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Basti News: तापमान बढ़ते ही बिगड़ने लगी तबीयत, डायरिया के बढ़े मरीज
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बस्ती। तेज धूप के बीच बरती जा रही लापरवाही अब बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। खानपान में गड़बड़ी और साफ-सफाई की अनदेखी के चलते जिले में डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। इसका असर यह है कि जिला अस्पताल में रोजाना ऐसे बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
मौसम परिवर्तन के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इस समय तेज धूप हो रहा है। जिसके चलते लोगों का खान पान प्रभावित हो रहा है। इससे वे जल्दी निमोनिया और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। खुले में बिकने वाला खाद्य पदार्थ, दूषित पानी, हाथों की सही तरीके से सफाई न होना और गर्मी से बचाव में लापरवाही बीमारियों का प्रमुख कारण बन रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 15 से 20 बच्चों में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ एसडी ओझा के अनुसार बच्चों को आवश्यक जांच के बाद दवाएं देकर घर भेज रहे हैं। राहत की बात यह है कि अभी किसी भी बच्चे को भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिलाएं, बाहर का तला-भुना और खुले में रखा भोजन न दें।
इसके साथ ही बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं और हाथ धोने की आदत डालें। उन्होंने सांस संबंधी परेशानी, तेज बुखार या लगातार दस्त की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाने की बात कही। कहा कि गर्मी के चलते बच्चों में यह परेशानी बढ़ी है।
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मौसम परिवर्तन के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इस समय तेज धूप हो रहा है। जिसके चलते लोगों का खान पान प्रभावित हो रहा है। इससे वे जल्दी निमोनिया और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। खुले में बिकने वाला खाद्य पदार्थ, दूषित पानी, हाथों की सही तरीके से सफाई न होना और गर्मी से बचाव में लापरवाही बीमारियों का प्रमुख कारण बन रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 15 से 20 बच्चों में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ एसडी ओझा के अनुसार बच्चों को आवश्यक जांच के बाद दवाएं देकर घर भेज रहे हैं। राहत की बात यह है कि अभी किसी भी बच्चे को भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिलाएं, बाहर का तला-भुना और खुले में रखा भोजन न दें।
इसके साथ ही बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं और हाथ धोने की आदत डालें। उन्होंने सांस संबंधी परेशानी, तेज बुखार या लगातार दस्त की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाने की बात कही। कहा कि गर्मी के चलते बच्चों में यह परेशानी बढ़ी है।
