UP: फिल्मों में तमीज नहीं परोसी जाती, बेकार बातों का होता है महिमामंडन, कैलाश खेर ने बॉलीवुड पर कसा तंज
अमर उजाला की संगीत संध्या शिवोहम के लिए बरेली आए सुविख्यात गायक पद्मश्री कैलाश खेर से पुष्पेंद्र त्रिपाठी ने खास बातचीत की। इस दौरान कैलाश खेर ने अपने जीवन और संगीत साधना से जुड़े अनुभव साझा किए। कहा कि यह धरती अचरजों से भरी हुई है। यह देश है अचंभों का, यहां अचरज पैदा होते हैं, जिनके करतब-कारनामों से मस्तक ऊंचे होते हैं।
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बरेली को नाथ नगरी के नाम से जाना जाता है, मगर फिल्मों ने बरेली को नाथनगरी कहकर प्रमोट नहीं किया। उन्होंने झुमका गिरा रे... जैसी सस्ती बात से बरेली का परिचय कराया। भगवान शिव के बारे में फिल्मों में कहा गया कि जय-जय शिव शंकर कांटा लगे ना कंकर प्याला तेरे नाम का पिया। कौन सा प्याला पिया...? मेरे शिव ने कटुताओं, जटिलताओं और कठिनाइयों जैसे जहर का प्रतीकात्मक प्याला पिया। ऐसे लोगों से मैं कहूंगा कि संभल जाओ। मेरे भारत को पवित्र रहने दो, जिम्मेदार बनो। फिल्मों में भी तमीज नहीं परोसी जाती है। बेकार की बातों का महिमामंडन किया जाता है। ये बातें विख्यात गायक कैलाश खेर ने बृहस्पतिवार को अमर उजाला से कहीं।
बरेली में अमर उजाला की ओर से आयोजित शिवोहम कार्यक्रम के लिए कैलाश खेर बरेली आए। उनसे पूछा गया कि आज का संगीत रील्स और ट्रेंड पर आधारित है। ऐसे में हिंदी फिल्मों में आध्यात्मिक संगीत कैसे टिक पाएगा। इस पर कैलाश खेर ने कहा कि रील्स और ट्रेंड का भले ही दौर चल रहा हो, लेकिन हमारी अच्छाई रहेगी तो अच्छे काम हमेशा ही होते रहेंगे। छिछोरी बातें सबको आकर्षित बहुत करती हैं। मनुष्य ऐसा है कि वह धूर्तता की तरफ बहुत आकर्षित होता है।
अच्छी फिल्में बनाने की हिम्मत जुटाएं फिल्मकार
ऐसे में फिल्मकारों का भी कर्तव्य है कि वह अच्छी फिल्म बनाने की हिम्मत जुटाएं। फिल्म एक ऐसा माध्यम है कि यदि आपका व्यक्तित्व चरित्र और जमीर हो तो आप यह तय कर लेंगे कि काम थोड़े से पैसे और शेष अपनी आत्मा के लिए करें। इससे समाज में सार्थक संदेश जाएगा। हमने अध्यात्म और उससे जुड़ा लेखन नहीं छोड़ा। दुनिया में कितनी भी रील्स और फिल्में आ जाएं, हम अपनी पवित्रता को नहीं छोड़ेंगे।
संगीत की साधना के लिए महज 14 वर्ष की उम्र में कैलाश खेर ने घर छोड़ दिया था। इसे लेकर उन्होंने कहा कि कुछ जीवन ऐसे होते हैं, जिनके उद्देश्य असामान्य होते हैं। ऐसे असामान्य उद्देश्यों वालों की यात्रा भी परमात्मा आसान करते हैं। चुनौतियां तो सामने आई, लेकिन उन सबको चीरकर ईश्वर और माता- पिता की कृपा से आगे बढ़ते रहे। अपने लक्ष्य को ध्यान में रख कर आगे बढ़े, सफलता जरूर मिलेगी।
तुमने उस्तादों से सीखा है, हमने हालातों से
मेरठ-दिल्ली का एक सामान्य लड़का ब्रांड कैलाश खेर कैसे बना। इसे लेकर उन्होंने कहा कि जो लोग जिद्दी, जुनूनी और उन्मत्त होते हैं, वह भारत के ऐसे-ऐसे अंचलों से आते हैं कि उसके बारे में लोगों को पता भी नहीं होता। हम आध्यात्मिक संगीत को फिल्मों तक पहुंचाना चाहते थे। जो टूट कर बना, जिसे मौत ने जना... उसको किसी की क्या चिंता...? हम एक तरफ अगड़ बम बबम... तो दूसरी ओर तेरी दीवानी लिख रहे थे। हम यह कह सकते हैं कि तुमने उस्तादों से सीखा है, हमने हालातों से।
उन्नतिशील देश होता है उन्नतिशील नौजवानों से
कैलाश खेर ने युवाओं के लिए कहा कि उन्नतिशील देश नहीं होता टैंक तोपों और विमानों से... उन्नतिशील देश होता है उन्नतिशील नौजवानों से...। युवा अपनी शक्ति, सामर्थ्य और सनातन जीवन शैली को समझें। उसका सार्थक उपयोग खुद और राष्ट्र के निर्माण के लिए करें। अपने समय का सदुपयोग करें और इस दुर्लभ मानव तन की सार्थकता सिद्ध करें।
सबसे रोमांटिक ईश्वर है, उससे प्रेम करें
हमारे देश में यज्ञ-अनुष्ठान हो रहे हैं, संतों की सेवा हो रही है। पुरुषार्थ और परमार्थ हो रहे हैं। यही सनातन जीवन शैली है। इसी वजह से इतनी बड़ी आबादी वाले देश में सब कुछ सामान्य तरीके से चलता रहता है। इसके दूसरी ओर भी देखिए... खुद को रोमांटिक बताने वाले लोग करोड़ों रुपये खर्च कर डेस्टिनेशन शादी करते हैं। फिर जल्द ही उनका तलाक भी हो जाता है। विवाह से अधिक तलाक के मामले परिवार न्यायालय में हैं। कारण कि सब कुछ झूठ और दिखावे की बुनियाद पर टिका था। सबसे बड़ा रोमांटिक हमारा ईश्वर है, उससे प्रेम करें।
