{"_id":"6a3049dbf410bc1019083f7b","slug":"prescription-prepared-in-an-hour-and-a-half-treatment-received-after-two-hours-barabanki-news-c-315-1-slko1014-171172-2026-06-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: डेढ़ घंटे में बना परचा, दो घंटे बाद मिला इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: डेढ़ घंटे में बना परचा, दो घंटे बाद मिला इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 16 Jun 2026 12:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बाराबंकी। जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजाें को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। सोमवार को परचा बनवाने के लिए सुबह आठ बजे से ही मरीजों की कतारें लगने लगी। डेढ़ घंटे की धक्का मुक्की के बाद जाकर परचा बना सका। वहीं भीड़ इतनी ज्यादा रही कि कई मरीजों का परचा ही बन सका इससे वह बिना इलाज के ही वापस लौट गए।
जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को 1829 मरीज देखे गए। इलाज के लिए आए कई मरीजों, जैसे महादेव, माता प्रसाद, रासिद, शकीना और केशव ने अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि पर्चा बनवाने के लिए वे सुबह करीब आठ बजे ही अस्पताल पहुंचकर लाइन में लग गए थे। डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कहीं जाकर उनका पर्चा बन सका। यह दर्शाता है कि पर्चा काउंटर पर भी भीड़ का दबाव कितना अधिक है, जिससे मरीजों का बहुमूल्य समय व्यर्थ हो जाता है।
पर्चा बनने के बाद भी मरीजों की परेशानी कम नहीं होती। मरीजों के अनुसार, डॉक्टर को दिखाने में करीब दो घंटे का अतिरिक्त समय लग गया। यह लंबा इंतजार न केवल मरीजों के शारीरिक कष्ट को बढ़ाता है, बल्कि उनकी मानसिक पीड़ा को भी बढ़ाता है। दवा काउंटर पर भी एक घंटे तक लाइन में लगे रहने के बाद ही मरीजों को दवा मिल पाती है। इस प्रकार, सुबह जल्दी आकर भी मरीजों को पूरा दिन अस्पताल में बिताना पड़ता है, जो कामकाजी लोगों और दूर-दराज से आने वाले मरीजों के लिए विशेष रूप से कठिन होता है।
विज्ञापन
सर्दी, जुकाम, बुखार: 407
हड्डी रोग: 281 मरीज
त्वचा रोग: 387 मरीज
पेट दर्द: 207 मरीज
बदन दर्द: 401 मरीज
नेत्र रोग: 109 मरीज
मौसम में उतार चढ़ाव की वजह से अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सभी को बेहतर इलाज मिले इसका पूरा प्रयास किया जाता है।
डॉ. जेपी मौर्य, सीएमएस जिला अस्पताल
जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को 1829 मरीज देखे गए। इलाज के लिए आए कई मरीजों, जैसे महादेव, माता प्रसाद, रासिद, शकीना और केशव ने अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि पर्चा बनवाने के लिए वे सुबह करीब आठ बजे ही अस्पताल पहुंचकर लाइन में लग गए थे। डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कहीं जाकर उनका पर्चा बन सका। यह दर्शाता है कि पर्चा काउंटर पर भी भीड़ का दबाव कितना अधिक है, जिससे मरीजों का बहुमूल्य समय व्यर्थ हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पर्चा बनने के बाद भी मरीजों की परेशानी कम नहीं होती। मरीजों के अनुसार, डॉक्टर को दिखाने में करीब दो घंटे का अतिरिक्त समय लग गया। यह लंबा इंतजार न केवल मरीजों के शारीरिक कष्ट को बढ़ाता है, बल्कि उनकी मानसिक पीड़ा को भी बढ़ाता है। दवा काउंटर पर भी एक घंटे तक लाइन में लगे रहने के बाद ही मरीजों को दवा मिल पाती है। इस प्रकार, सुबह जल्दी आकर भी मरीजों को पूरा दिन अस्पताल में बिताना पड़ता है, जो कामकाजी लोगों और दूर-दराज से आने वाले मरीजों के लिए विशेष रूप से कठिन होता है।
सर्दी, जुकाम, बुखार: 407
हड्डी रोग: 281 मरीज
त्वचा रोग: 387 मरीज
पेट दर्द: 207 मरीज
बदन दर्द: 401 मरीज
नेत्र रोग: 109 मरीज
मौसम में उतार चढ़ाव की वजह से अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सभी को बेहतर इलाज मिले इसका पूरा प्रयास किया जाता है।
डॉ. जेपी मौर्य, सीएमएस जिला अस्पताल