LPG: बरेली के परिषदीय स्कूलों में गैस सिलिंडर खत्म, चूल्हे पर पक रहा मिडडे मील; परीक्षा के समय बढ़ी मुसीबत
एलपीजी किल्लत का असर बरेली के परिषदीय स्कूलों में भी दिखने लगा है। कई स्कूलों में सिलिंडर खत्म हो गए हैं। गैस सिलिंडर न मिलने से रसोइया लकड़ी जलाकर चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं।
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बरेली जनपद के परिषदीय विद्यालयों में इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत के कारण मध्याह्न भोजन योजना (मिडडे मील) पटरी से उतरती नजर आ रही है। होली के बाद से गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण रसोइया चूल्हे पर खाना बनाने को विवश हैं, जिससे न केवल धुएं और प्रदूषण की समस्या हो रही है, बल्कि समय पर भोजन तैयार करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं, जिसमें विद्यार्थियों की उपस्थिति लगभग शत-प्रतिशत है। जनपद के लगभग 3000 विद्यालयों में यह संकट बना हुआ है, जिससे प्रधानाध्यापक और रसोइया दोनों ही मानसिक दबाव में हैं।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए संगठन के मंडल अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने मुख्य विकास अधिकारी को मामले से अवगत कराया है। उन्होंने छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन से मांग की है कि मार्च 2026 के लिए प्रत्येक विद्यालय को तत्काल कम से कम दो गैस सिलिंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसी क्रम में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. विनीता ने भी जिला पूर्ति अधिकारी को पत्र लिखकर गैस एजेंसियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया है ताकि स्कूलों और स्वयंसेवी संस्थाओं (सेंट्रल किचन) को बिना किसी बाधा के गैस सिलिंडर मिल सकें और बच्चों का पोषण प्रभावित न हो।
बीएसए ने आपूर्ति बहाल करने के लिए लिखा पत्र
जनपद में पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना के तहत गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने से व्यवस्था चरमरा गई है। जिले के कुल 2618 विद्यालयों में एलपीजी के अभाव में लकड़ियों और चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा है। विशेष रूप से रामनगर और फरीदपुर विकास खंडों के साथ-साथ केंद्रीय किचन संचालित करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी गैस आपूर्ति में आ रही बाधा की लिखित शिकायत की है। वार्षिक परीक्षाओं के इस महत्वपूर्ण समय में, जब विद्यालयों में बच्चों की भारी भीड़ है, गैस न होने से मध्याह्न भोजन तैयार करने में काफी देरी और कठिनाई हो रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी को आधिकारिक पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जनपद के 2327 स्कूलों में रसोईघर में भोजन बनता है, जबकि 291 स्कूलों में स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से भोजन पहुंचाया जाता है।