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Bareilly News: तीन साल में सिर्फ दो आवेदकों को ही मिल पाया ऋण
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बरेली। आंवला के सपा सांसद नीरज मौर्य ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र में कागजों पर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना चल रही है। हालत यह है कि योजना के तहत तीन साल में सिर्फ दो आवेदकों को ही ऋण मिल पाया है।
सपा सांसद ने बताया कि उन्होंने आंवला संसदीय क्षेत्र में पीएमईजीपी के तहत सूक्ष्म उद्यमों को दिए गए ऋण, सब्सिडी और लाभार्थियों की स्थिति पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी थी। सरकार की ओर से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग की राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लिखित उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि बीते दो वर्षों में आंवला क्षेत्र में पीएमईजीपी के तहत न तो कोई सब्सिडी जारी की गई और न कोई ऋण स्वीकृत हुआ। वर्ष 2022-23 में मात्र 6.04 लाख रुपये की सब्सिडी और 17.76 लाख रुपये का ऋण दिखाया गया। 2023-24 और 2024-25 में आंवला के खाते शून्य रहे। यह खुलासा उस क्षेत्र में बेरोजगारी और छोटे कारोबारियों की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इतना ही नहीं, आवेदन और स्वीकृति के बीच भारी अंतर भी सामने आया है। आंवला संसदीय क्षेत्र में 26 आवेदनों में से सिर्फ दो को ही स्वीकृति दी गई।
सपा सांसद ने कहा कि उन्होंने यह भी पूछा कि क्या युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को योजना का लाभ पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने माना कि बैंक स्तर पर ऋण स्वीकृति, दस्तावेजी जटिलता और प्रक्रिया की धीमी गति बड़ी बाधा बनी हुई है। आंवला जैसे क्षेत्रों में शून्य प्रगति पर सरकार ने कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया। ऐसे में युवाओं और छोटे उद्यमियों को योजना से वंचित रखा जाना सरकार की नीतिगत विफलता को उजागर करता है। ब्यूरो
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सपा सांसद ने बताया कि उन्होंने आंवला संसदीय क्षेत्र में पीएमईजीपी के तहत सूक्ष्म उद्यमों को दिए गए ऋण, सब्सिडी और लाभार्थियों की स्थिति पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी थी। सरकार की ओर से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग की राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लिखित उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि बीते दो वर्षों में आंवला क्षेत्र में पीएमईजीपी के तहत न तो कोई सब्सिडी जारी की गई और न कोई ऋण स्वीकृत हुआ। वर्ष 2022-23 में मात्र 6.04 लाख रुपये की सब्सिडी और 17.76 लाख रुपये का ऋण दिखाया गया। 2023-24 और 2024-25 में आंवला के खाते शून्य रहे। यह खुलासा उस क्षेत्र में बेरोजगारी और छोटे कारोबारियों की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इतना ही नहीं, आवेदन और स्वीकृति के बीच भारी अंतर भी सामने आया है। आंवला संसदीय क्षेत्र में 26 आवेदनों में से सिर्फ दो को ही स्वीकृति दी गई।
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सपा सांसद ने कहा कि उन्होंने यह भी पूछा कि क्या युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को योजना का लाभ पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने माना कि बैंक स्तर पर ऋण स्वीकृति, दस्तावेजी जटिलता और प्रक्रिया की धीमी गति बड़ी बाधा बनी हुई है। आंवला जैसे क्षेत्रों में शून्य प्रगति पर सरकार ने कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया। ऐसे में युवाओं और छोटे उद्यमियों को योजना से वंचित रखा जाना सरकार की नीतिगत विफलता को उजागर करता है। ब्यूरो
