 1852 में हुई थी तब चिकित्सकों के पदों की संख्या 18 बताई जा रही है। इसके बाद पदों की संख्या बढ़ाकर 29 कर दी गई। पिछले 50 साल से एक भी पद नहीं बढ़ा बल्कि स्वीकृत पदों में से 8 पद अभी भी खाली पड़े हैं। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टॉफ भी आवश्यकता के अनुरूप नहीं है।
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यहां पर संविदा व प्रशिक्षुओं के सहारे काम चलाया जा रहा है। यहां की ओपीडी 1400 से 1600 की पहुंच गई है। जनवरी से अब तक यहां पर करीब 2,50,875 मरीज देखे जा चुके हैं। वहीं इमरजेंसी में 49017 मरीज देखे गए और 20783 मरीजों को भर्ती किया गया। 40665 मरीजों के एक्सरे किए गए और 6866 की अल्ट्रासाउंड की जांच की गई। वहीं 1045137 की ब्लड जांच की गई और 2613 यूनिट ब्लड की आपूर्ति की गई। वहीं प्रतिदिन 10 से 15 मरीजों को रेफर किया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज की दरकार
मरीजों की बढ़ती संख्या और सुविधाओं की कमी को देखते हुए जिले में एक मेडिकल कॉलेज की आवश्यकता महसूस की जा रही है। एक मेडिकल कॉलेज से न केवल चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि बेहतर चिकित्सा सुविधाएं भी मिलेंगी। यह जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा। इससे स्थानीय मरीजों को रेफर होने की समस्या से राहत मिलेगी।
जिला अस्पताल में मौजूदा स्टॉफ, उपलब्ध संसाधनों से मरीजों को बेहतर उपचार देने का प्रयास किया जाता है। अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मियों के पद बढ़ाने तथा अस्पताल को 500 बेड का करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
डॉ. जेपी मौर्य, सीएमएस, जिला अस्पताल