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Basti News: मनोरमा की सफाई पर भाजपा नेता आमने-सामने
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एक्सड़ा पुल के पास मनोरमा में सिल्ट और शैवाल की भरमार। संवाद
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बस्ती। मनोरमा नदी की सफाई को लेकर सत्तारूढ़ दल के दो नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। एक ओर सामाजिक कार्यकर्ता व भाजपा नेता चंद्रमणि पांडेय ‘सुदामा’ जनसहयोग से तत्काल सफाई अभियान शुरू करने पर अड़े हैं, वहीं हर्रैया विधायक अजय सिंह बिना समुचित बजट और परियोजना स्वीकृति के अभियान चलाने के पक्ष में नहीं हैं। इस टकराव के चलते प्रशासन भी असमंजस में पड़ गया है और प्रस्तावित सफाई अभियान से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
मनोरमा नदी की बदहाल स्थिति को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे चंद्रमणि पांडेय का कहना है कि प्रशासन ने 18 मार्च से सफाई अभियान में सहयोग का आश्वासन दिया था, लेकिन ऐन वक्त पर अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। उनका आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते यह पहल रोक दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब जनसहयोग से सफाई अभियान शुरू कर दिया गया है और इसे किसी भी कीमत पर रोका नहीं जाएगा।
दूसरी ओर हर्रैया विधायक अजय सिंह का कहना है कि बिना ठोस योजना और बजट के सफाई अभियान चलाना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि मनोरमा की सफाई के लिए 115 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई थी, एनजीटी की वजह से यह परियोजना अब तक परवान नहीं चढ़ पाई है। केंद्र सरकार से इस परियोजना को स्वीकृत कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन को भी इसमें सहयोग करना चाहिए। 19 जनवरी 2018 को मुख्यमंत्री मखौड़ा धाम आए थे। उन्होंने मनोरमा नदी की सफाई की बात कही थी। इसके बाद ड्रोन से मनोरमा नदी का सर्वे हुआ था। इसके बाद सिंचाई विभाग ने 115 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा था।
विधायक का यह भी कहना है कि केवल घास या सतही सफाई से नदी पुनर्जीवित नहीं होगी, बल्कि सिल्ट हटाकर नदी का बहाव तेज करना जरूरी है। इसके लिए वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से कार्य होना चाहिए। दोनों नेताओं के अलग-अलग रुख के कारण प्रशासन फिलहाल किसी भी पक्ष में खुलकर कदम नहीं उठा पा रहा है।
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मनोरमा नदी की बदहाल स्थिति को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे चंद्रमणि पांडेय का कहना है कि प्रशासन ने 18 मार्च से सफाई अभियान में सहयोग का आश्वासन दिया था, लेकिन ऐन वक्त पर अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। उनका आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते यह पहल रोक दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब जनसहयोग से सफाई अभियान शुरू कर दिया गया है और इसे किसी भी कीमत पर रोका नहीं जाएगा।
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दूसरी ओर हर्रैया विधायक अजय सिंह का कहना है कि बिना ठोस योजना और बजट के सफाई अभियान चलाना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि मनोरमा की सफाई के लिए 115 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई थी, एनजीटी की वजह से यह परियोजना अब तक परवान नहीं चढ़ पाई है। केंद्र सरकार से इस परियोजना को स्वीकृत कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन को भी इसमें सहयोग करना चाहिए। 19 जनवरी 2018 को मुख्यमंत्री मखौड़ा धाम आए थे। उन्होंने मनोरमा नदी की सफाई की बात कही थी। इसके बाद ड्रोन से मनोरमा नदी का सर्वे हुआ था। इसके बाद सिंचाई विभाग ने 115 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा था।
विधायक का यह भी कहना है कि केवल घास या सतही सफाई से नदी पुनर्जीवित नहीं होगी, बल्कि सिल्ट हटाकर नदी का बहाव तेज करना जरूरी है। इसके लिए वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से कार्य होना चाहिए। दोनों नेताओं के अलग-अलग रुख के कारण प्रशासन फिलहाल किसी भी पक्ष में खुलकर कदम नहीं उठा पा रहा है।