{"_id":"6a1760f6b9856653890adc01","slug":"diarrhea-attacks-are-escalating-with-a-30-bed-ward-receiving-46-childrenthey-are-being-treated-on-benches-bareilly-news-c-4-bly1053-893420-2026-05-28","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"डायरिया का हमला: बरेली में जिला अस्पताल के 30 बेड के वार्ड में 46 बच्चे भर्ती, बेंच पर भी हो रहा इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डायरिया का हमला: बरेली में जिला अस्पताल के 30 बेड के वार्ड में 46 बच्चे भर्ती, बेंच पर भी हो रहा इलाज
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2026 02:54 AM IST
विज्ञापन
सार
बरेली में भीषण गर्मी के बीच डायरिया का प्रकोप शुरू हो गया है। मासूम बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के 30 बेड के वार्ड में बुधवार को 46 बच्चे भर्ती रहे।
जिला अस्पताल में भर्ती बीमार बच्चे व तीमारदारी करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
बरेली में भीषण गर्मी का प्रकोप बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। जिला अस्पताल के 30 बेड के वार्ड में बुधवार को 46 बच्चे भर्ती रहे। एक बेड पर तीन बच्चों को लिटाना पड़ा। बेंच पर भी लिटाकर बच्चों का इलाज किया गया। सीएचसी पर भर्ती और इलाज की सुविधा होने के बावजूद बच्चों को रेफर करने पर जिला अस्पताल प्रशासन ने आपत्ति जताई है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, पारा सामान्य से दो-तीन डिग्री अधिक है। ऐसी स्थिति में जरा सी अनदेखी से बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। वार्ड में भर्ती बच्चों की संख्या 40 के पार पहुंचना गंभीर है। आशंका जताई कि बीते दिनों बारिश के बाद अब सीधी धूप धरती पर पड़ रही है। उष्मीय विकिरण से गर्म हवा के थपेड़े झुलसा रहे हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। दूषित खानपान बच्चों को बीमार बना रहा है। बेड भले ही भर गए हैं, लेकिन जो बच्चे गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं, उन्हें लौटा नहीं सकते। इलाज करना जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित के मुताबिक, सीएचसी पर गंभीर बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था होती है। जिन बच्चों का इलाज सीएचसी पर संभव है, उन्हें भी रेफर किया जा रहा है। बीते दिनों जिलाधिकारी और सीएमओ को मामले की जानकारी दी है।
Trending Videos
शुरुआती लक्षणों को नजरंदाज करना पड़ रहा भारी
विशेषज्ञ के मुताबिक, गर्मी में नमी वाले स्थानों पर बैक्टीरिया और वायरस का संक्रमण बढ़ता है। रोटा वायरस, ई कोलाई बैक्टीरिया दस्त की अहम वजह हैं। बच्चों का पाचन तंत्र पूरी त्र पूरा तरह विकसित न होने से संक्रमण का असर तेजी से फैलता है। शुरुआती लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ से परामर्श के बजाय खुद दवा खिलाने पर हालत बिगड़ने लगती है। बिना परामर्श बच्चों को सिर्फ ओआरएस घोल देना चाहिए।
बचाव के उपाय
- बच्चों को धूप में न निकलने दें। पानी या ओआरएस घोल पिलाते रहें।
- ढीले, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनाएं। साफ ताजा भोजन ही खिलाएं।
- सिर कपड़े, टोपी, छाते से ढंकें। खुले में रखे, मसालेदार भोजन न दें।
- दिनभर में चार बार से ज्यादा पतला दस्त आए तो डॉक्टर को दिखाएं।
- उल्टी, दस्त और बुखार हो तो इलाज में देर न करें। दौरे पड़ सकते हैं।
- बच्चों को सुबह नहलाएं। मिट्टी न खाने दें। साफ-सफाई का ध्यान दें।
दूध की बोतल गर्म पानी में उबालकर करें प्रयोग
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. करमेंद्र के मुताबिक, पांच साल से कम आयु के बच्चों में डायरिया की अहम वजह बासी, दूषित भोजन और पेयजल होता है। इसके अलावा गर्मियों में दूध की बोतल अच्छे से साफ न करने और रात में जाने-अनजाने खराब हुआ दूध पिलाने से पेट संबंधी दिक्कतें होने की आशंका है। सामान्य से अधिक तापमान होने पर रात में बोतल में रखा दूध फट जाता है। इसका सेवन नुकसानदेह होता है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. करमेंद्र के मुताबिक, पांच साल से कम आयु के बच्चों में डायरिया की अहम वजह बासी, दूषित भोजन और पेयजल होता है। इसके अलावा गर्मियों में दूध की बोतल अच्छे से साफ न करने और रात में जाने-अनजाने खराब हुआ दूध पिलाने से पेट संबंधी दिक्कतें होने की आशंका है। सामान्य से अधिक तापमान होने पर रात में बोतल में रखा दूध फट जाता है। इसका सेवन नुकसानदेह होता है।