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Bareilly News: अवैध कब्जेदारों पर बीडीए सख्त, शहर की जमीनों का ऑडिट शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 04 May 2026 01:16 AM IST
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जमीनों के दुरुपयोग और अवैध कब्जों को रोकने के लिए बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने मास्टर प्लान 2031 के प्रभावी होते ही ग्रीन बेल्ट, पार्कों, नजूल और नदी किनारे की जमीनों का ऑडिट शुरू किया है। इसका उद्देश्य सरकारी और संरक्षित जमीनों पर हो रहे कब्जे को रोकना और योजनागत भूमि को भू-माफिया के चंगुल से मुक्त कराना है।
प्राधिकरण की इस नई रणनीति के तहत उन सभी भूखंडों का सत्यापन किया जा रहा है जो मास्टर प्लान में सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित हैं। बीडीए की ओर बताया कि जो जमीनें पार्क, हरित पट्टी या क्रीड़ा स्थल के लिए चिह्नित हैं, उन पर किसी भी प्रकार का निर्माण या खरीद-फरोख्त अवैध माना जाएगा। रजिस्ट्रार कार्यालय से यह पता लगाया जा रहा है कि संरक्षित श्रेणी की जमीनों को किन लोगों ने बेचा और किन खरीदारों को झांसा दिया गया। इसके आधार पर अवैध लेनदेन में शामिल कॉलोनाइजरों और कब्जाधारियों की सूची तैयार की जा रही है, जिन पर जल्द ही कार्रवाई होनी तय है।
बीडीए ने मास्टर प्लान के अंतर्गत चिह्नित जमीनों की रजिस्ट्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही, शहर के बाहरी इलाकों में अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले सिंडिकेट पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। ऑडिट की इस प्रक्रिया में बंधक जमीनों के सत्यापन को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि किसी वित्तीय संस्थान या विभाग के पास गिरवी रखी गई भूमि को धोखाधड़ी से दोबारा न बेचा जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, इससे न केवल नियोजित विकास को गति मिलेगी, बल्कि आम जनता भी जमीन के नाम पर होने वाली ठगी से बच सकेगी।
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प्राधिकरण की इस नई रणनीति के तहत उन सभी भूखंडों का सत्यापन किया जा रहा है जो मास्टर प्लान में सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित हैं। बीडीए की ओर बताया कि जो जमीनें पार्क, हरित पट्टी या क्रीड़ा स्थल के लिए चिह्नित हैं, उन पर किसी भी प्रकार का निर्माण या खरीद-फरोख्त अवैध माना जाएगा। रजिस्ट्रार कार्यालय से यह पता लगाया जा रहा है कि संरक्षित श्रेणी की जमीनों को किन लोगों ने बेचा और किन खरीदारों को झांसा दिया गया। इसके आधार पर अवैध लेनदेन में शामिल कॉलोनाइजरों और कब्जाधारियों की सूची तैयार की जा रही है, जिन पर जल्द ही कार्रवाई होनी तय है।
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बीडीए ने मास्टर प्लान के अंतर्गत चिह्नित जमीनों की रजिस्ट्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही, शहर के बाहरी इलाकों में अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले सिंडिकेट पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। ऑडिट की इस प्रक्रिया में बंधक जमीनों के सत्यापन को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि किसी वित्तीय संस्थान या विभाग के पास गिरवी रखी गई भूमि को धोखाधड़ी से दोबारा न बेचा जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, इससे न केवल नियोजित विकास को गति मिलेगी, बल्कि आम जनता भी जमीन के नाम पर होने वाली ठगी से बच सकेगी।
