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Barabanki News: बचपन डे केयर सेंटर में दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई संग थेरेपी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 13 Jun 2026 01:52 AM IST
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बाराबंकी। जिले के दिव्यांग और मानसिक रूप से कमजोर नौनिहालों के जीवन में अब खुशियों का नया सवेरा होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव हेमंत राव की ओर से हरी झंडी के बाद जिले में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से बचपन डे केयर सेंटर की स्थापना की कवायद तेज हो गई है। इस योजना के तहत तीन से सात वर्ष तक के विशेष बच्चों को न सिर्फ मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा बल्कि खेल-खेल में उन्हें सामान्य स्कूलों के लायक तैयार किया जाएगा।
इस अनूठे सेंटर की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाईटेक और बाधारहित व्यवस्था होगी। सरकार की कार्ययोजना के मुताबिक, सेंटर में आने वाले हर 12 बच्चों पर एक मुफ्त वाहन वैन या जीप की सुविधा मिलेगी, जो उन्हें घर से स्कूल लाएगी और छोड़ेगी। इसके अलावा बच्चों को दोपहर में मुफ्त पोषक आहार मिड-डे मील, गर्मी और सर्दी की मुफ्त यूनिफॉर्म, ब्रेल किट, श्रवण यंत्र और जरूरी पाठ्य सामग्री भी मुफ्त दी जाएगी। सुरक्षा के लिहाज से पूरा परिसर सीसीटीवी कैमरों और बायोमीट्रिक मशीनों से लैस होगा।
एक छत के नीचे मिलेंगे विशेष शिक्षक और थेरेपिस्ट
सेंटर की कुल क्षमता 80 बच्चों की होगी, जिसमें श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित, बौद्धिक अधिगमता और मानसिक मंदित श्रेणी के 20-20 बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। इन बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए विशेष शिक्षकों (स्पेशल एजुकेटर) के साथ-साथ फिजियोथेरेपिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट की तैनाती होगी। सेंटर में कुल सात हाईटेक कक्ष होंगे, जिसमें थेरेपी के लिए दो विशेष रूम रिजर्व रखे गए हैं।
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पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलेगा प्रवेश
इस सेंटर में प्रवेश की प्रक्रिया पहले आओ, पहले पाओ के सिद्धांत पर आधारित होगी। सत्र की शुरुआत में ही माता-पिता या कानूनी अभिभावक की लिखित सहमति और सीएमओ की ओर से जारी न्यूनतम 40 फीसदी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर ही तीन से सात वर्ष के बच्चों को निशुल्क दाखिला मिल सकेगा। इसके लिए शिक्षकों से सर्वे भी कराया जाएगा।
इस सेंटर की खास बात यह होगी कि यह अप्रैल से सितंबर तक सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक और अक्तूबर से मार्च तक सुबह 10:30 से दोपहर दो बजे तक चलेगा। बच्चों के व्यवहार को समझने के लिए हर तीन महीने में पैरेंट्स-टीचर मीटिंग होगी और माता-पिता को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
चार महीने में शुरू हो जाएगा स्कूल
जिले में बचपन डे केयर सेंटर को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। चार माह के भीतर यह स्कूल पूरी तरह संचालित हो जाएगा। फिलहाल तात्कालिक रूप से स्कूल शुरू करने के लिए किसी उपयुक्त शासकीय भवन (सरकारी बिल्डिंग) की तलाश की जा रही है। इसके साथ ही भविष्य में सेंटर के अपने खुद के स्थायी भवन निर्माण के लिए जमीन तलाशने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।
- एजाजुल हक, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी
इस अनूठे सेंटर की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाईटेक और बाधारहित व्यवस्था होगी। सरकार की कार्ययोजना के मुताबिक, सेंटर में आने वाले हर 12 बच्चों पर एक मुफ्त वाहन वैन या जीप की सुविधा मिलेगी, जो उन्हें घर से स्कूल लाएगी और छोड़ेगी। इसके अलावा बच्चों को दोपहर में मुफ्त पोषक आहार मिड-डे मील, गर्मी और सर्दी की मुफ्त यूनिफॉर्म, ब्रेल किट, श्रवण यंत्र और जरूरी पाठ्य सामग्री भी मुफ्त दी जाएगी। सुरक्षा के लिहाज से पूरा परिसर सीसीटीवी कैमरों और बायोमीट्रिक मशीनों से लैस होगा।
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एक छत के नीचे मिलेंगे विशेष शिक्षक और थेरेपिस्ट
सेंटर की कुल क्षमता 80 बच्चों की होगी, जिसमें श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित, बौद्धिक अधिगमता और मानसिक मंदित श्रेणी के 20-20 बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। इन बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए विशेष शिक्षकों (स्पेशल एजुकेटर) के साथ-साथ फिजियोथेरेपिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट की तैनाती होगी। सेंटर में कुल सात हाईटेक कक्ष होंगे, जिसमें थेरेपी के लिए दो विशेष रूम रिजर्व रखे गए हैं।
पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलेगा प्रवेश
इस सेंटर में प्रवेश की प्रक्रिया पहले आओ, पहले पाओ के सिद्धांत पर आधारित होगी। सत्र की शुरुआत में ही माता-पिता या कानूनी अभिभावक की लिखित सहमति और सीएमओ की ओर से जारी न्यूनतम 40 फीसदी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर ही तीन से सात वर्ष के बच्चों को निशुल्क दाखिला मिल सकेगा। इसके लिए शिक्षकों से सर्वे भी कराया जाएगा।
इस सेंटर की खास बात यह होगी कि यह अप्रैल से सितंबर तक सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक और अक्तूबर से मार्च तक सुबह 10:30 से दोपहर दो बजे तक चलेगा। बच्चों के व्यवहार को समझने के लिए हर तीन महीने में पैरेंट्स-टीचर मीटिंग होगी और माता-पिता को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
चार महीने में शुरू हो जाएगा स्कूल
जिले में बचपन डे केयर सेंटर को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। चार माह के भीतर यह स्कूल पूरी तरह संचालित हो जाएगा। फिलहाल तात्कालिक रूप से स्कूल शुरू करने के लिए किसी उपयुक्त शासकीय भवन (सरकारी बिल्डिंग) की तलाश की जा रही है। इसके साथ ही भविष्य में सेंटर के अपने खुद के स्थायी भवन निर्माण के लिए जमीन तलाशने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।
- एजाजुल हक, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी