Bareilly: कुमार विश्वास ने ताजमहल पर कसा तंज, रामसेतु को बताया प्रेम का प्रतीक, दशरथ माझी की भी तारीफ
बरेली में प्रख्यात कथावाचक और कवि कुमार विश्वास ने रविवार शाम इंटरनेशनल सिटी में आयोजित अपने-अपने राम कार्यक्रम में लोगों को रामकथा सुनाई। उन्होंने रामकथा के प्रसंगों के जरिए नेताओं पर कटाक्ष किए। राम पर सवाल उठाने वालों को भी आड़े हाथ लिया।
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प्रख्यात कवि और कथावाचक कुमार विश्वास ने ताजमहल पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि ताज को प्रेम का प्रतीक कहा जाता है, लेकिन जब बंगाल में लोग भूख से मर रहे थे, उस समय एक शहंशाह ने लगान के पैसे से ताजमहल बनवाया था। उससे बड़ा प्रेम का प्रतीक तो बिहार का वह मजदूर है, जिसने एक चट्टान से गिरकर मरते हुए अपनी पत्नी को देखा, तो हथौड़ा उठाकर उस चट्टान के बीच से रास्ता बना डाला।
उन्होंने कहा कि दशरथ माझी मेरे लिए शहंशाह से बड़ा है। प्रेम का प्रतीक दिखाना है तो चट्टान के बीच बने उस रास्ते को दिखाइए। इसी प्रसंग को फिर उन्होंने रामकथा से जोड़ा। कहा कि अगर मैं विदेश से आने वाले मेहमानों को कुछ दिखाऊंगा तो धनुषकोटि के वह पत्थर दिखाऊंगा जहां राम ने समुद्र में पुल बनाया था, क्योंकि सीता तक पहुंचने के लिए राम की ओर से बनवाया गया वह पुल प्रेम और स्नेह का प्रतीक है।
राम पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लिया
राम और रामचरित मानस पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि राम पर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चला। बीच में रामनवमी पड़ गई तो कोर्ट में छुट्टी हो गई। मैं पूछता हूं कि राम नहीं हैं तो रामनवमी पर छुट्टी क्यों हुई।
उन्होंने कहा कि राम पर पहली बार शंका-संशय नहीं है। ऐसे अनेक प्रसंग आए। इंद्र के बेटे जयंत ने भी संशय किया था। इंद्र ने समझाया, लेकिन बालक नहीं माना। कौए का रूप धरा और देवी सीता के पैर में नोच लिया। तब राम ने एक तिनका उसकी ओर फेंका। जयंत आगे-आगे और तिनका पीछे-पीछे। तीनों लोक में जयंत घूमा, लेकिन कहीं आश्रय नहीं मिला। तब वह नारद की शरण में पहुंचा।
नारद ने कहा कि राम की शरण में जाने से ही मुक्ति मिलेगी। जयंत ने राम से अनुनय-विनय की। राम ने कहा- प्राण दान तो दे रहा हूं, पर एक आंख नहीं होगी। उसके बाद से ही कौए की दो आंखों में से सिर्फ एक में ही पुतली होती है। इस कथा प्रसंग के जरिये उन्होंने सत्ता के अंहकार चूर रहने वाले लोगों के पुत्रों के व्यवहार और आचरण का उल्लेख किया। बार-बार बोले- इंद्र के बेटे किसी की नहीं सुनते। राम और रामचरित मानस पर सवाल उठाने वाले भी जब मरेंगे तो उनके पीछे भी राम नाम सत्य है... की गूंज सुनाई देगी।