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Bareilly News: ठगी के आरोपी रूप किशोर गोला और उसके 17 साथियों पर रिपोर्ट
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आईसीएल कंपनी के संचालक रूप किशोर गोला व उसके 16 साथियों के खिलाफ प्रेमनगर थाने में कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसमें 50 निवेशकों ने चिट फंड कंपनी के जरिये मुनाफे का झांसा देकर 32 लाख रुपये ठगी का आरोप लगाया है। गोला के खिलाफ 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। चार्जशीट भी लग चुकी है। गोला की हिस्ट्रीशीट भी खोली जा चुकी है।
आईसीएल कंपनी का मालिक रूपकिशोर गोला और उसका भाई अवधेश गोला गुर्गों संग मिलकर निवेशकों के करोड़ों रुपये डकार चुके हैं। बारादरी के चक महमूद निवासी अखलाक ने थाना प्रभारी अंजना दहिया को बताया कि आईसीएल कंपनी का चेयरमैन रूपकिशोर गोला, निदेशक अनिल साहू, जितेंद्र गुप्ता, दीपक कुमार, अवधेश गोला और दिनेश कुमार 2023 में पुष्पेंद्र के माध्यम से मिलने आए थे। इन लोगों ने आईसीएल, आईसीएल म्यूचल फंड्स बेनिफिट्स काॅर्पोरेशन, आईसीएल मल्टी ट्रेडिंग आदि कंपनियों के बारे में बताया और कहा कि कंपनियों का कैपिटल करोड़ों में है।
अखलाक और उनकी पत्नी इमराना इनकी कंपनी में काम करने लगे। अखलाक ने अपने और दूसरों के रुपये कंपनी में निवेश कराए। अखलाक ने बताया कि रुपये डूबने के बाद निवेशक फरहत अली, परवीन बानो, सैय्यद जुल्फिकार, परवीन, रईस मियां, अतीक अहमद, अकील शेख और हबीब रास्ते में घेरते और पिटाई करते हैं। महिला निवेशक दुष्कर्म के झूठे आरोप में जेल भिजवाने की धमकी देती हैं। गोला बंधुओं और उनके गुर्गों ने 50 निवेशकों के करीब 32 लाख रुपये हड़प लिए हैं। आरके गोला का गुर्गा जितेंद्र गुप्ता एक राजनीतिक पार्टी से जुड़कर प्रदेश स्तर का पदाधिकारी बन गया है। कंपनी के लोग रकम लौटाने के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दे रहे हैं। न्यायालय के आदेश पर प्रेमनगर पुलिस ने अखलाक की ओर से रिपोर्ट दर्ज की है।
गैंगस्टर के बाद भी नहीं हो सकी बड़ी कार्रवाई
गोला बंधुओं पर धोखाधड़ी के कई मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। भीड़ ने रूपकिशोर गोला और जितेंद्र गुप्ता को पकड़कर प्रेमनगर पुलिस को सौंप दिया था, इसलिए पुलिस को मजबूरी में दोनों को जेल भेजना पड़ा था। इसके बाद कई मुकदमों में रूपकिशोर के भाई अवधेश गोला का नाम भी आया, लेकिन पुलिस ने उसे आज तक नहीं पकड़ा। वह कचहरी में आकर धोखाधड़ी के मुकदमों में पैरवी करता रहा है। वर्ष 2024 में प्रेमनगर पुलिस ने रूपकिशोर गोला, जितेंद्र गुप्ता और दिनेश कुमार पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। इसमें भी अवधेश को बचा दिया गया था। गैंगस्टर लगने के बाद पुलिस उनकी एक भी संपत्ति चिह्नित नहीं कर सकी। इससे निवेशक निराश है। वहीं गोला बंधुओं के साथ मिलकर ठगी करने वाले जालसाज खुद ही रिपोर्ट कराने लगे हैं, ताकि कानूनी दांवपेंच कर गर्दन बचाई जा सके।
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आईसीएल कंपनी का मालिक रूपकिशोर गोला और उसका भाई अवधेश गोला गुर्गों संग मिलकर निवेशकों के करोड़ों रुपये डकार चुके हैं। बारादरी के चक महमूद निवासी अखलाक ने थाना प्रभारी अंजना दहिया को बताया कि आईसीएल कंपनी का चेयरमैन रूपकिशोर गोला, निदेशक अनिल साहू, जितेंद्र गुप्ता, दीपक कुमार, अवधेश गोला और दिनेश कुमार 2023 में पुष्पेंद्र के माध्यम से मिलने आए थे। इन लोगों ने आईसीएल, आईसीएल म्यूचल फंड्स बेनिफिट्स काॅर्पोरेशन, आईसीएल मल्टी ट्रेडिंग आदि कंपनियों के बारे में बताया और कहा कि कंपनियों का कैपिटल करोड़ों में है।
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अखलाक और उनकी पत्नी इमराना इनकी कंपनी में काम करने लगे। अखलाक ने अपने और दूसरों के रुपये कंपनी में निवेश कराए। अखलाक ने बताया कि रुपये डूबने के बाद निवेशक फरहत अली, परवीन बानो, सैय्यद जुल्फिकार, परवीन, रईस मियां, अतीक अहमद, अकील शेख और हबीब रास्ते में घेरते और पिटाई करते हैं। महिला निवेशक दुष्कर्म के झूठे आरोप में जेल भिजवाने की धमकी देती हैं। गोला बंधुओं और उनके गुर्गों ने 50 निवेशकों के करीब 32 लाख रुपये हड़प लिए हैं। आरके गोला का गुर्गा जितेंद्र गुप्ता एक राजनीतिक पार्टी से जुड़कर प्रदेश स्तर का पदाधिकारी बन गया है। कंपनी के लोग रकम लौटाने के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दे रहे हैं। न्यायालय के आदेश पर प्रेमनगर पुलिस ने अखलाक की ओर से रिपोर्ट दर्ज की है।
गैंगस्टर के बाद भी नहीं हो सकी बड़ी कार्रवाई
गोला बंधुओं पर धोखाधड़ी के कई मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। भीड़ ने रूपकिशोर गोला और जितेंद्र गुप्ता को पकड़कर प्रेमनगर पुलिस को सौंप दिया था, इसलिए पुलिस को मजबूरी में दोनों को जेल भेजना पड़ा था। इसके बाद कई मुकदमों में रूपकिशोर के भाई अवधेश गोला का नाम भी आया, लेकिन पुलिस ने उसे आज तक नहीं पकड़ा। वह कचहरी में आकर धोखाधड़ी के मुकदमों में पैरवी करता रहा है। वर्ष 2024 में प्रेमनगर पुलिस ने रूपकिशोर गोला, जितेंद्र गुप्ता और दिनेश कुमार पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। इसमें भी अवधेश को बचा दिया गया था। गैंगस्टर लगने के बाद पुलिस उनकी एक भी संपत्ति चिह्नित नहीं कर सकी। इससे निवेशक निराश है। वहीं गोला बंधुओं के साथ मिलकर ठगी करने वाले जालसाज खुद ही रिपोर्ट कराने लगे हैं, ताकि कानूनी दांवपेंच कर गर्दन बचाई जा सके।
