Bareilly News: पुलिस ने किया साइबर ठगी का खुलासा, पेंशन खाते से 6.85 लाख रुपये निकालने का आरोपी गिरफ्तार
बरेली में साइबर क्राइम पुलिस ने एक पेंशन धारक से छह लाख 85 हजार रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोपी को गिरफ्तार किया है। उससे मोबाइल फोन व सिम बरामद किया गया। आरोपी गरीब लोगों को झांस में लेकर खाते खुलवाकर ठगी करता था। आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
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बरेली में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पेंशन धारक के खाते से छह लाख 85 हजार रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोपी को गिरफ्तार किया है। ट्यूलिया निवासी आरोपी अविनाश रस्तोगी को घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन और सिम के साथ पकड़ा गया। कोर्ट ने उसे जेल भेजा है।
रविवार को एसपी क्राइम मनीष सोनकर ने बताया कि तीन जून को प्रेमनगर इलाके के कानून गोयान मोहल्ला निवासी आनंद मोहन ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की थी। बताया कि 29 मई को जब वह अपने निजी कार्य के लिए रुपये निकालने बैंक गए तो खाते में रुपये नहीं थे। पता चला कि अज्ञात साइबर ठगों ने खाते से छह लाख 85 हजार रुपये निकाल लिए।
आनंद मोहन की ओर से साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। एसएसपी अनुराग आर्य ने खुलासा करने के निर्देश दिए और टीम गठित की गई। साइबर थाना प्रभारी धनंजय पांडेय ने तकनीकी साक्ष्य जुटाकर फतेहगंज पश्चिमी के ट्यूलिया निवासी अविनाश रस्तोगी को गिरफ्तार कर लिया।
दूसरे राज्यों में जाकर एटीएम से निकाली ठगी की रकम
एसपी क्राइम ने बताया कि गिरोह के सदस्यों ने ठगी की रकम को दूसरे राज्यों में जाकर डेबिट कार्ड के जरिये निकाल लिया था। अविनाश प्लाईवुड कंपनी में सुपरवाइजर की नौकरी करता था। सीबीगंज इलाके के साइबर ठग से दोस्ती के बाद वह भी इसी धंधे में उतर गया।
गरीब अशिक्षित लोगों के खाते खुलवाकर उनका संचालन अपने हाथ में लेता था। आनंद मोहन को झांसे में लेकर डीसीबी बैंक, बंधन बैंक, सरस्वती बैंक, इंडसंड बैंक, एक्सिस बैंक और यस बैंक के खातों में रकम ट्रांसफर की गई। रकम ट्रांसफर होने के बाद अविनाश के साथी दिल्ली और हरियाणा जाकर डेबिट कार्ड के जरिये एटीएम से नकदी निकाल लेते थे। इससे मनी ट्रेल ब्रेक हो जाती थी और शिकायत की स्थिति में पुलिस की जांच भटक जाती थी।
जिन खातों में रकम ट्रांसफर की गई है, उनका इस्तेमाल उत्तराखंड, तमिलनाडु, ओडिशा, राजस्थान और गुजरात व दमन दीव जैसे राज्यों में ठगी के लिए किया गया था। खातों के बारे में वहां भी शिकायतें की गई हैं। इन खातों से लिंक नंबर भी फर्जी आईडी पर लिए गए थे। सभी नंबरों की जांच की जा रही है।