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Bareilly News: अधोमानक मावा बेचने पर अजंता स्वीट्स पर चार लाख का जुर्माना, 30 दिन में जमा करने होगी रकम
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 03:04 AM IST
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सार
बरेली में अधोमानक मावा बेचने पर अजंता स्वीट्स पर चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह रकम 30 दिन में जमा करनी होगी। ऐसा न करने पर भू-राजस्व की तरह वसूली का आदेश दिया गया है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Adobe Graphics (अमर उजाला ग्राफिक्स)
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विस्तार
बरेली में अधोमानक मावा बेचने पर अपर जिलाधिकारी (नगर) की कोर्ट ने शुक्रवार को अजंता स्वीट्स पर चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। 30 दिन में रकम जमा नहीं करने पर भू-राजस्व की तरह वसूली का आदेश दिया है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल प्रताप सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, एक मई 2025 को डोहरा रोड अजंता स्वीट्स का निरीक्षण किया। उस समय परिसर में मौजूद महाप्रबंधक हरप्रीत सिंह से पूछताछ की गई। जांच के दौरान परिसर में बिक्री के लिए रखा करीब 90 किलो मावा पाया गया। उसकी गुणवत्ता पर संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने एक किलो मावा 300 रुपये देकर खरीदा। इसके बाद नमूने को जांच के लिए झांसी भेज दिया।
15 मई 2025 को प्राप्त जांच रिपोर्ट में पता चला कि मावे में प्रयुक्त दूध में वसा की मात्रा 30 फीसदी से भी कम थी। इससे स्पष्ट हुआ कि उत्पाद खाद्य गुणवत्ता के तय मानकों पर खरा नहीं उतरा। मामले में अदालत की ओर से कंपनी को सूचना भेजी गई। कंपनी की ओर से न तो कोई आपत्ति प्रस्तुत की गई, न ही कोई साक्ष्य दिया गया। इसके बाद अदालत ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर फैसला सुना दिया।
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खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल प्रताप सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, एक मई 2025 को डोहरा रोड अजंता स्वीट्स का निरीक्षण किया। उस समय परिसर में मौजूद महाप्रबंधक हरप्रीत सिंह से पूछताछ की गई। जांच के दौरान परिसर में बिक्री के लिए रखा करीब 90 किलो मावा पाया गया। उसकी गुणवत्ता पर संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने एक किलो मावा 300 रुपये देकर खरीदा। इसके बाद नमूने को जांच के लिए झांसी भेज दिया।
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15 मई 2025 को प्राप्त जांच रिपोर्ट में पता चला कि मावे में प्रयुक्त दूध में वसा की मात्रा 30 फीसदी से भी कम थी। इससे स्पष्ट हुआ कि उत्पाद खाद्य गुणवत्ता के तय मानकों पर खरा नहीं उतरा। मामले में अदालत की ओर से कंपनी को सूचना भेजी गई। कंपनी की ओर से न तो कोई आपत्ति प्रस्तुत की गई, न ही कोई साक्ष्य दिया गया। इसके बाद अदालत ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर फैसला सुना दिया।