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Bareilly News: दीक्षा ने खुद को बीडीओ बताकर नौकरी दिलाने के नाम पर 21 लाख रुपये ठगे
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फर्जी आईएएस विप्रा और उसकी दो बहनों की ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ममेरी बहन दीक्षा पाठक ने खुद को बीडीओ बताकर सुभाषनगर निवासी भाई-बहन की नौकरी लगवाने के बहाने 21 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ितों के पिता ने तीनों बहनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
सुभाषनगर थाने में टीचर्स कॉलोनी नेकपुर निवासी रामनिवास ने इंस्पेक्टर सतीश चंद्र नैन को बताया कि उनकी बेटी मनोरमा के साथ पवन विहार निवासी दीक्षा पाठक पढ़ाई करती थी। इस कारण दीक्षा का घर आना-जाना था। जब मनोरमा की पढ़ाई पूरी हो गई तो दीक्षा से संपर्क भी खत्म हो गया। 2023 में दीक्षा पाठक ने सोशल मीडिया पर मनोरमा से संपर्क किया और बताया कि वह बीडीओ बन गई है। दीक्षा ने मनोरमा से पूछा कि तुम क्या कर रही हो तो मनोरमा ने बताया कि बीएससी नर्सिंग कर लिया है। दीक्षा ने बताया कि मैं सरकारी नौकरी लगवा दूंगी। मेरी बहन विप्रा शर्मा एसडीएम हैं, उनकी सरकारी विभागों में अच्छी पकड़ है। उसी ने मुझे बीडीओ की नौकरी दिलवाई है।
सोशल मीडिया पर विप्रा के फोटो भी दिखाए। मनोरमा ने पिता रामनिवास को इस बारे में बताया तो वह नौकरी लगवाने के लिए राजी हो गए। दीक्षा ने विप्रा शर्मा और शिखा शर्मा से उनकी बात कराई। विप्रा ने मनोरमा और उसके भाई की नौकरी लगवाने के लिए 25 लाख रुपये की मांग की। रामनिवास ने अलग-अलग तारीखों पर 1950000 रुपये विप्रा को दिए और डेढ़ लाख रुपये नीली बत्ती की कार से आई तो दिए। विप्रा के गैंग ने फर्जी नियुक्ति पत्र भेजे।
महंगी कारों से रौब झाड़ती थीं बहनें
- रामनिवास ने बताया कि एक नियुक्ति पत्र पर उप्र लोक सेवा आयोग प्रयागराज लिखा था, जबकि दूसरे पर संघ लोक सेवा आयोग नई दिल्ली के सचिव डॉक्टर रचना शाह के फर्जी हस्ताक्षर थे। काफी दिनों तक विप्रा और उसकी बहने भ्रमित करती रहीं। महंगी कारों से आकर रौब झाड़ती थीं। 27 अप्रैल को जब तीनों बहनों का गैंग ठगी में पकड़ा गया तो रामनिवास को ठगी का अहसास हुआ। रामनिवास ने सुभाषनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाकर 21 लाख रुपये दिलाने की मांग की है। सुभाषनगर थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है, हालांकि बारादरी थाने के मामले में तीनों बहनों को जेल भेज दिया गया है।
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सुभाषनगर थाने में टीचर्स कॉलोनी नेकपुर निवासी रामनिवास ने इंस्पेक्टर सतीश चंद्र नैन को बताया कि उनकी बेटी मनोरमा के साथ पवन विहार निवासी दीक्षा पाठक पढ़ाई करती थी। इस कारण दीक्षा का घर आना-जाना था। जब मनोरमा की पढ़ाई पूरी हो गई तो दीक्षा से संपर्क भी खत्म हो गया। 2023 में दीक्षा पाठक ने सोशल मीडिया पर मनोरमा से संपर्क किया और बताया कि वह बीडीओ बन गई है। दीक्षा ने मनोरमा से पूछा कि तुम क्या कर रही हो तो मनोरमा ने बताया कि बीएससी नर्सिंग कर लिया है। दीक्षा ने बताया कि मैं सरकारी नौकरी लगवा दूंगी। मेरी बहन विप्रा शर्मा एसडीएम हैं, उनकी सरकारी विभागों में अच्छी पकड़ है। उसी ने मुझे बीडीओ की नौकरी दिलवाई है।
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सोशल मीडिया पर विप्रा के फोटो भी दिखाए। मनोरमा ने पिता रामनिवास को इस बारे में बताया तो वह नौकरी लगवाने के लिए राजी हो गए। दीक्षा ने विप्रा शर्मा और शिखा शर्मा से उनकी बात कराई। विप्रा ने मनोरमा और उसके भाई की नौकरी लगवाने के लिए 25 लाख रुपये की मांग की। रामनिवास ने अलग-अलग तारीखों पर 1950000 रुपये विप्रा को दिए और डेढ़ लाख रुपये नीली बत्ती की कार से आई तो दिए। विप्रा के गैंग ने फर्जी नियुक्ति पत्र भेजे।
महंगी कारों से रौब झाड़ती थीं बहनें
- रामनिवास ने बताया कि एक नियुक्ति पत्र पर उप्र लोक सेवा आयोग प्रयागराज लिखा था, जबकि दूसरे पर संघ लोक सेवा आयोग नई दिल्ली के सचिव डॉक्टर रचना शाह के फर्जी हस्ताक्षर थे। काफी दिनों तक विप्रा और उसकी बहने भ्रमित करती रहीं। महंगी कारों से आकर रौब झाड़ती थीं। 27 अप्रैल को जब तीनों बहनों का गैंग ठगी में पकड़ा गया तो रामनिवास को ठगी का अहसास हुआ। रामनिवास ने सुभाषनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाकर 21 लाख रुपये दिलाने की मांग की है। सुभाषनगर थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है, हालांकि बारादरी थाने के मामले में तीनों बहनों को जेल भेज दिया गया है।
