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Basti News: शहरी तर्ज पर चारों तहसील में बनेगा एफएसटीपी...मिली मंजूरी

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Apr 2026 02:42 AM IST
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FSTP will be built in all four tehsils on urban lines...approval received
नगरपालिका बस्ती में संचालित एफएसटीपी प्लांट संवाद - फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। शहर की तर्ज पर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित किए जाएंगे। इनपर करीब चार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे सेप्टिक टैंक खाली कराने की समस्या नहीं रहेगी। इसके लिए जमीन की तलाश शुरू हो गई है।
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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिले की 1187 ग्राम पंचायतों में गंदगी दूर करने के साथ ही शौचालय के टैंक से निकलने वाले मल-जल को शोधित कर खाद बनाने व पानी को फसल की सिंचाई योग्य बनाने के लिए पंचायती राज विभाग जिले में चार एफएसटीपी का निर्माण कराएगा। जिसके लिए सभी चारों तहसील में ग्राम पंचायतों में एक-एक एकड़ भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बताया गया कि जिले की चारों तहसीलों में फीकल स्लज मैनेजमेंट इकाई (एफएसटीपी) लगेगी।
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शासन से आए आदेश के बाद बस्ती सदर, हर्रैया, रुधौली और भानपुर तहसील क्षेत्र में जगह चिह्नित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही भूमि मिल जाएगी और फिर प्लांट के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। शासन स्तर से इसके लिए लक्ष्य जारी किया गया है। विभाग का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी संख्या में शौचालय बनवाए गए हैं। शौचालयों की सफाई में असुविधा हो रही है। ऐसे में शासन स्तर पर एफएसटीपी प्लांट के निर्माण की स्वीकृति दी गई है।
इस प्लांट में शहरी की तरह ही ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों की गंदगी को ट्रीटमेंट कराया जाएगा। बताया गया कि अभी स्थिति यह है कि, शौचालय के सीवर टैंक की सफाई के दौरान सारा अपशिष्ट एक मशीन में भर लिया जाता है। इसके बाद मशीन से निकला अपशिष्ट जहां-तहां कूड़े में डाल दिया जाता है, जिससे दुर्गंध फैलती है। अब इस अपशिष्ट को यहां-वहां न फेंककर पहले फिल्टर किया जाएगा।
एफएसटीपी से अपशिष्ट से साॅलिड वेस्ट व लिक्विड अलग किया जाएगा। साॅलिड वेस्ट का प्रयोग खाद के रूप में किया जाएगा। एफएसटीपी लगाने के लिए शासन से आदेश जारी हो गया है। जल्द ही सभी चारों तहसील में भूमि का चयन कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। इससे 1187 ग्राम पंचायतों में निवास करने वाली आबादी को सहूलियत मिलेगी।
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एफएसटीपी निर्माण के यह रहेंगे मानक

डीपीसी राजाशेर सिंह के अनुसार, एफएसटीपी का निर्माण एक एकड़ भूमि पर कराया जाएगा। मानकों के मुताबिक, चिह्नित जगह उस स्थान पर हो, जहां आसानी से वाहन पहुंच सकें और आबादी से उसकी दूरी करीब 250-500 मीटर हो। रिहायशी क्षेत्र से पर्याप्त दूरी हो, ताकि दुर्गंध, शोर या संक्रमण की समस्या न हो। जल निकासी का भी उचित प्रबंध हो। बिजली, पानी व अन्य संसाधन प्लांट के पास हों, जिससे वहां काम आसानी से कराया जा सके।

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तीन हजार से अधिक आबादी वाले गांवों को तरजीह

एफएसटीपी का निर्माण उन गांवों में कराया जाएगा, जिसकी आबादी तीन हजार से अधिक होगी। आबादी क्षेत्र से 250 से 500 मीटर दूरी पर इनका निर्माण होगा ताकि लोगों को दुर्गंध, शोर तथा संक्रमण की समस्या का सामना न करना पड़े।एक एफएसटीपी के संचालन के लिए 30 किलोवाट बिजली और 5000 लीटर पानी की आवश्यकता होगी। प्रत्येक की क्षमता छह केएलडी होगी। लागत भी चार करोड़ के आसपास होगी।
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शहर में संचालित है एक एफएसटीपी प्लांट

नगर पालिका परिषद बस्ती के अधीन शहरी क्षेत्र में एक एफएसटीपी प्लांट संचालित है। 4.43 करोड़ रुपये की लागत से बना प्लांट क्रियाशील है। लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत बने अपशिष्ट शोधन संयंत्र (एफएसटीपी) को ट्राॅयल के बाद लोगों के लिए पूरी तरह क्रियाशील कर दिया गया है। शहरवासी 2300 रुपये शुल्क जमा कर इस सुविधा का फायदा उठा रहे हैं। अधिकतर शौचालयों से निकले गंदगी को ट्रीटमेंट किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर के शौचालय के पानी को भी एफएसटीपी संयंत्र से ट्रीटमेंट कर उसके पानी का उपयोग में ला रहे। इस पानी से सिंचाई हो सकेगी। यही नहीं यहां से शेष बचे पानी को शहर के विभिन्न मार्गों के डिवाइडर में लगे पौधों एवं अन्य उद्यानों में भी उपयोग किया जा सकेगा।
कोट
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जिले में चार एफएसटीपी का निर्माण कराया जाएगा। जिसके लिए जमीन चिह्नित किया जा रहा है। दोनों एफएसटीपी के निर्माण में करीब चार करोड़ खर्च होंगे। जिला स्तर पर सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

-घनश्याम सागर, डीपीआरओ, बस्ती।

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