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Bareilly News: इलाज का अभाव जान पर भारी... हीमोफीलिया पीड़ित दो वर्षीय बच्चे की मौत
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माहभर में तीन की जा चुकी जान, हीमेटोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग
बरेली। आनुवंशिक बीमारी हीमोफीलिया से पीड़ित दो वर्षीय बच्चे की बृहस्पतिवार को मौत हो गई। इससे पूर्व माहभर में ही दो और लोगों की सांसें थम चुकी हैं। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज न मिलने से बच्चे की जान गई। उन्होंने हीमेटोलॉजिस्ट की तैनाती और जांच की व्यवस्था कराने की मांग की है।
किला के मुरावपुरा निवासी पंकज का दो वर्षीय बेटा कार्तिक के पिछले माह ही हीमोफीलिया फैक्टर-आठ से पीड़ित होने का पता चला। पिछले कुछ दिन से उसे पीलिया हुआ था। जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने पर केजीएमयू लखनऊ रेफर किया गया। बुधवार को वह वहां पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई।
जीवन रेखा हीमोफीलिया जनकल्याण समिति की संरक्षक रेखा रानी व अन्य लोगों ने घर पहुंचकर बिलखती मां और परिवार वालों को ढांढस बंधाया। इससे पूर्व तीन मार्च को जसौली जागीर निवासी 52 वर्षीय ओम प्रकाश की मौत हुई थी। उनके दिमाग में रक्तस्राव होने लगा था। 23 फरवरी को देवरनियां के ढकिया निवासी 38 वर्षीय राम किशोर की मौत हुई थी।
रोग की पहचान में देरी, मरीजों
को उचित परामर्श की समस्या
समिति संरक्षक रेखा रानी के मुताबिक जिला अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने, खून चढ़ाने और फैक्टर आठ लगाने की व्यवस्था तो है लेकिन मरीजों को परामर्श देने के लिए हीमैटोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। रोग की पहचान के लिए लक्षण मिलने पर जांच के लिए लखनऊ और दिल्ली भेजा जाता है। जबकि हीमोफीलिया की समय से पहचान और त्वरित इलाज से जीवन प्रत्याशा बढ़ती है।
अक्सर खत्म हो जाता है फैक्टर आठ
जिला अस्पताल में आए दिन हीमोफीलिया मरीजों को चढ़ने वाले फैक्टर आठ की कमी रहती है। रेखा रानी के मुताबिक फैक्टर कम होने पर ही अगर शासन से फैक्टर मिल जाएं तो मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रभारी एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित के मुताबिक फैक्टर आठ फिलहाल मौजूद है। खत्म होने से पहले ऑर्डर भेज दिया जाएगा। मरीजों को सीमित संसाधन में बेहतर सेवा देने का प्रयास है। ब्यूरो
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बरेली। आनुवंशिक बीमारी हीमोफीलिया से पीड़ित दो वर्षीय बच्चे की बृहस्पतिवार को मौत हो गई। इससे पूर्व माहभर में ही दो और लोगों की सांसें थम चुकी हैं। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज न मिलने से बच्चे की जान गई। उन्होंने हीमेटोलॉजिस्ट की तैनाती और जांच की व्यवस्था कराने की मांग की है।
किला के मुरावपुरा निवासी पंकज का दो वर्षीय बेटा कार्तिक के पिछले माह ही हीमोफीलिया फैक्टर-आठ से पीड़ित होने का पता चला। पिछले कुछ दिन से उसे पीलिया हुआ था। जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने पर केजीएमयू लखनऊ रेफर किया गया। बुधवार को वह वहां पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई।
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जीवन रेखा हीमोफीलिया जनकल्याण समिति की संरक्षक रेखा रानी व अन्य लोगों ने घर पहुंचकर बिलखती मां और परिवार वालों को ढांढस बंधाया। इससे पूर्व तीन मार्च को जसौली जागीर निवासी 52 वर्षीय ओम प्रकाश की मौत हुई थी। उनके दिमाग में रक्तस्राव होने लगा था। 23 फरवरी को देवरनियां के ढकिया निवासी 38 वर्षीय राम किशोर की मौत हुई थी।
रोग की पहचान में देरी, मरीजों
को उचित परामर्श की समस्या
समिति संरक्षक रेखा रानी के मुताबिक जिला अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने, खून चढ़ाने और फैक्टर आठ लगाने की व्यवस्था तो है लेकिन मरीजों को परामर्श देने के लिए हीमैटोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। रोग की पहचान के लिए लक्षण मिलने पर जांच के लिए लखनऊ और दिल्ली भेजा जाता है। जबकि हीमोफीलिया की समय से पहचान और त्वरित इलाज से जीवन प्रत्याशा बढ़ती है।
अक्सर खत्म हो जाता है फैक्टर आठ
जिला अस्पताल में आए दिन हीमोफीलिया मरीजों को चढ़ने वाले फैक्टर आठ की कमी रहती है। रेखा रानी के मुताबिक फैक्टर कम होने पर ही अगर शासन से फैक्टर मिल जाएं तो मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रभारी एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित के मुताबिक फैक्टर आठ फिलहाल मौजूद है। खत्म होने से पहले ऑर्डर भेज दिया जाएगा। मरीजों को सीमित संसाधन में बेहतर सेवा देने का प्रयास है। ब्यूरो